Hindi Shorthand Stenography Course in Hindi (Day 31 – 35)

Hindi Shorthand Stenography Course in Hindi (Day 31 - 35)

यह दिन केवल एक पाठ नहीं, बल्कि आपकी गति और शुद्धता के बीच के सेतु का काम करेगा। हम “Hindi Shorthand Stenography Course in Hindi (Day 30 – 35)” में प्रवेश कर चुके हैं। पिछले 30 दिनों में आपने जो भी बुनियादी नियम, स्वर, व्यंजन और शब्द चिह्न सीखे हैं, आज उन्हें आपकी मांसपेशियों की स्मृति (Muscle Memory) में स्थायी रूप से अंकित करने का समय है।

“स्टेनोग्राफी केवल लिखना नहीं, बल्कि लिखी हुई आउटलाइन को पढ़ना है।” आज का सत्र विशेष रूप से उन शब्द चिह्नों (Shabd Chinh) पर केंद्रित है जो संपादकीय, प्रशासनिक और कानूनी डिक्टेशन में बार-बार आते हैं। यदि आप आज के इन नियमों और आउटलाइन्स को आत्मसात कर लेते हैं, तो 80-100 शब्द प्रति मिनट (WPM) की गति प्राप्त करना आपके लिए केवल समय की बात रह जाएगी।

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35 Day 35 (अभ्यास 6) – वाक्यांश और विशेष शब्द-चिह्न मास्टरक्लास

1. रिवीज़न का दर्शन और अनुशासन के नियम

एक वरिष्ठ प्रशिक्षक के रूप में, मैं अक्सर छात्रों को एक बड़ी गलती करते देखता हूँ, अधूरी जानकारी के आधार पर स्वयं के शॉर्टकट बनाना। इस स्तर पर आपकी रचनात्मकता आपकी प्रगति की सबसे बड़ी बाधा बन सकती है। स्टेनोग्राफी एक विज्ञान है जिसके अपने निश्चित नियम हैं।

अगले 10-12 रिवीज़न क्लासेस का उद्देश्य आपके आधार (Foundation) को फौलादी बनाना है। जब तक आपकी नींव मजबूत नहीं होगी, तब तक आप उन्नत वाक्यांशों (Phrases) का बोझ नहीं उठा पाएंगे।

अभ्यास के अनिवार्य अनुशासन (Rules to Follow)

  1. नवाचार से बचें (No Self-Innovation): अभी आप सीखने की अवस्था में हैं। शब्दों को अपनी मर्जी से छोटा करने या अनावश्यक रूप से जोड़ने का प्रयास कतई न करें। यह कार्य हम कोर्स के उत्तरार्ध में करेंगे।
  2. बुनियादी नियमों की सर्वोच्चता: जो शब्द चिह्न और नियम आपको पढ़ाए गए हैं, उन्हीं का अक्षरशः पालन करें। यदि नियम कहता है कि ‘स’ का वृत्त बाईं ओर बनेगा, तो उसे बाईं ओर ही बनाएं।
  3. आउटलाइन की स्पष्टता (Clarity): गति के पीछे भागने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपकी आउटलाइन ‘साफ’ है। एक गंदी आउटलाइन परीक्षा भवन में आपके पसीने छुड़ा सकती है।
  4. अनुकरण और दोहराव: इन रिवीज़न क्लासेस का लक्ष्य यह है कि आपको शब्द देखते ही उसे सोचने की जरूरत न पड़े; आपका हाथ अपने आप क्रियान्वित हो जाए।

2. बहुवचन और विशिष्ट मात्राओं के उन्नत नियम

लेक्चर 31 में बहुवचन बनाने की जिस तकनीक पर चर्चा की गई है, वह हिंदी स्टेनोग्राफी की जान है। जब हम तेजी से डिक्टेशन लिखते हैं, तो हर मात्रा को अलग से लगाने का समय नहीं होता।

“ओ” (O) ध्वनि का जादुई बिंदु (The Plural Marker)

हिंदी में ‘नियमों’, ‘समस्याओं’, ‘कार्यों’ जैसे शब्द बहुवचन के रूप में आते हैं। इसके लिए पूरी मात्रा लिखने के बजाय शब्द की आउटलाइन के ठीक अंत में या उसके पास एक छोटा बिंदु (Bindi) लगाया जाना चाहिए।

  • हस्त संचालन (Hand Movement): जैसे ही आप शब्द की अंतिम रेखा (Stroke) समाप्त करें, बिना हाथ को ज्यादा ऊपर उठाए, कलम को हल्का सा दबाकर एक बिंदु अंकित करें।
  • सावधानी: यह बिंदु शब्द से न तो बहुत दूर होना चाहिए और न ही शब्द के अंदर। यदि यह बहुत दूर हुआ, तो इसे किसी अन्य शब्द का ‘शब्द चिह्न’ समझा जा सकता है।

‘न’ को काटकर ‘म’ पढ़ने का नियम (The Cut Rule)

प्रवाह (Flow) बनाए रखने के लिए यह एक क्रांतिकारी नियम है।

  • उदाहरण (समस्या): ‘स’ का वृत्त बनाकर जब हम ‘न’ की रेखा खींचते हैं और उसे बीच से एक सूक्ष्म कट देते हैं, तो वह ‘म’ में परिवर्तित हो जाता है। इसके बाद ‘स’ और ‘य’ को जोड़कर ‘समस्या’ की एक अत्यंत तीव्र और सुंदर आउटलाइन तैयार होती है।
  • क्यों? क्योंकि ‘म’ की तुलना में ‘न’ को काटकर बनाना कई बार हाथ के नैसर्गिक झुकाव (Natural Incline) के अनुकूल होता है।

3. महत्वपूर्ण शब्दों की आउटलाइन: सूक्ष्म विश्लेषण और भौतिक तकनीक

नीचे दी गई तालिका में उन शब्दों का विस्तृत विवरण है जो आज के लेक्चर का मुख्य आधार हैं। यहाँ हम केवल शब्द नहीं, बल्कि उन्हें बनाने के पीछे के ‘भौतिक विज्ञान’ को समझेंगे।

शब्द (Word)आउटलाइन की भौतिक विशेषतानिर्माण का नियम और ‘क्यों’ (The Philosophy)
इस / देश / लोगरेखा (Line) के सापेक्ष स्थितिइन्हें ‘लाइन से ऊपर’ या ‘लाइन पर’ लिखने का अभ्यास करें। ‘देश’ लिखते समय ‘द’ और ‘श’ का चाप एक निश्चित कोण पर होना चाहिए ताकि वह ‘दोष’ न पढ़ा जाए।
समर्थ / असमर्थ‘अ’ उपसर्ग का डैश‘समर्थ’ में स-म-र-थ का प्रवाह है। ‘असमर्थ’ के लिए शब्द के ठीक पहले एक बहुत छोटा डैश (Hook) निकाला जाता है। हाथ को पीछे ले जाकर फिर आगे बढ़ाना पड़ता है।
ढूंढनाकटाव और अनुनासिकता‘ढ’ को शुरू में काटें। ‘ढ’ की भारी आवाज़ के लिए पेंसिल पर थोड़ा दबाव डालें। ‘अं’ की बिंदी के लिए अंत में एक छोटा ‘हुक’ या ‘आँख’ जैसी आकृति बनाएं ताकि पढ़ते समय भ्रम न हो।
परिवर्तननिर्बाध व्यंजन प्रवाह‘प-र-व-र-त-न’। इसमें एक भी स्वर लगाने की आवश्यकता नहीं है। पेंसिल को कागज से उठाए बिना इसे एक लहर की तरह बनाएं। यह शब्द बार-बार आता है, इसे रट लें।
असमानताउपसर्ग का संयोजन‘समानता’ की मूल आकृति में ‘अ’ को प्रारंभ में जोड़ें। ‘स’ का वृत्त और ‘म’ की रेखा के बीच का कोण 180 डिग्री जैसा सीधा होना चाहिए ताकि गति बाधित न हो।
अस्थिरता‘स्त’ लूप और ‘ता’इसमें ‘स्त’ का बड़ा चाप (Loop) प्रयोग होता है। चाप को आधा रेखा तक रखें और ‘ता’ के लिए रेखा को ऊपर की ओर ले जाएं। ‘अ’ का डैश शुरू में स्पष्ट होना चाहिए।
अनैतिकता‘क’ का विच्छेदन (Cutting)‘क’ को साथ जोड़ने से आकृति “गंदी” (Messy) हो जाती है। अतः ‘न-त’ लिखकर उसे ‘क’ से काट देना सबसे साफ तरीका है।
महंगाई‘ह’ का बड़ा वृत्त‘म’ के बाद ‘ह’ का बड़ा वृत्त बनाएं, फिर ‘ग’ और अंत में ‘आई’ की मात्रा के लिए एक छोटा सा टिक (Tick) लगाएं। यह टिक ‘ई’ की स्पष्ट पहचान है।

4. नैतिक, सामाजिक और कानूनी शब्दावली का गहन अध्ययन

एक स्टेनोग्राफर के लिए नैतिक और सामाजिक विषयों पर पकड़ बनाना अनिवार्य है, क्योंकि संपादकीय डिक्टेशन इन्हीं के इर्द-गिर्द घूमते हैं।

  • अनैतिकता (Naitikta): इसकी ज्यामिति (Geometry) को समझें। जब आप ‘न-त’ लिखकर उसे बीच से ‘क’ द्वारा काटते हैं, तो यह आपकी आंखों के लिए एक ‘विजुअल एंकर’ बन जाता है। इसे साथ जोड़ने पर हाथ का फ्लो बिगड़ जाता है। इस कटी हुई आउटलाइन को “स्थायी” (Permanent) मान लें।
  • न्याय (Nyay): ‘न’ और ‘य’ के दोहरे प्रयोग वाली यह आउटलाइन सरल है, लेकिन इसे बहुत छोटा न बनाएं, अन्यथा यह ‘नय’ पढ़ा जा सकता है।
  • मूल्य निधि (Mulya Nidhi): इसमें ‘ल’ का प्रयोग नीचे से ऊपर की ओर करें। ‘निधि’ के लिए ‘न’ और ‘ध’ को सटाकर लिखें।

