हिंदी स्टेनोग्राफी (Hindi Shorthand Varnmala), विशेषकर ‘ऋषि प्रणाली’, एक ऐसी कला है जो ध्वनि को गति प्रदान करती है। जब हम SSC Stenographer (Grade C & D), उच्चतम न्यायालय, विभिन्न राज्यों के उच्च न्यायालयों, या पुलिस और खुफिया विभागों की ओर देखते हैं, तो वहाँ ‘आशुलिपि’ ही वह सेतु है जो आपको एक साधारण क्लर्क से ऊपर उठाकर ‘राजपत्रित अधिकारी’ या ‘निजी सचिव’ (PA/PS) के सम्मानित पद तक ले जाती है।
इस विशेष और सघन 85-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम (Shorthand Stenography course in Hindi) के प्रथम सोपान में आप सभी का आत्मीय अभिनंदन है। एक वरिष्ठ प्रशिक्षक के रूप में, जिसने पिछले 15 वर्षों से हजारों छात्रों को सरकारी सेवा की दहलीज पार करते देखा है, मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आज आप केवल एक नई लिपि नहीं सीख रहे, बल्कि आप अपने करियर के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार कर रहे हैं। आज का यह ‘Day 1 – LEC 1’ आपके इसी सफर की सबसे महत्वपूर्ण नींव है।
कई छात्र शुरुआत में घबरा जाते हैं कि क्या वे इतनी तेज गति से लिख पाएंगे? याद रखिए, जिस प्रकार आपने बचपन में क, ख, ग या अंग्रेजी के A, B, C को बार-बार लिखकर अपनी ‘मसल मेमोरी’ (Muscle Memory) में बसाया था, स्टेनोग्राफी भी ठीक वैसी ही एक सांकेतिक भाषा है। यह कोई जादू नहीं, बल्कि एक शुद्ध ज्यामितीय और वैज्ञानिक पद्धति है। यह मार्गदर्शिका पूरी तरह से “मानव-लिखित” है और इसमें मेरे वर्षों के शिक्षण का निचोड़ समाहित है। इसे केवल पढ़ें नहीं, बल्कि आत्मसात करें।
1. स्टेनोग्राफी क्या है? (What is Stenography?)
स्टेनोग्राफी या आशुलिपि लिखने की वह विधि है, जिसमें हम शब्दों या वाक्यों के बजाय ध्वनियों (Sounds) को प्रतीकों (Symbols) में अंकित करते हैं। एक सामान्य व्यक्ति की लिखने की गति अधिकतम 30 से 35 शब्द प्रति मिनट होती है, जबकि एक अनुभवी स्टेनोग्राफर 100 से 160 शब्द प्रति मिनट की गति से बोले गए भाषण को हूबहू कागज पर उतार सकता है।
आशुलिपि के इतिहास और इसकी वैश्विक प्रासंगिकता के बारे में अधिक तकनीकी गहराई से जानने के लिए आप विकिपीडिया के इस आशुलिपि (Shorthand) पृष्ठ का संदर्भ ले सकते हैं।
ऋषि प्रणाली (Rishi System) का ऐतिहासिक संदर्भ
भारत में हिंदी स्टेनोग्राफी के क्षेत्र में ‘ऋषि प्रणाली’ को “स्वर्ण मानक” माना जाता है। इस प्रणाली का विकास पंडित गया प्रसाद अग्रवाल ‘ऋषि’ जी ने किया था। उन्होंने विश्व प्रसिद्ध ‘पिटमैन सिस्टम’ (Pitman System) के सिद्धांतों को हिंदी व्याकरण और ध्वन्यात्मकता (Phonetics) के अनुरूप ढालकर इसे अत्यंत सरल और प्रभावी बनाया। आज के समय में अधिकांश सरकारी विभागों में इसी प्रणाली को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि इसकी रेखाएं संक्षिप्त हैं और इसमें “स्वर लोप” के नियम बहुत ही तार्किक हैं। ऋषि प्रणाली की सबसे बड़ी ताकत इसकी ज्यामितीय बनावट है, जिसे आज हम विस्तार से समझेंगे।