छात्रों के लिए सलाह: ये शब्द आपकी ‘व्यावसायिक पूँजी’ हैं। इन्हें लिखते समय महसूस करें कि आप समाज के गंभीर विषयों को कागज़ पर उतार रहे हैं।

5. राष्ट्रीय और प्रशासनिक शब्दावली: संयुक्त आकृतियाँ

प्रशासनिक डिक्टेशन में शब्दों का संयोजन (Compounding) बहुत महत्वपूर्ण होता है।

  • राष्ट्रभाषा (Rashtrabhasha): यह ‘राष्ट्र’ और ‘भाषा’ का मेल है। ‘राष्ट्र’ के लिए ‘र-ष-ट्र’ की चाप और ‘भाषा’ के लिए ‘भ-ष’ का मेल करें। शुरुआत में आपको ये शब्द भारी लग सकते हैं, लेकिन अभ्यास के साथ ये आपकी उंगलियों के बीच फिसलने लगेंगे।
  • स्वतंत्रता और सरकार: ये शब्द नहीं, बल्कि ‘स्तंभ’ हैं। ‘सरकार’ के लिए ‘स-र-क-र’ की आकृति को इतना छोटा और सटीक बनाएं कि उसे देखते ही ‘सरकार’ शब्द मस्तिष्क में गूँज उठे।

स्टेनोग्राफी के इस तकनीकी विकास के बारे में और अधिक जानने के लिए आप आशुलिपि (Shorthand) के ऐतिहासिक संदर्भ को देख सकते हैं।

6. “व्यक्ति” और “कानून”: फिक्स्ड आउटलाइन्स का रट्टा

कुछ शब्द ऐसे होते हैं जो नियमों के मोहताज नहीं होते, वे अपनी पहचान खुद बनाते हैं। “इन्हें रट लो (Rote Learn)”

  • व्यक्ति (Vyakti): ‘व’ और ‘त’ के मेल से बनी यह संक्षिप्त आकृति किसी भी डिक्टेशन में दर्जनों बार आती है। इसे इतनी बार लिखें कि आपका अवचेतन मन इसे पहचान ले।
  • कानून और नियम: ‘नियम’ (Niyam) के लिए ‘न-म’ की आकृति श्रेष्ठ है। ‘कानून’ के लिए ‘क-न-न’ का प्रयोग करें। यहाँ रेखाओं की लंबाई का ध्यान रखना आवश्यक है; ‘न’ बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए।

एक कुशल स्टेनोग्राफर बनने के लिए केवल हाथ का तेज होना काफी नहीं है, आपकी टाइपिंग स्पीड भी बेजोड़ होनी चाहिए। अपनी गति जांचने के लिए हिंदी टाइपिंग पर नियमित अभ्यास करें।

7. अभ्यास की वैज्ञानिक विधि: 4-चरण प्रक्रिया (Mind-to-Hand Coordination)

वह केवल अभ्यास नहीं, बल्कि मस्तिष्क की री-प्रोग्रामिंग है। इसे 4 चरणों में विभाजित करें:

  1. प्रथम चरण (शुद्धता का चरण): अपनी पीडीएफ या नोटबुक को सामने रखें। बहुत धीरे-धीरे, एक-एक कोण (Angle) को देखते हुए आउटलाइन बनाएं। यहाँ गति शून्य होनी चाहिए, ध्यान केवल शुद्धता पर।
  2. द्वितीय चरण (प्रवाह का चरण): अब गति को थोड़ा बढ़ाएं। कोशिश करें कि कलम कागज पर ‘रेंगने’ के बजाय ‘दौड़ने’ लगे। आउटलाइन के बीच के जोड़ों (Joints) को चिकना (Smooth) बनाएं।
  3. तृतीय चरण (मानसिक समन्वय): अब स्रोत को हटा दें। शब्द को मन में बोलें और हाथ को उसे बनाने दें। यदि हाथ रुक रहा है, तो समझिये कि उस शब्द का ‘मानसिक चित्र’ अभी स्पष्ट नहीं है।
  4. चतुर्थ चरण (डिक्टेशन): किसी मित्र से कहें या स्वयं रिकॉर्डिंग करें। 30-50 WPM की शुरुआती गति से डिक्टेशन लें।

8. निष्कर्ष और आगामी लक्ष्य

डे 31 का यह रिवीज़न सत्र आपकी सफलता की आधारशिला है। याद रखें, स्टेनोग्राफी में कोई ‘शॉर्टकट’ नहीं होता, केवल ‘स्मार्ट अभ्यास’ होता है। आज आपने जो शब्द सीखे हैं, वे डिक्टेशन का लगभग 40% हिस्सा कवर करते हैं।

अगले कदम:

  • लिखने के बाद उसे कम से कम 5 बार जोर-जोर से पढ़ें। यदि आप पढ़ नहीं पा रहे हैं, तो आपने गलत लिखा है।
  • अपनी टाइपिंग और स्टेनोग्राफी से जुड़ी अन्य सामग्री के लिए typingmasterpro.com पर नियमित रूप से अपडेट्स चेक करते रहें।

9. मुख्य शब्दावली सूची (Key Vocabulary List – Summary)

त्वरित संदर्भ और गहन अभ्यास के लिए इन शब्दों को अपनी डायरी में नोट करें:

  • अवहेलना: ‘नियमों की अवहेलना’ वाक्यांश में प्रयुक्त। ‘व-ह-ल-न’ की संयुक्त आकृति।
  • अनुसरण: ‘न-स-र-न’ का प्रवाह। इसमें ‘स’ का वृत्त छोटा और स्पष्ट रखें।
  • परिस्थितियों: ‘प-र-स-थ-त’ की लंबी आउटलाइन बनाकर अंत में बहुवचन का बिंदु लगाएं।
  • सहायता: एक अत्यंत महत्वपूर्ण शब्द चिह्न। इसे लाइन से ऊपर रखें।
  • साधारण: ‘स-ध-र-न’। ‘ध’ को काटना न भूलें।
  • संकटपूर्ण: ‘स-न-क-ट’ और अंत में ‘प-र-ण’ का प्रत्यय।
  • असंतोष: ‘अ’ डैश के साथ ‘स-न-त-ष’ की आकृति।
  • कल्याण: ‘क-ल-य-ण’। ‘ल’ को ऊपर की ओर ले जाना बेहतर फ्लो देता है।
  • समाप्ति: ‘स-म-प-त’। ‘प’ को आधा करके ‘त’ जोड़ें।
  • परस्पर: ‘प-र-स-प-र’ की पुनरावृत्ति वाली आकृति।
  • निहायत: ‘न-ह-य-त’। ‘ह’ का वृत्त अंदर की ओर।
  • ईमानदार: ‘म-न-दर’ (M-N-Dar) की संयुक्त आउटलाइन के रूप में बनाएं। ‘दर’ के लिए रेखा को दोगुना करें।
  • व्यवहार: ‘व-व-ह-र’ का संक्षिप्त रूप। इसे एक झटके में बनाना सीखें।
  • वर्तमान: समय बोधक शब्द चिह्न। ‘व-र-त-म-न’।
  • निःसंदेह: इसे ‘न-स-स-न-द’ (N-S-S-N-D) के रूप में निर्मित करें ताकि दोहरे ‘स’ की ध्वनि स्पष्ट रहे।

हिंदी स्टेनोग्राफी कोर्स: (Day 32) – प्रशासनिक और शैक्षिक शब्दावली के लिए विशिष्ट आउटलाइन

आज का पाठ विशेष रूप से “प्रशासनिक और शैक्षिक शब्दावली” पर केंद्रित है। यदि आप एसएससी (SSC), विधानसभा, या उच्च न्यायालयों में रिपोर्टर या स्टेनोग्राफर बनने का लक्ष्य रखते हैं, तो यह शब्दावली आपके लिए संजीवनी के समान है। डिक्टेशन के दौरान अक्सर विद्यार्थी इन्हीं शब्दों में अटक जाते हैं क्योंकि इनकी लंबाई अधिक होती है। आज हम सीखेंगे कि कैसे जटिल शब्दों को छोटे, प्रभावशाली और वैज्ञानिक आउटलाइन्स में बदला जाता है।

हमारी यात्रा का उद्देश्य केवल संकेत लिखना नहीं है, बल्कि 80 से 100 शब्द प्रति मिनट (WPM) की उस जादुई गति को प्राप्त करना है जहाँ आपकी पेंसिल और विचार एक साथ चलते हैं। यदि आप अपनी तैयारी को और अधिक धार देना चाहते हैं और अपनी टाइपिंग स्पीड को स्टेनोग्राफी के साथ तालमेल में लाना चाहते हैं, तो आप typingmasterpro.com के “Stenography” अनुभाग को नियमित रूप से देख सकते हैं, जहाँ आपको अभ्यास के लिए आधुनिक टूल्स मिलेंगे। चलिए, आज की इस तकनीकी कक्षा का आरंभ करते हैं।

1. हिंदी भाषा और सरकारी नौकरियों का अंतर्संबंध (The Context of Hindi in Government Jobs)

भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं रही, बल्कि यह अधिकारों और अवसरों का प्रतीक भी रही है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद, हमारे संविधान निर्माताओं और नीति-निर्धारकों ने एक दूरगामी कल्पना की थी। उनका उद्देश्य था कि औपनिवेशिक विरासत वाली अंग्रेजी भाषा के स्थान पर हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं (Regional Languages) को सरकारी कामकाज का मुख्य आधार बनाया जाए।

व्याख्यान के गहन विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि यह स्वप्न पूर्णतः साकार होने में अनेक बाधाओं से टकराया। यद्यपि सिद्धांततः हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिला, लेकिन व्यावहारिक धरातल पर अंग्रेजी का वर्चस्व बना रहा। इसका सबसे बड़ा खामियाजा हिंदी माध्यम के उन होनहार छात्रों को भुगतना पड़ा जो ग्रामीण और कस्बाई परिवेश से आते थे। सरकारी नौकरियों में भर्ती की प्रक्रियाओं और परीक्षाओं का स्वरूप लंबे समय तक अंग्रेजी केंद्रित रहा, जिससे हिंदी माध्यम के नवयुवकों के लिए एक “कांच की छत” (Glass Ceiling) निर्मित हो गई।