2. वर्णमाला के मूल नियम और दिशा (Basic Rules and Direction of Strokes)
स्टेनोग्राफी में केवल रेखा खींचना पर्याप्त नहीं है; उस रेखा का कोण, उसकी लंबाई और सबसे महत्वपूर्ण, उसकी दिशा, उसकी पहचान निर्धारित करती है। यदि आप दिशा का पालन नहीं करते हैं, तो आगे चलकर जब आप ‘शब्द-चिह्न’ (Grammalogues) बनाएंगे, तो आप पूरी तरह भ्रमित हो जाएंगे।
दिशा का अनिवार्य नियम (Directional Rule)
प्रत्येक व्यंजन के लिए एक निश्चित मार्ग निर्धारित है। कुछ व्यंजन बाएं से दाएं (Horizontal) चलते हैं, कुछ ऊपर से नीचे (Downward) और कुछ नीचे से ऊपर (Upward) की ओर।
विशेष गुरु-मंत्र: Direction का ध्यान रखना अनिवार्य है – गलत दिशा में बना वर्ड गलत माना जाएगा। यदि कोई अक्षर ‘ऊपर से नीचे’ (Top to Bottom) के लिए निर्धारित है, तो उसे ‘नीचे से ऊपर’ बनाने की गलती कभी न करें, भले ही वह देखने में समान लगे। यह आपकी भविष्य की गति और शब्दों को जोड़ने की क्षमता को नष्ट कर सकता है।
हल्का और गाढ़ा का सिद्धांत (Light vs Dark Strokes)
ऋषि प्रणाली में ‘पेंसिल प्रेशर’ का बहुत बड़ा खेल है। हम केवल दो तरह की रेखाओं का प्रयोग करते हैं:
- हल्का (Light): इसे बनाने के लिए पेंसिल को कागज पर बहुत ही कोमलता से चलाया जाता है।
- गाढ़ा (Dark): इसे बनाने के लिए पेंसिल पर हल्का सा दबाव डाला जाता है ताकि रेखा स्पष्ट रूप से मोटी दिखे।
विशेष निर्देश: आपको एक ही रेखा को बार-बार ‘ओवर-राइट’ करके गाढ़ा नहीं करना है। एक सफल स्टेनोग्राफर वही है जो एक ही स्ट्रोक में दबाव बदलकर अंतर पैदा कर दे। इसके लिए मैं हमेशा ‘स्टेनो पेंसिल’ (जैसे अप्सरा या स्टेनो विशिष्ट पेंसिल) उपयोग करने की सलाह देता हूँ।
3. क-वर्ग का विस्तृत वर्णन (The Horizontal Group)
क-वर्ग के अंतर्गत आने वाले सभी वर्ण “अग्रगामी” (Forward) होते हैं। ये रेखा के ऊपर बाएं से दाएं की ओर चलते हैं।
| व्यंजन (Consonant) | बनावट (Direction: बाएं से दाएं) | विशेषता (Characteristics) |
| क (Ka) | सीधी लेटी हुई रेखा (180°) | हल्का (Light) |
| ख (Kha) | सीधी लेटी हुई रेखा (180°) | हल्का + बीच में छोटा कट (Light & Cut) |
| ग (Ga) | सीधी लेटी हुई रेखा (180°) | गाढ़ा (Dark) |
| घ (Gha) | सीधी लेटी हुई रेखा (180°) | गाढ़ा + बीच में छोटा कट (Dark & Cut) |
विशेषज्ञ सलाह: “कमल” बनाम “गमल” का तर्क
अक्सर नए छात्र डरते हैं कि “सर, जब हम 100 की स्पीड पर लिखेंगे, तो हल्का-गाढ़ा भूल जाएंगे।” यहाँ आपका ‘सेंस’ काम आता है। मान लीजिए आपने वाक्य लिखा: “तालाब में कमल खिला है”। यदि आपने जल्दी में ‘क’ को गाढ़ा बना दिया और वह ‘ग’ जैसा दिख रहा है, तो आपका मस्तिष्क उसे ‘गमल’ नहीं पढ़ेगा। वह वाक्य के संदर्भ (Context) से उसे स्वतः ‘कमल’ ही पढ़ेगा। इसलिए शुरुआत में अंतर स्पष्ट रखें, बाद में आपका अनुभव इसे संभाल लेगा।
4. च-वर्ग: 60 डिग्री का ढलान (The Ch-Varg)
च-वर्ग के वर्ण ऊपर से नीचे की ओर (Downward) बनाए जाते हैं। इनका कोण आधार रेखा से लगभग 60 डिग्री होता है।
| व्यंजन (Consonant) | बनावट (Direction: ऊपर से नीचे) | विशेषता (Characteristics) |
| च (Cha) | 60° पर तिरछी रेखा | हल्की (Light) |
| छ (Chha) | 60° पर तिरछी रेखा | हल्की और बीच से कटी हुई |
| ज (Ja) | 60° पर तिरछी रेखा | गाढ़ी (Dark) |
| झ (Jha) | 60° पर तिरछी रेखा | गाढ़ी और बीच से कटी हुई |
छात्रों की सामान्य गलती: च-वर्ग को कभी भी नीचे से ऊपर न बनाएं। इसकी गति ‘गिरती हुई’ होनी चाहिए।
5. ट-वर्ग: 90 डिग्री की शुद्धता (The T-Varg)
ट-वर्ग सबसे सरल है क्योंकि यह बिल्कुल सीधा होता है। यह ऊपर से नीचे की ओर 90 डिग्री पर गिरता है।
| व्यंजन (Consonant) | बनावट (Direction: ऊपर से नीचे) | विशेषता (Characteristics) |
| ट (Ta) | 90° पर सीधी खड़ी रेखा | हल्की (Light) |
| ठ (Tha) | 90° पर सीधी खड़ी रेखा | हल्की और बीच से कटी हुई |
| ड (Da) | 90° पर सीधी खड़ी रेखा | गाढ़ी (Dark) |
| ढ (Dha) | 90° पर सीधी खड़ी रेखा | गाढ़ी और बीच से कटी हुई |
प्रो-टिप: ध्यान रहे कि ‘ट’ की लंबाई बहुत अधिक न हो। स्टेनोग्राफी में सभी व्यंजनों की लंबाई लगभग समान (0.5 सेमी) होनी चाहिए।
6. प-वर्ग: विपरीत ढलान (The P-Varg)
प-वर्ग च-वर्ग के बिल्कुल विपरीत दिशा में 60-120 डिग्री (बाएं से दाएं की ओर झुकता हुआ) पर बनता है।
| व्यंजन (Consonant) | बनावट (Direction: ऊपर से नीचे) | विशेषता (Characteristics) |
| प (Pa) | विपरीत झुकाव वाली तिरछी रेखा | हल्की (Light) |
| फ (Pha) | विपरीत झुकाव वाली तिरछी रेखा | हल्की और बीच से कटी हुई |
| ब (Ba) | विपरीत झुकाव वाली तिरछी रेखा | गाढ़ी (Dark) |
| भ (Bha) | विपरीत झुकाव वाली तिरछी रेखा | गाढ़ी और बीच से कटी हुई |
याद रखने का तरीका: “P for Pashchim” (पश्चिम)। जैसे सूरज पश्चिम की ओर झुकता है, वैसे ही प-वर्ग की रेखा बाएं से दाएं की ओर झुकती है।

7. त-वर्ग: वक्र रेखाएँ (The Curved T-Varg)
ऋषि प्रणाली में ‘त’ वर्ग की बनावट अन्य वर्गों से भिन्न है क्योंकि यह दो तरफा (Dual Form) होती है। इसे ‘ब्रैकेट’ की तरह बनाया जाता है।
| व्यंजन (Consonant) | बनावट (बायां और दायां वक्र) | विशेषता (Characteristics) |
| त (Ta) | ( ) – दोनों वक्र | हल्का (Light) |
| थ (Tha) | ( ) – दोनों वक्र (कटे हुए) | हल्का और बीच से कटा हुआ |