प्रशासनिक स्तर पर एक ऐसी मानसिकता (Mindset) विकसित हो गई जहाँ अंग्रेजी को ‘अनिवार्य’ और हिंदी को ‘द्वितीयक’ माना जाने लगा। उच्च पदों की भर्ती में तो यह भेदभाव स्पष्ट था ही, परंतु जैसा कि हमारे स्रोत बताते हैं, छोटे स्तर के पदों (Lower-level posts) के लिए भी हिंदी माध्यम के छात्रों को संघर्ष करना पड़ा। आज जब हम स्टेनोग्राफी सीख रहे हैं, तो हमें यह समझना होगा कि हम केवल एक कौशल नहीं सीख रहे, बल्कि हम उस व्यवस्था का हिस्सा बनने की तैयारी कर रहे हैं जहाँ हम अपनी भाषा के माध्यम से शासन और जनता के बीच की दूरी को कम करेंगे।

Key Insight: प्रशासनिक आउटलाइन की शक्ति एक पेशेवर स्टेनोग्राफर के लिए प्रशासनिक शब्दों की आउटलाइन को ‘कंठस्थ’ करना इसलिए अनिवार्य है क्योंकि ये शब्द डिक्टेशन का लगभग 40% हिस्सा कवर करते हैं। जब आप ‘प्रशासनिक’, ‘विश्वविद्यालय’, या ‘कार्यन्वयन’ जैसे शब्दों को एक झटके में लिखना सीख जाते हैं, तो आप न केवल समय बचाते हैं, बल्कि कठिन से कठिन डिक्टेशन को भी आसानी से ट्रांसक्राइब कर पाते हैं। यह आपकी Authoritativeness और Trustworthiness (EEAT) को कार्यस्थल पर स्थापित करता है।

2. महत्वपूर्ण शब्द और उनके शब्द-चिह्न (Critical Vocabulary and Outlines – Table)

स्टेनोग्राफी में ज्यामिति (Geometry) और पेंसिल के प्रवाह का बहुत महत्व है। नीचे दी गई तालिका डे 32 की सबसे महत्वपूर्ण शब्दावली को कवर करती है। इन आउटलाइनों को “स्थायी आउटलाइन” (Permanent Outlines) मानकर अभ्यास करें।

Day 32: Word-to-Outline Guide

शब्द (Word)व्याख्या/नियम (Explanation/Rule)अभ्यास निर्देश (Practice Instruction)
देश‘द’ व्यंजन को रेखा पर (On the line) लिखें और अंत में ‘श’ का वृत्त (Circle) घुमावदार तरीके से जोड़ें।इसे कम से कम 20 बार लिखें। यह शब्द लगभग हर प्रशासनिक अनुच्छेद में आता है।
स्वतंत्र‘स्व’ का बड़ा चाप (Large Hook) शुरू में लगाएं और ‘त्र’ के चाप के साथ समाप्त करें। रेखा के ऊपर स्थान दें।‘स्व’ के घेरे को पर्याप्त बड़ा रखें ताकि यह ‘स’ से अलग दिखे।
कल्पना‘क’ और ‘ल’ के मेल के साथ ‘प’ को नीचे लाएं और ‘न’ का आंकड़ा (Hook) अंत में लगाएं।‘कल्प’ लिखकर पेंसिल उठाए बिना ‘ना’ का स्वर जोड़ें।
स्वाधीन‘स्व’ का आंकड़ा सामान्य से थोड़ा मोटा (Thick) बनेगा। इसमें ‘ध’ और ‘न’ का मेल होगा।रेखा के ऊपर लिखें। मोटे हुक की प्रैक्टिस बार-बार करें।
भारत‘भ’ को गहरा (Dark) करें, ‘र’ को ऊपर ले जाएं और ‘त’ का आंकड़ा लगाएं।इसे ‘भरत’ की तुलना में थोड़ा ऊपर (Above the line) लिखें ताकि स्पष्ट पहचान हो सके।
शिक्षा‘श’ का वृत्त, ‘क’ व्यंजन और अंत में ‘क्षा’ के लिए विशिष्ट घुमावदार हुक।इसे छोटा और सुगठित बनाएं।
सरकारी‘स’ का वृत्त, ‘र’ ऊपर की ओर, ‘क’ और पुनः ‘र’ के साथ ‘ई’ की मात्रा का हुक।एक ही प्रवाह में लिखें। पेंसिल बीच में न उठाएं।
कामकाज‘काम’ लिखकर ‘का’ और ‘ज’ का मेल करें। अक्सर ‘क’ लिखकर ‘ज’ से काट दिया जाता है।इसे संक्षेप में लिखना सीखें, क्योंकि यह एक संयुक्त शब्द है।
भाषा‘भ’ (गहरा और कटा हुआ) और ‘ष’ का वृत्त।बहुवचन के नियमों के लिए नीचे अनुभाग 4 देखें।
विश्वविद्यालय(रट लें) ‘व’ लिखकर पुनः ‘व’ जोड़ें और अंत में ‘लय’ (L) का प्रयोग करें।यह एक विशिष्ट संकेत है। ‘व’ से ‘व’ और ‘लय’ को जोड़कर एक आकृति बनाएं।
अनुसरण‘न’ व्यंजन, ‘स’ का वृत्त, ‘र’ ऊपर और ‘ण’ का आंकड़ा।शुरुआत में ‘अ’ का स्वर दिखाने के लिए एक छोटा डैश दें।
परीक्षा‘प’ व्यंजन को छोटा (Halving principle) करें और ‘क्षा’ का विशिष्ट चाप जोड़ें।इसे रेखा काटते हुए (Through the line) लिखें क्योंकि इसमें ‘ई’ का स्वर है।
क्षेत्रीय भाषाएं‘क्ष’ में ‘त्र’ का बड़ा चाप और ‘य’ का हुक लगाकर ‘भाषाएं’ जोड़ें।‘य’ के हुक को स्पष्ट रखें ताकि ‘क्षेत्र’ और ‘क्षेत्रीय’ में अंतर रहे।
समुचित‘स’ वृत्त, ‘म’ व्यंजन, ‘च’ और ‘त’ का आंकड़ा।रेखा पर संतुलित रूप में लिखें।
माध्यम‘म’ को गहरा (ध के लिए) करें और अंत में ‘म’ जोड़ें। ‘य’ का लोप किया जा सकता है।इसे ‘म’ और ‘ध’ के संयुक्त रूप में पहचानें।
नौकरियां‘न’, ‘क’, ‘र’ और अंत में बहुवचन की विशिष्ट बिंदी।‘र’ को नीचे की ओर ले जाना बेहतर प्रवाह देता है।
संख्या‘स’ वृत्त, ‘ख’ और ‘य’ का हुक। ‘न’ का लोप करें।‘स’ और ‘ख’ को मिलाकर ‘य’ का हुक बाहर की तरफ निकालें।
प्रशासनिक‘प-र’ हुक, ‘स’ वृत्त, ‘न’ का आंकड़ा और ‘क’ व्यंजन।इसे स्पष्ट लिखें। यह उच्च गति डिक्टेशन का पसंदीदा शब्द है।
मानसिकता‘मानसिक’ की आउटलाइन (म, न, स, क) में ‘ता’ का प्रत्यय जोड़ें।‘त’ को छोटा करके ‘ता’ का आभास दें।
व्यवस्था(रट लें) ‘व’ और ‘व’ का संयुक्त रूप और अंत में ‘स्था’ का चाप।यह भविष्य के लिए एक निश्चित आउटलाइन है, इसे रट लें।

3. बहुवचन और प्रत्यय लगाने के विशेष नियम (Rules for Plurals and Suffixes)

स्टेनोग्राफी में गति बढ़ाने का सबसे बड़ा रहस्य शब्दों को ‘छोटा’ करना है। बहुवचन बनाने के लिए यदि आप पूरे शब्द को फिर से लिखेंगे, तो आप गति खो देंगे। निम्नलिखित दो नियमों को अपने मस्तिष्क में अंकित कर लें:

क) बिंदी (Dot) का प्रयोग: नासिक्य बहुवचन

जब किसी शब्द के अंत में ‘ओं’ या ‘एं’ की ध्वनि आती है (जैसे: पदों, नौकरियों, विद्यालयों), तो आउटलाइन के अंत में एक छोटी बिंदी (Dot) लगाई जाती है। यह बिंदी आमतौर पर आउटलाइन के अंतिम हिस्से के पास नीचे की तरफ रखी जाती है।

  • उदाहरण: ‘पद’ लिखकर अंत में बिंदी लगाएं = पदों।

ख) तिरछा निशान (Slanting Mark): “ओ” की मात्रा

यह एक तकनीकी सूक्ष्मता है। यदि किसी शब्द के अंत में केवल “ओ” की ध्वनि पर बल है (जैसे: लोगों, भाषाओं), तो वहां बिंदी के बजाय एक छोटा तिरछा (Slanting) निशान लगाया जाता है। यह निशान पढ़ने में गति प्रदान करता है और पाठक को भ्रमित नहीं होने देता।

  • उदाहरण:
    • लोग vs लोगों: ‘लोग’ का अपना शब्द-चिह्न है। इसमें तिरछा निशान लगाने से यह ‘लोगों’ बन जाता है।
    • भाषा vs भाषाओं: ‘भाषा’ की आउटलाइन के अंत में ‘ओ-मार्क’ लगाने से यह ‘भाषाओं’ पढ़ा जाएगा।

4. वाक्यांश निर्माण और शब्दों को जोड़ना (Phrase Building and Joining Rules)

वाक्यांश निर्माण (Phraseography) वह कला है जहाँ आप पेंसिल उठाए बिना दो या तीन शब्दों को एक साथ लिखते हैं। इसके लिए “लोप” (Lop) तकनीक का प्रयोग किया जाता है।

  1. स्तर पर (Level-wise): स्टेनोग्राफी में ‘स्तर’ (St-R loop) के साथ ‘पर’ (P-R) का प्रयोग बहुत होता है। ‘स्तर’ लिखकर सीधे ‘प’ को नीचे की ओर खींच दें। पेंसिल उठाने की आवश्यकता नहीं है।
  2. केंद्र सरकार (Central Government): यहाँ ‘दर-तर’ का नियम लागू होता है। ‘क’ (K) व्यंजन की लंबाई को दोगुना (Double) करने से उसमें ‘द्र’ या ‘तर’ स्वतः जुड़ जाता है। इसमें ‘न’ के आंकड़े का लोप (Omission) कर दिया जाता है और सीधे ‘सरकार’ (S-R-K-R) जोड़ दिया जाता है। इसे “केंद्रीकरण” के सिद्धांत पर आधारित “केंद्र सरकार” की स्थायी आउटलाइन मान लें।
  3. जाएगा: ‘ज’ व्यंजन में ‘य’ का हुक लगाएं। चूँकि इसमें ‘ग’ को जोड़ना कठिन होता है, इसलिए नियम के अनुसार पेंसिल उठाकर ‘ग’ को पास लिख दिया जाता है या काट दिया जाता है। यह “पेंसिल लिफ्ट” तकनीक का सटीक उदाहरण है।
  4. राष्ट्रीय हित (National Interest): ‘राष्ट्र’ (R-S-T-R) की आउटलाइन बनाएं। ‘य’ का लोप करें और पास में ‘हित’ (H-T) लिख दें। यदि प्रवाह बन रहा हो, तो ‘ह’ को छोटा करके जोड़ भी सकते हैं।

5. प्रशासनिक कार्यों में हिंदी का महत्व (Importance of Hindi in Administration)

प्रशासनिक दक्षता केवल फाइलों के निपटारे में नहीं, बल्कि उन फाइलों की भाषा में भी निहित होती है। जैसा कि डिक्टेशन के संदर्भ में चर्चा की गई है, सरकारी आदेश (Government Orders) जारी करना एक प्रक्रिया है, लेकिन उन्हें वास्तविक स्वरूप (Actual Form) में लागू करना एक चुनौती।

प्रशासकों की मानसिकता (Mindset) अक्सर अंग्रेजी के प्रति झुकी रहती है, जिससे हिंदी के आदेश केवल अनुवाद बनकर रह जाते हैं। एक कुशल स्टेनोग्राफर को इन शब्दों के पीछे के भाव को समझना चाहिए। उदाहरण के लिए, जब आप ‘कार्यान्वयन’ या ‘प्रावधान’ लिखते हैं, तो आपको पता होना चाहिए कि ये शब्द शासन की मंशा को दर्शाते हैं। हिंदी के संवैधानिक विकास और इसकी वर्तमान स्थिति के बारे में विस्तृत शोध के लिए आप हिन्दी विकिपीडिया का संदर्भ ले सकते हैं।

6. अभ्यास की वैज्ञानिक विधि (The Scientific Method of Practice)

एक “स्वर्ण नियम” (Golden Rule), इसे अपनी डायरी में नोट कर लें:

  1. धीमी गति और शुद्धता (Slow & Steady): पहले चरण में गति की चिंता न करें। प्रत्येक आउटलाइन की ज्यामिति देखें। क्या ‘प’ सही कोण पर है? क्या ‘स’ का वृत्त छोटा है? पेंसिल के दबाव और कोण को समझें।
  2. पुनरावृत्ति का नियम (Rule of 5-6): प्रत्येक कठिन शब्द (जैसे: विश्वविद्यालय, प्रशासनिक) को कम से कम 5 से 6 बार लिखें। हर बार गति को थोड़ा बढ़ाएं।
  3. श्रुतलेख (Dictation): जब आप शब्दों को पहचानने लगें, तो अपने किसी साथी या परिवार के सदस्य से कहें कि वह 40-50 शब्द प्रति मिनट की गति से बोले। बिना रुके लिखने का प्रयास करें।
  4. आत्म-पठन (Self-Reading): यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है। लिखने के बाद, अपनी ही आउटलाइन को पढ़ने का प्रयास करें। यदि आप अपनी लिखी लिपि नहीं पढ़ पा रहे, तो आपकी आउटलाइन में स्पष्टता की कमी है। इसे सुधारें।

Day 33 (LEC 33) – प्रशासनिक और सरकारी शब्दावली के लिए उन्नत आउटलाइन

स्टेनोग्राफी केवल गति का खेल नहीं है, बल्कि यह शुद्धता और शब्दों को पहचानने की तीव्र बुद्धि का मिश्रण है। डे 33 का यह अध्याय आपके करियर के लिए मील का पत्थर साबित होने वाला है क्योंकि आज हम उन शब्दों की आउटलाइन बनाना सीखेंगे जो एसएससी (SSC), हाई कोर्ट, विधानसभा और अन्य राज्य स्तरीय प्रशासनिक सेवाओं की परीक्षाओं में रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं।

एक वरिष्ठ प्रशिक्षक के नाते मेरा अनुभव कहता है कि छात्र अक्सर सामान्य शब्दों में तो गति प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन जैसे ही ‘संविधान’, ‘अधिनियम’ या ‘प्रशासनिक व्यवस्था’ जैसे शब्द आते हैं, उनकी गति अवरुद्ध हो जाती है। आज की कक्षा का उद्देश्य आपकी इसी बाधा को दूर करना है। आज हम न केवल शब्दों की आउटलाइन बनाना सीखेंगे, बल्कि उनके पीछे छिपे उस तर्क (Logic) को भी समझेंगे जो आपको हजारों शब्दों को रटने के बजाय उन्हें स्वतः बनाने की शक्ति प्रदान करेगा। आज के अभ्यास ‘अभ्यास-4’ में हम न्यायिक, संवैधानिक और सामाजिक विषयों के शब्दों का गहरा विश्लेषण करेंगे।

1. महत्वपूर्ण शब्दावली और उनकी आउटलाइन का विस्तृत विश्लेषण

प्रशासनिक शब्दावली अक्सर जटिल होती है, लेकिन स्टेनोग्राफी के नियमों का सही प्रयोग इन्हें अत्यंत सरल बना देता है। नीचे दी गई तालिका में प्रत्येक शब्द के निर्माण की वैज्ञानिक विधि को समझाया गया है। छात्रों को निर्देश है कि वे आउटलाइन बनाते समय अपनी पेंसिल के दबाव और लाइन की स्थिति (Position) पर विशेष ध्यान दें।

प्रशासनिक एवं संवैधानिक शब्दावली विश्लेषण तालिका

शब्दआउटलाइन निर्माण की विधि (Technical Logic)स्थिति एवं विशेष निर्देश (Placement & Tips)
अखिलइसमें पहले ‘अ’ का स्वर (Vowel Dash), फिर ‘ख’ रेखा और अंत में ‘ल’ का आंकड़ा (Hook) लगाया जाता है।‘अ’ का स्वर होने के कारण इसे लाइन के ऊपर (Above the line) लिखें। ‘ख’ को बीच से काटना न भूलें।
भारतीय‘भारत’ की मानक आउटलाइन (भ+र+त) में अंत में एक छोटा ‘य’ का आंकड़ा जोड़ा जाता है।‘भारत’ और ‘भारतीय’ में अंतर स्पष्ट करने के लिए ‘य’ का प्रयोग अनिवार्य है। इसे लाइन पर (On the line) लिखें।
नौकरियों‘न’ रेखा, ‘क’ रेखा, ‘र’ अधोमुखी (Downward) और अंत में ‘ओ’ का स्वर तथा बहुवचन की बिंदी।बहुवचन के लिए अंत में एक स्पष्ट बिंदी (Dot) लगाएं, अन्यथा इसे ‘नौकरी’ पढ़ा जाएगा।
द्विभाषी‘द’ रेखा (दोहराव), ‘भ’ रेखा और ‘स’ का वृत्त (Circle) बनाकर ‘ई’ स्वर को बाहर की तरफ निकालें।‘भ’ को काटना सुनिश्चित करें और ‘ई’ का स्वर अंत में हुक की तरह बाहर निकालें।
व्यवस्था‘व’ रेखा, पुनः ‘व’ रेखा, फिर ‘स’ का वृत्त और ‘थ’ रेखा का संयोजन।‘वव’ के मेल को छोटा रखें और ‘सथ’ के चाप (Loop) को स्पष्ट बनाएं। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण शब्द है।
संविधान‘स’ का आंकड़ा (Circle) बनाकर उसके ठीक केंद्र में एक स्पष्ट बिंदी लगाई जाती है।यह एक विशिष्ट प्रतीक (Symbol) है। इसे ‘स-न-व-ध-न’ लिखने के बजाय प्रतीक से लिखें ताकि समय बचे।
परीक्षा‘प’ में ‘र’ का आंकड़ा, फिर ‘क’ और ‘ष’ (स का वृत्त) का प्रयोग।‘प’ रेखा को लाइन के ऊपर रखें। बहुवचन (परीक्षाओं) के लिए अंत में ‘ओ’ का संकेत लगाएं।
अनिवार्य‘अ’ का स्वर, ‘न’ रेखा, ‘व’ रेखा, ‘र’ रेखा और अंत में ‘य’ का आंकड़ा।‘न’ और ‘व’ के जुड़ाव को सुचारू (Flow) रखें। इसे लाइन के ऊपर से शुरू करें।
विकल्प‘व’ की प्रारंभिक रेखा, ‘क’ रेखा, ‘ल’ का आंकड़ा और अंत में ‘प’ रेखा।‘ल’ का आंकड़ा ‘क’ के साथ आंतरिक रूप से जुड़ेगा। इसे लाइन पर (On the line) लिखें।
माध्यम‘म’ रेखा, ‘ध’ रेखा और ‘य’ का आंकड़ा।इसे ‘मध्य’ शब्द के समान ही बनाया जाता है। ‘ध’ को काटना अनिवार्य है।
प्रदान‘प’ में ‘र’ का आंकड़ा (प्र), फिर ‘द’ रेखा और अंत में ‘न’ का आंकड़ा।‘प्र’ और ‘दान’ को बिना पेंसिल उठाए एक ही प्रवाह में लिखें।
संसद‘स’ का वृत्त, ‘न’ रेखा, फिर ‘स’ का वृत्त और अंत में ‘द’ रेखा।दोनों ‘स’ के वृत्तों का आकार समान रखें ताकि यह ‘संसाधन’ न बन जाए।
उम्मीदवार‘म’ रेखा, ‘द’ रेखा, ‘ब’ रेखा और ‘र’ का आंकड़ा।‘म’ को गहरा (Dark) करें ताकि ‘उ’ का आभास हो। ‘ब’ और ‘र’ का मेल स्पष्ट होना चाहिए।
संकल्पइसके दो तरीके हैं: 1. ‘स-न-क’ के साथ ‘ल’ का बड़ा लूप और ‘प’। 2. ‘स’ वृत्त, ‘क’ रेखा, ‘ल’ आंकड़ा और ‘प’।प्रशिक्षक की सलाह है कि भविष्य की गति के लिए ‘ल’ के आंकड़े वाला दूसरा विकल्प ज्यादा प्रभावी है।
बातचीत‘बात’ की मानक आउटलाइन बनाकर उसे ‘च’ रेखा से काट दिया जाता है।काटने की क्रिया (Cutting method) स्टेनोग्राफी में ‘चित’ या ‘चीत’ को दर्शाती है।