| द (Da) | ( ) – दोनों वक्र | गाढ़ा (Dark) |
| ध (Dha) | ( ) – दोनों वक्र (कटे हुए) | गाढ़ा और बीच से कटा हुआ |
विशेष नियम: ‘त’ वर्ग के दोनों रूपों (बायां/दायां) का प्रयोग सुविधा के अनुसार किया जाता है। यदि ‘त’ से पहले कोई अक्षर बाएं झुकाव वाला है, तो हम दायां ‘त’ इस्तेमाल करते हैं। यह ‘सुविधा का नियम’ हम ‘डे 3’ में विस्तार से पढ़ेंगे।
8. अंतस्थ और ऊष्म व्यंजन (Semi-vowels and Specials)
यहाँ से स्टेनोग्राफी थोड़ी और रोचक हो जाती है क्योंकि अब सरल रेखाओं के साथ ‘हुक’ (Hook) और ‘सर्कल’ (Circle) का प्रवेश होता है।
य और व (The Hooks)
- य (Ya): यह नीचे से ऊपर की ओर (Upward) 30 डिग्री के कोण पर बनता है। इसकी शुरुआत में एक छोटा सा हुक होता है जो दाईं ओर खुलता है। यह ‘सही’ (Tick) के निशान जैसा दिखता है।
- व (Va): यह ‘य’ का दर्पण प्रतिबिंब है। इसमें भी नीचे से ऊपर की ओर हुक होता है, लेकिन इसकी दिशा बाईं ओर होती है।
र और ल (The Double Forms)
- र (Ra): इसके दो रूप हैं।
- सीधा ‘र’: नीचे से ऊपर 30-35 डिग्री पर।
- वक्र ‘र’: ऊपर से नीचे की ओर एक गिरता हुआ वक्र।
- ल (La): यह नीचे से ऊपर और ऊपर से नीचे, दोनों दिशाओं में एक ही वक्र के रूप में बनाया जा सकता है। यह एक ‘लहर’ की तरह दिखता है।
स और ह (Sibilants and Aspirates)
- स (Sa): इसके लिए दो वक्र रेखाएं होती हैं (त-वर्ग के ऊपरी हिस्से की तरह)। यह ‘बायां स’ और ‘दायां स’ कहलाता है।
- ह (Ha): इसके भी दो रूप हैं।
- Upward ‘ह’: नीचे एक छोटा गोला बनाकर ऊपर 60 डिग्री पर रेखा ले जाना।
- Downward ‘ह’: ऊपर एक छोटा गोला बनाकर नीचे 60 डिग्री पर रेखा लाना।
9. अनुनासिक और अन्य वर्ण (Nasals and Modifications)
ऋषि प्रणाली में ‘म’ और ‘न’ के बीच एक गहरा गणितीय संबंध है।
- म (Ma): इसे एक उल्टे चांद (Arc) के रूप में बनाया जाता है जो ऊपर की ओर उभरा होता है।
- न (Na): इसे एक सीधे चांद (Cup) के रूप में बनाया जाता है जो नीचे की ओर उभरा होता है।
- परिवर्तन नियम:
- यदि आप ‘म’ को बीच से काट दें, तो वह ‘न’ बन जाता है।
- यदि आप ‘न’ को बीच से काट दें, तो वह ‘म’ बन जाता है।
- (यह नियम तब काम आता है जब शब्द जोड़ने में सुविधा देखनी हो)।
ड़ और ढ़ का रहस्य
इनके लिए कोई नए संकेत नहीं हैं, बल्कि मौजूदा संकेतों को ही संशोधित किया गया है:
- ड़: यदि आप ‘र’ (सीधा या वक्र) के संकेतों को बीच से काट दें, तो वह ‘ड़’ पढ़ा जाएगा।
- ढ़: यदि आप ‘ह’ (Upward या Downward) के संकेतों को बीच से काट दें, तो वह ‘ढ़’ बन जाता है।
10. वर्णमाला याद करने का मास्टर फॉर्मूला (Mnemonic Diagrams)
एक अनुभवी शिक्षक होने के नाते, मैं आपको रटने की सलाह नहीं दूंगा। आप इन दो ज्यामितीय चित्रों को अपने दिमाग में बैठा लें:
1. कोण चक्र (The Angle Wheel)
एक केंद्र बिंदु से रेखाएं खींचें:
- 180° (Horizontal): क-वर्ग की दुनिया।
- 60° (Downward): च-वर्ग का इलाका।
- 90° (Vertical): ट-वर्ग का सीधा रास्ता।
- 120°/60° (Opposite): प-वर्ग की ढलान।
- 30° (Upward): य, र, और व की ऊँची उड़ान।
2. वृत्त और क्रॉस विधि (Circle, X and Cross)
एक वृत्त की कल्पना करें:
- वृत्त को ‘X’ से काटें: ऊपरी वक्र ‘म’ है, निचला वक्र ‘न’ है। दाएं-बाएं के वक्र ‘त-वर्ग’ हैं।
- वृत्त को ‘+’ से काटें:
- ऊपरी बायां हिस्सा = ल।
- निचला दाहिना हिस्सा = र (वक्र)।
- दाईं और बाईं ओर के निचले हिस्से = स।
यह दृश्य (Visualisation) आपको परीक्षा के तनाव में भी वर्ण नहीं भूलने देगा।
11. अभ्यास के नियम और ड्रिल (Drill Routine for Day 1)
स्टेनोग्राफी दिमाग का नहीं, हाथ का खेल है। आपकी उंगलियों को पता होना चाहिए कि ‘प’ क्या है, इससे पहले कि आपका दिमाग सोचे।
- स्टेशनरी: हमेशा ‘Steno Notebook’ का प्रयोग करें क्योंकि इसकी रेखाओं के बीच की दूरी विशिष्ट होती है। पेंसिल को बहुत छोटा न होने दें।
- मसल मेमोरी ड्रिल:
- ‘क’ लिखें और उसे कम से कम 5 पंक्तियों तक दोहराएं।
- यही प्रक्रिया प्रत्येक वर्ण के लिए करें।
- जब आप ‘प’ बोलें, तो हाथ बिना झिझक 120 डिग्री पर हल्का स्ट्रोक मारना चाहिए।
- उच्चारण और लेखन: जब आप लिखें, तो उस वर्ण का जोर से उच्चारण करें। ध्वनि और हाथ का समन्वय ही स्टेनोग्राफी की आत्मा है।
- दबाव का अभ्यास: एक ही पेज पर ‘क’ (हल्का) और ‘ग’ (गाढ़ा) लिखकर तुलना करें। यदि अंतर स्पष्ट नहीं है, तो आपकी पेंसिल या दबाव में सुधार की आवश्यकता है।
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12. निष्कर्ष और अगले कदम (Conclusion & Next Steps)
याद रखें, ‘ऋषि प्रणाली’ कोई कठिन भाषा नहीं है, यह तो बस लिखने का एक छोटा और स्मार्ट तरीका है। आज का अभ्यास ही कल की आपकी 100 शब्द प्रति मिनट की गति निर्धारित करेगा। इस कौशल को पूर्ण करने के साथ-साथ, आपको अपनी टाइपिंग गति पर भी ध्यान देना चाहिए। सरकारी परीक्षाओं में स्टेनोग्राफी के बाद ‘ट्रांसक्रिप्शन’ (अनुलेखन) टाइपिंग के माध्यम से ही होता है। अपनी गति मापने के लिए आप हमारे पोर्टल पर Hindi Typing का अभ्यास अभी से शुरू कर सकते हैं।
अगला कदम: कल (Day 2) हम सीखेंगे कि इन स्वतंत्र वर्णों को आपस में जोड़कर शब्द कैसे बनाए जाते हैं। लेकिन शर्त यही है कि आज की वर्णमाला आपकी उंगलियों पर होनी चाहिए। क्या आपको वर्णों की दिशा समझने में कोई समस्या आई? ‘म’ और ‘न’ के कटिंग रूल में कोई भ्रम है? अपने प्रश्न नीचे कमेंट बॉक्स में पूछें। आपके प्रत्येक संशय का समाधान करना मेरा उत्तरदायित्व है। अभ्यास जारी रखें, क्योंकि निरंतरता ही सफलता का एकमात्र सूत्र है।