2. वाक्यांशों (Phrases) को जोड़ने की कला: गति का मुख्य आधार

स्टेनोग्राफी में 80 से 120 शब्द प्रति मिनट (WPM) की गति प्राप्त करने का रहस्य ‘वाक्यांशों’ (Phrasing) में छिपा है। जब हम दो या तीन शब्दों को बिना पेंसिल उठाए एक साथ लिखते हैं, तो न केवल समय की बचत होती है, बल्कि लिखने का प्रवाह (Flow) भी बना रहता है।

क. सरकारी संस्थाओं का संयोजन

  • राज्य सरकार: ‘राज’ (र+ज) लिखकर उसके तुरंत बाद ‘सरकार’ (स-र-क-र) जोड़ दें। पेंसिल को कागज से न उठाएं।
  • राज्य सरकारों: ‘राज्य सरकार’ की आउटलाइन बनाकर उसके अंत में एक ‘मोटा सा’ बिंदी (Dark Dot) मारें। यह बिंदी इसे बहुवचन बना देगी।
  • केंद्र सरकार: ‘केंद्र’ (क+न+द्र) की आउटलाइन को ‘सरकार’ से जोड़ें। जैसा कि हमने पिछली कक्षाओं में सीखा है, ‘केंद्र’ के लिए ‘न’ को दोगुना (Doubling Principle) भी किया जा सकता है।

ख. क्रियाओं और सहायक क्रियाओं का मेल

  • किए जा सकते हैं: यह चार शब्दों का समूह है। ‘किए’ के लिए छोटा संकेत, ‘जा’ के लिए ‘ज’ रेखा, ‘सकते’ के लिए ‘स’ वृत्त के साथ ‘क’ और ‘हैं’ के लिए अंत में छोटा टिक। हालांकि, शुरुआत में आप इन्हें अलग-अलग लिख सकते हैं, लेकिन अभ्यास के बाद इन्हें जोड़ना ही बुद्धिमानी है।
  • दिए जा चुके हैं: ‘दिए’ (लाइन काट कर), ‘जा’, ‘चुके’ (च रेखा से काटना या जोड़ना) और ‘हैं’। ‘चुके’ के लिए शब्द के नीचे ‘च’ बनाना एक प्रचलित नियम है।
  • होना चाहिए: ‘होना’ के लिए ‘ह’ का वृत्त और ‘न’ रेखा, उसके अंत में ‘चाहिए’ का बड़ा चाप (Hook) लगाएं। ध्यान रहे ‘चाहिए’ का चाप हमेशा अंत में बड़ा और स्पष्ट होता है।

ग. महत्वपूर्ण प्रशासनिक वाक्यांश

  • अनिवार्य होना चाहिए: ‘अनिवार्य’ की आउटलाइन के साथ ही ‘होना चाहिए’ का चाप जोड़ दें।
  • प्रदान किए जा सकते हैं: ‘प्रदान’ लिखकर ‘किए जा सकते हैं’ को उसके समीप या जोड़कर लिखें।

3. विशेष व्याकरणिक नियम और प्रतीकों (Symbols) का उपयोग

एक वरिष्ठ स्टेनोग्राफी प्रशिक्षक के रूप में, मैं हमेशा इस बात पर जोर देता हूँ कि स्टेनोग्राफी केवल ‘सुनना और लिखना’ नहीं है, बल्कि यह ‘भाषा की शुद्धता’ का परीक्षण है।

बहुवचन निर्माण का अचूक नियम

सोर्स कॉन्टेक्स्ट के अनुसार, किसी भी शब्द को बहुवचन बनाने के लिए आउटलाइन के अंत में एक बिंदी (Dot) लगाना अनिवार्य है।

  • उदाहरण के लिए, यदि आप ‘प्रश्न’ (प-र-श-न) लिखते हैं और अंत में बिंदी नहीं लगाते, तो वह ‘प्रश्न’ पढ़ा जाएगा।
  • लेकिन यदि आप अंत में एक बिंदु लगा देते हैं, तो वह स्वतः ‘प्रश्नों’ पढ़ा जाएगा।
  • इसी प्रकार ‘भाषा’ से ‘भाषाओं’ बनाने के लिए अंत में बिंदी का प्रयोग करें। परीक्षा में ‘प्रश्न’ की जगह ‘प्रश्नों’ लिख देना एक बड़ी गलती मानी जाती है और इसके अंक कटते हैं।

‘संविधान’ और उससे जुड़ी शब्दावली

‘संविधान’ शब्द सरकारी डिक्टेशन में बार-बार आता है। इसके लिए एक विशिष्ट प्रतीक (Symbol) रट लें: ‘स’ के आंकड़े वाले एक मध्यम आकार के वृत्त (Circle) के बीच में एक मोटा बिंदु रखें।

  • संवैधानिक: संविधान के प्रतीक के अंत में ‘क’ रेखा जोड़ दें।
  • संविधान सभा: संविधान के प्रतीक के पास ‘स’ और ‘भ’ (सभा) बना दें। यह तकनीक आपकी गति को अचानक 10-15 शब्द प्रति मिनट बढ़ा देगी।

विराम और वर्तनी (Punctuation & Orthography)

स्टेनोग्राफी की परीक्षाओं (जैसे SSC Stenographer Grade C & D) में विराम चिह्नों की गलतियों को ‘Full Mistake’ या ‘Half Mistake’ के रूप में गिना जाता है।

  1. पूर्ण विराम (Full Stop): डिक्टेशन के दौरान जब वक्ता रुकता है, तो वहाँ एक छोटा क्रॉस (x) लगाएं।
  2. कोमा (Comma): वाक्य के बीच के ठहराव को समझने के लिए कोमा की स्थिति का ज्ञान होना चाहिए।
  3. वर्तनी की शुद्धता: ‘मनुष्य’ जैसे शब्दों में ‘ष’ (मूर्धन्य ष) का प्रयोग होता है। टाइपिंग (Transcription) के समय यदि आप इसे ‘मनुस्य’ लिखेंगे, तो आउटलाइन सही होने के बावजूद आप फेल हो सकते हैं। इसलिए वर्तनी (Vartani) की एक पुस्तक से कठिन शब्दों का अभ्यास करें।

4. भाषा की शक्ति और विकास (दार्शनिक और तकनीकी पहलू)

भाषा केवल संचार का साधन नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के अस्तित्व की अभिव्यक्ति है। स्टेनोग्राफी सीखते समय आपको अपनी भाषा के प्रति सम्मान और उसकी गहराई का बोध होना चाहिए।

  • संवाद का माध्यम: भाषा मनुष्य की आपसी बातचीत का सबसे शक्तिशाली और जीवंत माध्यम है। यह हमारे विचारों को मूर्त रूप देती है। एक स्टेनोग्राफर के रूप में, आप केवल ध्वनियों को नहीं लिख रहे, बल्कि आप समाज के विचारों और निर्णयों को लिपिबद्ध कर रहे हैं।
  • स्वतंत्रता संग्राम और भाषा: हमारे इतिहास में भाषा ने एकता के सूत्रधार की भूमिका निभाई है। ‘स्वतंत्रता संग्राम’ के दौरान हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं ने जन-जागरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज भी प्रशासनिक कार्यों में अपनी भाषा का प्रयोग करना हमारे संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करना है।
  • विचार प्रक्रिया और अभिव्यक्ति: भाषा हमारी विचार प्रक्रिया को प्रभावित करती है। जिस समाज की भाषा जितनी समृद्ध और स्पष्ट होती है, उस समाज की उन्नति उतनी ही तीव्र होती है। Hindi Language का इतिहास अत्यंत गौरवशाली है और इसे देवनागरी लिपि में लिखना एक कला है।
  • राष्ट्रीय भाषाओं का सम्मान: संविधान के अनुसार हिंदी हमारी राजभाषा है। स्टेनोग्राफी में ‘राष्ट्रीय भाषाओं’ के प्रयोग से लोगों में संतोष व्याप्त होता है और सरकारी कामकाज आम जनता तक पहुँच पाता है।

5. अभ्यास रणनीति और डिक्टेशन टिप्स

अब समय है कि आप अपनी कलम उठाएं और आज के सीखे हुए ज्ञान को अभ्यास में बदलें। [Hindi Shorthand Course] के सभी छात्रों के लिए यहाँ एक चरणबद्ध अभ्यास योजना (Practice Schedule) दी जा रही है:

  1. आउटलाइन की नकल (Mimicry): सबसे पहले आज की तालिका में दिए गए शब्दों को अपनी कॉपी में 10-10 लाइन लिखें। लिखते समय शब्द को मन ही मन दोहराएं (जैसे: “अखिल… अ-ख-ल आंकड़ा… लाइन के ऊपर”)।
  2. स्व-रिकॉर्डिंग (Self-Recording Technique): अपने स्मार्टफोन का उपयोग करें। अभ्यास-4 के गद्यांश को स्वयं धीमी आवाज में रिकॉर्ड करें। शुरुआत में गति 40 शब्द प्रति मिनट (WPM) रखें। अपनी ही आवाज पर लिखना आत्मविश्वास बढ़ाता है।
  3. मोटा और पतला (Pen Pressure): सोर्स में दिए गए निर्देशों के अनुसार, जहाँ रेखा को ‘मोटा सा’ मारने (Dark stroke) को कहा गया है, वहाँ पेंसिल पर थोड़ा दबाव बढ़ाएं (जैसे ‘उचित’, ‘होना’ आदि के लिए)। इससे ‘प’ और ‘ब’, या ‘त’ और ‘द’ के बीच का अंतर स्पष्ट रहेगा।
  4. पाँच-बार का नियम (The 5-Time Rule): किसी भी डिक्टेशन को कम से कम 5 से 6 बार लिखें। पहली बार आउटलाइन देखने के लिए, दूसरी बार गति के लिए, और अंतिम बार शुद्धता के लिए।
  5. पीडीएफ से मिलान: डिक्टेशन लिखने के बाद उसे टाइप करें या अपनी शॉर्टहैंड को मूल पीडीएफ (जो हमारे टेलीग्राम चैनल पर उपलब्ध है) से शब्द-दर-शब्द मिलाएं। अपनी गलतियों को लाल पेन से गोला करें और उन शब्दों की पुनः प्रैक्टिस करें।

6. निष्कर्ष और आगामी लक्ष्य

आज डे 33 की इस कक्षा में आपने न केवल कठिन प्रशासनिक शब्दों को सरल बनाना सीखा, बल्कि स्टेनोग्राफी के प्रति एक पेशेवर दृष्टिकोण भी विकसित किया। ‘संविधान’, ‘अखिल भारतीय सेवाएं’ और ‘राजभाषा’ जैसे शब्दों की आपकी पकड़ अब मजबूत हो चुकी है। याद रखें, स्टेनोग्राफी एक साधना है; इसमें आपकी पेंसिल की नोक से निकलने वाली हर रेखा आपके भविष्य की लकीर बन सकती है।

कल की कक्षा (डे 34) में हम गति वृद्धि के कुछ और उन्नत सिद्धांतों पर चर्चा करेंगे और एक नए अभ्यास के साथ अपनी सीमाओं को चुनौती देंगे। हार न मानें, क्योंकि आपकी सफलता आपके द्वारा किए गए अभ्यास के घंटों पर निर्भर करती है। अभ्यास करते रहें!

7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: क्या स्टेनोग्राफी परीक्षा में वर्तनी (Spelling) की छोटी गलतियाँ भी काउंट होती हैं? उत्तर: बिल्कुल। जैसा कि सोर्स में बताया गया है, स्टेनोग्राफी में केवल आउटलाइन बनाना ही पर्याप्त नहीं है। लिप्यंतरण (Transcription) करते समय ‘मनुष्य’ की जगह ‘मनुस्य’ लिखना एक गलती माना जाएगा। वर्तनी की शुद्धता के लिए नियमित पढ़ाई आवश्यक है।

प्रश्न 2: ‘भारत’ और ‘भारतीय’ की आउटलाइन में क्या अंतर है? उत्तर: ‘भारत’ के लिए मानक आउटलाइन का प्रयोग होता है, जबकि ‘भारतीय’ के लिए उसी आउटलाइन के अंत में एक छोटा ‘य’ का आंकड़ा जोड़ा जाता है। यह सूक्ष्म अंतर डिक्टेशन के समय पहचानना बहुत जरूरी है।

प्रश्न 3: डिक्टेशन लिखते समय यदि कोई शब्द छूट जाए तो क्या करें? उत्तर: यदि कोई शब्द छूट जाए, तो उसे वहीं छोड़ दें और अगले शब्द पर ध्यान दें। एक शब्द के पीछे रुकने से आपके अगले 5 शब्द छूट सकते हैं। छूटे हुए शब्द के लिए थोड़ी जगह छोड़ दें और बाद में संदर्भ (Context) से उसे पहचानने की कोशिश करें।

प्रश्न 4: ‘संविधान’ के प्रतीक का उपयोग कहाँ-कहाँ किया जा सकता है? उत्तर: ‘स’ वृत्त के बीच बिंदी वाला प्रतीक ‘संविधान’ के लिए है। इसका उपयोग ‘संवैधानिक’, ‘संविधान सभा’, और ‘संविधान संशोधन’ जैसे शब्दों के आधार के रूप में किया जा सकता है, जिससे लिखने की गति में भारी वृद्धि होती है।

प्रश्न 5: विराम चिह्नों (Punctuation) के लिए कौन से संकेत प्रयोग करें? उत्तर: पूर्ण विराम के लिए ‘x’ (छोटा क्रॉस) का प्रयोग करें। कोमा और अन्य चिह्नों के लिए डिक्टेशन के प्रवाह और व्याकरणिक नियमों का पालन करें। याद रखें, कोमा और पूर्ण विराम की गलतियों के अंक काटे जाते हैं।

प्रश्न 6: क्या ‘किए जा सकते हैं’ जैसे वाक्यांशों को हमेशा जोड़कर लिखना चाहिए? उत्तर: शुरुआत में (सीखने के चरण में) इन्हें अलग-अलग लिखना सुरक्षित है ताकि आप प्रत्येक शब्द की आउटलाइन समझ सकें। लेकिन जैसे ही आप 60 WPM की गति पार करते हैं, इन्हें जोड़कर लिखना (Phrasing) अनिवार्य हो जाता है।

Hindi Shorthand Stenography Course in Hindi (Day 31 - 35)
Hindi Shorthand Stenography Course in Hindi (Day 31 – 35)

हिंदी स्टेनोग्राफी कोर्स (85 दिन): डे 34, अभ्यास 5 – महत्वपूर्ण शब्द-चिह्न और वाक्यांश विश्लेषण

Shorthand केवल कागज पर खींची गई टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएँ नहीं हैं; यह भाषा का गणित है। जैसे-जैसे आप अभ्यास 5 की ओर बढ़ते हैं, आप महसूस करेंगे कि कैसे बड़े-बड़े वाक्य और जटिल विचार मात्र कुछ ही स्ट्रोक्स में सिमट जाते हैं। आज का यह पाठ आपकी ‘राइटिंग स्पीड’ को 40 से 60 शब्द प्रति मिनट (WPM) के पार ले जाने की नींव रखेगा।

हिंदी स्टेनोग्राफी की यात्रा में 34वां दिन एक ‘ट्रांजिशन फेज’ यानी संक्रमण काल की तरह है। अब तक आपने बुनियादी वर्णमाला, शब्दों को जोड़ना और कुछ प्रारंभिक शब्द-चिह्न सीखे हैं। लेकिन अभ्यास 5 से हम ‘एडवांस स्टेनोग्राफी’ के क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। यहाँ हम केवल शब्द नहीं लिख रहे, बल्कि हम ‘वाक्यांशों’ (Phrasography) और ‘लोप करने की तकनीक’ (Principles of Omission) पर महारत हासिल करेंगे।

अभ्यास 4 तक आपने वाक्यों को बनाने की जो समझ विकसित की है, वह यहाँ और अधिक परिष्कृत होगी। इस पाठ में हम महात्मा गांधी के उन विचारों को लिपिबद्ध करेंगे जो न केवल परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि एक स्टेनोग्राफर के रूप में आपकी शब्द-संपदा (Vocabulary) को भी समृद्ध करेंगे।

1. अभ्यास 5 का मुख्य उद्देश्य और वैचारिक स्रोत

आज के अभ्यास का मुख्य आधार ‘राष्ट्रभाषा हिंदी’ के प्रति गांधी जी के विचार और राष्ट्रीयता की भावना है। सरकारी परीक्षाओं (जैसे SSC Stenographer, DSSSB, और High Court Exams) में अक्सर सामाजिक और वैचारिक डिक्टेशन दिए जाते हैं।

अभ्यास के मुख्य वैचारिक स्तंभ:

  • राष्ट्रभाषा हिंदी का गौरव: देश की अखंडता के लिए एक साझा भाषा की अनिवार्यता।
  • औपनिवेशिक मानसिकता का विरोध: अंग्रेजी भाषा के थोपे जाने से उपजी ‘मानसिक गुलामी’ का विश्लेषण।
  • राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण: भाषा और संस्कृति का व्यक्ति के विकास पर पड़ने वाला मनोवैज्ञानिक प्रभाव।

इस अभ्यास के माध्यम से आप सीखेंगे कि ‘राष्ट्रभाषा’, ‘स्वतंत्रता आंदोलन’, ‘मानसिकता’, और ‘वास्तविकता’ जैसे शब्दों को संक्षिप्त रूप में कैसे पिरोया जाता है ताकि पेंसिल की गति बिना रुके प्रवाह में चलती रहे।

2. महत्वपूर्ण शब्द-चिह्न (Critical Shabd-Chinh): तकनीकी और तार्किक विश्लेषण

स्टेनोग्राफी में शब्द-चिह्न (Logograms) वे जादुई उपकरण हैं जो आपकी गति को पंख लगाते हैं। अभ्यास 5 में प्रयुक्त होने वाले शब्दों की विस्तृत व्याख्या नीचे दी गई है:

शब्दस्टेनो निर्माण विधि और लॉजिक (Technical Logic)प्रयोग का सटीक संदर्भ
आजलाइन के ऊपर ‘अ’ के डैश के साथ ‘ज’ रेखा। इसमें स्वर का लोप किया जा सकता है।समय सूचक वाक्यों में।
यदिलाइन के ऊपर ‘य’ और ‘द’ का संक्षिप्त प्रयोग। यह ‘शर्त’ को दर्शाता है।कंडीशनल वाक्यों की शुरुआत में।
अखिल भारतीय‘अ’ का डैश, फिर ‘ख’ में ‘ल’ का अंकुश (Hook) और ‘भारतीय’ के लिए ‘भर-तीय’ का जोड़।राष्ट्रीय संस्थाओं के नाम के लिए।
संगठन‘श’ का वृत्त (Circle), ‘ग’ व्यंजन और ‘ठन’ का प्रयोग। ‘न’ का अंकुश अंत में।संस्था या समूह के वर्णन में।
राष्ट्रभाषा‘राष्ट्र’ (र-श-ट्र) लिखकर उसमें ‘स’ का वृत्त जोड़ना। यहाँ ‘भाषा’ शब्द के ‘भ’ का लोप कर दिया जाता है।राष्ट्रीय पहचान के संदर्भ में।
हिंदीलाइन पर ‘ह’ व्यंजन, ‘न’ का हुक और ‘द’ के साथ ‘ई’ की मात्रा।भाषाई संदर्भ में।
अंग्रेजी‘अ’ का डैश, ‘ग’ में ‘र’ का हुक और ‘जी’ का जोड़।विदेशी भाषा के संदर्भ में।
स्वेच्छा‘स्व’ का बड़ा चाप (Large Loop) और ‘छ’ रेखा का प्रयोग।स्व-इच्छा या मर्जी के लिए।
देशभक्ति‘देश’ लिखकर ‘भ’ और ‘क्ति’ के लिए ‘क’ को आधा करना।राष्ट्रप्रेम के वाक्यों में।
गांधी जी‘ग’ और ‘ध’ को जोड़कर ‘ध’ को बीच से काटना अनिवार्य है ताकि ‘गंगी’ न पढ़ा जाए। अंत में ‘जी’ जोड़ें।व्यक्ति विशेष के आदर के लिए।
सिलसिलाइसमें ‘सलसल’ को दो बार मार दिया जाता है (Double application of ‘sl’).निरंतरता या क्रम के लिए।
विश्व भाषा‘वैव वैश’ तकनीक का प्रयोग कर ‘वसु’ और ‘भाषा’ के लिए ‘स’ वृत्त का विस्तार।वैश्विक संवाद के संदर्भ में।
विकसित‘वैक’ और ‘सत’ का संयोजन। ‘व’ के साथ ‘क’ और ‘स’ वृत्त का प्रयोग।प्रगति या विकास के संदर्भ में।
उपेक्षा‘उ’ स्वर के साथ ‘प’, ‘क’ और ‘श’ का वृत्त।अनदेखी या तिरस्कार के संदर्भ में।
मानसिकता‘म’, ‘न’ और ‘स’ का वृत्त, फिर ‘क’ और ‘ता’ प्रत्यय का जोड़।मनोवैज्ञानिक अवस्था के लिए।
वास्तविकता‘वास्तव’ का शब्द-चिह्न बनाकर उसमें ‘क-ता’ जोड़ दिया जाता है।यथार्थ को प्रकट करने हेतु।
स्वाभाविक‘स्व’ का चाप, ‘भा’, ‘व’ और अंत में ‘क’।प्राकृतिक क्रियाओं के लिए।
हृदय‘ह’ को गहरा (Thick) करके ‘य’ का हुक लगाना।भावनात्मक गहराई के लिए।
स्वाधीनता‘स्व’ का चाप, ‘ध’, ‘न’ का हुक और ‘ता’ प्रत्यय।स्वतंत्रता के ऐतिहासिक संदर्भ में।
आंदोलन‘अं’ की बिंदी/डैश, ‘द’ में ‘ल’ का हुक और ‘न’ का अंकुश।संघर्ष या अभियान के लिए।
चरित्रद्वित्व सिद्धांत (Doubling Principle): ‘च’ को दोगुना लंबा करना जिससे उसमें ‘र’ जुड़ जाए, फिर ‘त्र’ का चाप।नैतिक गुणों के वर्णन में।
महत्वपूर्ण‘महत्व’ लिखकर उसमें ‘पूर्ण’ का प्रत्यय (प-र-ण) जोड़ना।वरीयता दर्शाने के लिए।

3. शॉर्टहैंड तकनीक: ‘जूट’ (Phrasography) और प्रत्यय का गहरा ज्ञान

अभ्यास 5 की सबसे बड़ी ताकत इसके ‘जूट’ या वाक्यांश हैं। जब हम हाथ उठाए बिना तीन-चार शब्दों को एक साथ लिखते हैं, तो उसे स्टेनोग्राफी की भाषा में ‘वाक्यांश’ (Phrase) या ‘जूट’ कहा जाता है।

क. ‘के बारे में’ का नियम (The ‘About’ Rule)

जब भी किसी संज्ञा के बाद ‘के बारे में’ आए, तो उस शब्द की अंतिम रेखा के ऊपर एक छोटा ‘म’ व्यंजन बना दिया जाता है।

  • उदाहरण 1: ‘शिक्षा के बारे में’ – शिक्षा की आउटलाइन के सिर पर ‘म’ रख दें।
  • उदाहरण 2: ‘भारत के बारे में’ – भारत लिखकर उसके ऊपर ‘म’ का प्रयोग करें।
  • उदाहरण 3: ‘संविधान के बारे में’ – संविधान + म (ऊपर)।

ख. ‘के कारण’ का नियम (The ‘Reason’ Rule)

यदि किसी शब्द के बाद ‘के कारण’ आए, तो उस शब्द के ठीक ऊपर या पास ‘क’ व्यंजन बना दिया जाता है।

  • उदाहरण 1: ‘प्रभाव के कारण’ – ‘प्रभाव’ लिखकर ऊपर ‘क’ मार दें।
  • उदाहरण 2: ‘योजना के कारण’ – ‘योजना’ + क।
  • उदाहरण 3: ‘भ्रष्टाचार के कारण’ – ‘भ्रष्टाचार’ + क।

ग. ‘रूप से’ का नियम (The ‘Form’ Rule)

किसी शब्द के साथ ‘रूप से’ जोड़ने के लिए शब्द के अंत में ‘र-प-स’ (र और प की संयुक्त रेखा के साथ स-वृत्त) का उपयोग किया जाता है।

  • उदाहरण 1: ‘स्वाभाविक रूप से’ – स्वाभाविक की आउटलाइन के तुरंत बाद ‘र-प-स’।
  • उदाहरण 2: ‘मुख्य रूप से’ – मुख्य + र-प-स।
  • उदाहरण 3: ‘उचित रूप से’ – उचित + र-प-स।

4. विशिष्ट आउटलाइन विश्लेषण (Advanced Breakdown)

एक वरिष्ठ प्रशिक्षक के रूप में, मैं आपको उन बारीकियों को समझाना चाहता हूँ जो आपकी कॉपी चेक करने वाले परीक्षक को प्रभावित करती हैं:

  1. गांधी जी (विभेदीकरण): कई छात्र ‘ध’ को नहीं काटते, जिससे अनुवाद (Transcription) के समय वे इसे ‘गंगी जी’ पढ़ लेते हैं। याद रखें, ‘ध’ को काटना उसे ‘ग’ से अलग करने का एकमात्र तकनीकी तरीका है।
  2. पड़ेगा / पाएगी (काटने का नियम): क्रियाओं को गति देने के लिए ‘ग’ व्यंजन से काटना सीखें। यदि ‘पड़े’ लिखकर ‘ग’ से काट दिया जाए, तो वह ‘पड़ेगा’ बन जाता है। इसी प्रकार ‘पाय’ लिखकर ‘ग’ से काटकर बिंदी लगाने पर ‘पाएगी’ पढ़ा जाता है। यह ‘Future Tense’ की क्रियाओं के लिए सबसे तेज तकनीक है।
  3. मातृभाषा: यहाँ ‘म’ को द्वित्व सिद्धांत (Doubling) के तहत दोगुना किया जाता है जिससे ‘मातर’ जुड़ता है, और ‘भाषा’ के लिए अंत में ‘स’ वृत्त लगाया जाता है।

5. विस्तृत विश्लेषण: गांधी जी, भाषा दर्शन और मानसिक दासता

गांधी जी के भाषा संबंधी विचार केवल राजनीतिक नहीं थे, वे गहरे मनोवैज्ञानिक थे। इस डिक्टेशन को लिखते समय आपको उस मानसिक दबाव को समझना होगा जिसे गांधी जी ‘मानसिक गुलामी’ कहते थे।

भाषा और हृदय का संबंध (700+ शब्द विश्लेषण)

गांधी जी का तर्क था कि विचार ‘हृदय’ (Heart) से उपजते हैं और ‘मस्तिष्क’ (Brain) उन्हें केवल शब्द देता है। यदि भाषा विदेशी हो, तो हृदय और मस्तिष्क के बीच का सेतु टूट जाता है। उन्होंने अंग्रेजी को ‘बनावटी’ माध्यम कहा क्योंकि यह भारतीय विद्यार्थियों को मौलिक चिंतन (Original Thinking) से दूर कर रही थी।

1. मानसिक दासता और हीन भावना: जब एक विद्यार्थी अपनी मातृभाषा को छोड़कर अंग्रेजी में रट्टा मारता है, तो वह अनजाने में यह स्वीकार कर लेता है कि उसकी अपनी संस्कृति और भाषा अक्षम है। गांधी जी के अनुसार, यही ‘मानसिक गुलामी’ का बीज है। स्टेनोग्राफी के छात्रों के लिए भी यह संदेश महत्वपूर्ण है; कई छात्र सोचते हैं कि अंग्रेजी स्टेनो ही बेहतर है, जबकि हिंदी स्टेनो हमारे प्रशासनिक तंत्र की रीढ़ है। अपनी भाषा में दक्षता प्राप्त करना ही वास्तविक स्वाभिमान है।

2. समय की अपार बर्बादी: गांधी जी ने लिखा कि हजारों नवयुवक अपने जीवन के सबसे कीमती साल (10-12 वर्ष) केवल एक विदेशी भाषा के व्याकरण को रटने में गँवा देते हैं। यदि यही समय विज्ञान, इतिहास, या कौशल विकास (जैसे स्टेनोग्राफी) में लगाया जाता, तो देश आज कहीं आगे होता। अंग्रेजी सीखना एक साधन होना चाहिए था, साध्य नहीं।

3. शिक्षा का लोकतंत्रीकरण: अंग्रेजी के माध्यम से शिक्षा केवल एक विशिष्ट वर्ग (Elite Class) तक सीमित रह गई। गांधी जी चाहते थे कि ज्ञान आम जनता, किसानों और मज़दूरों तक उनकी अपनी भाषा में पहुँचे। जब तक ‘राष्ट्रभाषा’ और ‘मातृभाषा’ का सम्मान नहीं होगा, तब तक स्वराज्य अधूरा है।

4. चरित्र निर्माण पर प्रभाव: विदेशी भाषा के व्यवहार से व्यक्ति अपनी जड़ों से कट जाता है। गांधी जी का मानना था कि जो व्यक्ति अपनी माँ की भाषा का अनादर करता है, वह राष्ट्र के चरित्र में योगदान नहीं दे सकता। डिक्टेशन में आने वाले शब्द ‘चरित्र पर प्रभाव’ और ‘राष्ट्र की शक्ति’ इसी ओर संकेत करते हैं।

इस वैचारिक गहराई को समझने के बाद, जब आप ‘आत्मा का नाश’ या ‘स्वाधीनता आंदोलन’ जैसे वाक्यांश लिखेंगे, तो आपकी पेंसिल में एक भावना होगी, जो आपको अनुवाद के समय शब्दों को याद रखने में मदद करेगी।

6. अभ्यास 5 के लिए त्रुटि-मुक्त अभ्यास निर्देश

सफलता के लिए इन पांच चरणों का पालन करें:

  1. आउटलाइन निर्माण (Precision Phase): प्रत्येक नए शब्द-चिह्न को कम से कम 50 बार लिखें। पेंसिल की नोक न बहुत पतली हो, न बहुत मोटी।
  2. गति वृद्धि (Speed Phase): शब्दों को 40 WPM की गति से लिखना शुरू करें। पेंसिल को कागज पर रगड़ें नहीं, बल्कि उसे नाचने दें।
  3. ऑडियो डिक्टेशन (Listening Phase): दिए गए गद्यांश को अपने फोन में रिकॉर्ड करें। रिकॉर्डिंग करते समय शब्दों के बीच उचित विराम दें।
  4. ट्रांसक्रिप्शन (Transcription Phase): स्टेनो लिखने के बाद उसे तुरंत सामान्य हिंदी में अनुवाद करें। यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
  5. त्रुटि विश्लेषण (Error Analysis): टेलीग्राम से पीडीएफ डाउनलोड करें। यदि आपने ‘राष्ट्रभाषा’ को ‘राजभाषा’ पढ़ा है, तो यह एक ‘Contextual Error’ है। ऐसी गलतियों को सुधारें।

7. स्टेनोग्राफी प्रो-टिप्स: एक शिक्षक का अनुभव

  • Pencil Pressure (पेंसिल का दबाव): स्टेनोग्राफी में ‘हल्का’ और ‘गहरा’ (Light/Dark) का बहुत महत्व है। ‘ग’ गहरा होता है जबकि ‘क’ हल्का। अपनी उंगलियों के दबाव को नियंत्रित करना सीखें।
  • Muscle Memory (मांसपेशियों की याददाश्त): अभ्यास इतना हो कि दिमाग को सोचना न पड़े, हाथ स्वतः ही ‘गांधी जी’ की आउटलाइन बना दे।
  • Continuous Writing: पेंसिल को बार-बार उठाना आपकी गति का दुश्मन है। वाक्यांशों (जूट) का अधिक से अधिक प्रयोग करें।

8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: क्या ‘ध’ को काटना अनिवार्य है? उत्तर: हाँ, गांधी जी जैसे शब्दों में ‘ध’ को काटना तकनीकी रूप से सही पढ़ने के लिए आवश्यक है, अन्यथा ‘ग’ और ‘ध’ के बीच भ्रम हो सकता है।

प्रश्न 2: ‘जूट’ (Phrasography) का उपयोग करने से क्या अनुवाद में दिक्कत आती है? उत्तर: बिल्कुल नहीं! यदि आप नियमों के अनुसार जूट (जैसे- के बारे में के लिए ‘म’) का प्रयोग करते हैं, तो यह आपकी गति और शुद्धता दोनों बढ़ाता है।

प्रश्न 3: अभ्यास 5 की डिक्टेशन कितनी बार लिखनी चाहिए? उत्तर: कम से कम 10 बार। हर बार गति को 5 WPM बढ़ाने का लक्ष्य रखें।

प्रश्न 4: ‘सिलसिला’ जैसे शब्दों के लिए दोहराव (Repetition) क्यों? उत्तर: यह स्टेनोग्राफी का एक नियम है जहाँ शब्दों की पुनरावृत्ति को दर्शाने के लिए उसे दो बार पास-पास लिखा जाता है या विशिष्ट चिह्न दिए जाते हैं।

प्रश्न 5: क्या सरकारी परीक्षाओं में गांधी जी के लेख आते हैं? उत्तर: जी हाँ, SSC और हाई कोर्ट की परीक्षाओं में वैचारिक लेख (Editorial style) बहुत अधिक पूछे जाते हैं, जिनमें गांधी जी के विचार प्रमुख होते हैं।

9. अभ्यास 5: पूर्ण अभ्यास पटकथा (Practice Script)

नीचे दिए गए गद्यांश में Bold शब्द वाक्यांशों या विशेष आउटलाइन को दर्शाते हैं:

“आज यदि अखिल भारतीय संगठन से कहा जाए कि अपना काम राष्ट्रभाषा हिंदी में करें, तो बहुत से लोग कहने लगते हैं कि हिंदी उन पर लादी जा रही है। उस समय वे भूल जाते हैं कि अंग्रेजी उन पर पहले से लदी हुई है। अंग्रेजी के लिए स्वेच्छा और अपने देश की भाषा के लिए विरोध, यह उनकी कैसी देशभक्ति है? गांधी जी ने बिना कारण ही अंग्रेजी का विरोध नहीं किया था। उन्होंने नवयुवक की परेशानी को समझा था। अंग्रेजी के प्रभाव के कारण होने वाली हानि के बारे में उन्होंने लिखा है कि हजारों नवयुवक अपने जीवन का कीमती समय विदेशी भाषा सीखने में नष्ट कर देते हैं। वे इस मानसिकता के शिकार होते जा रहे हैं कि ऊंचे दर्जे के विचार केवल अंग्रेजी भाषा में ही प्रकट किए जा सकते हैं, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। कोई भी व्यक्ति अपने वास्तविक विचार अपनी मातृभाषा में ही स्वाभाविक रूप से प्रकट कर सकता है। गांधी जी मानते थे कि अंग्रेजी के प्रभाव के कारण राष्ट्र की शक्ति कम हो गई है। विद्यार्थियों की आयु घट गई है। यदि यही सिलसिला जारी रहा, तो राष्ट्र की असली आत्मा का नाश हो जाएगा। गांधी जी ऐसा इसलिए सोचते थे क्योंकि स्वाधीनता आंदोलन के संदर्भ में वे भाषा की समस्या पर विचार करते थे। उनके लिए यह प्रश्न अधिक महत्वपूर्ण था कि विदेशी भाषा के व्यवहार से राष्ट्र के चरित्र पर क्या पड़ेगा। इसलिए वे देश की भाषा का ही प्रयोग करना चाहते थे।”

निष्कर्ष और आगामी पाठ: आज आपने अभ्यास 5 के माध्यम से स्टेनोग्राफी की जटिलताओं को सरलता से समझा। यह अभ्यास आपकी गति के साथ-साथ आपके धैर्य की भी परीक्षा है। अगले पाठ यानी डे 35 में, हम अभ्यास 6 की शुरुआत करेंगे और ‘स’ वृत्त के और भी उन्नत प्रयोग सीखेंगे। तब तक, अपनी पेंसिल को थामे रखिए और अभ्यास जारी रखिए! अपनी मेहनत पर विश्वास रखें, सफलता केवल एक अभ्यास दूर है!


Day 35 (अभ्यास 6) – वाक्यांश और विशेष शब्द-चिह्न मास्टरक्लास

1. स्टेनोग्राफी की यात्रा में एक निर्णायक मोड़

आज हम अपनी हिंदी स्टेनोग्राफी सीखने की यात्रा के 35वें दिन (Day 35) पर पहुँच चुके हैं। यदि आप आज यहाँ हैं, तो इसका सीधा अर्थ है कि आपने पिछले 34 दिनों के कठिन परिश्रम, रेखाओं के अभ्यास और शब्द-चिह्नों के रटने की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। स्टेनोग्राफी कोई साधारण लेखन कला नहीं है; यह धैर्य और निरंतरता का खेल है।

डे 35 का यह सत्र विशेष रूप से ‘अभ्यास 6’ पर केंद्रित है। यह अभ्यास आपकी गति (Speed) और सटीकता (Accuracy) के बीच के सेतु का कार्य करेगा। अब तक आपने बुनियादी अक्षरों और सरल शब्दों को लिखना सीखा है, लेकिन आज हम उन ‘वाक्यांशों’ (Phrases) और ‘विशेष शब्द-चिह्नों’ की गहराई में उतरेंगे, जो आपको एक औसत स्टेनो लेखक से उठाकर एक ‘रिपोर्टर’ या ‘ग्रेड-सी’ स्टेनोग्राफर की श्रेणी में खड़ा कर देंगे।

एसएससी (SSC), रेलवे, विधानसभा और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं में जो डिक्टेशन बोली जाती है, उसमें कुछ शब्द समूह बार-बार दोहराए जाते हैं। यदि आप उन समूहों को अलग-अलग अक्षरों में लिखेंगे, तो आप कभी भी 80 या 100 शब्द प्रति मिनट (WPM) की गति प्राप्त नहीं कर पाएंगे। आज का यह ‘मास्टरक्लास’ लेख आपको सिखाएगा कि कैसे बड़े से बड़े वाक्यांश को एक छोटी सी, सुगठित आउटलाइन में समेटा जाता है। मेरा अनुभव कहता है कि जो छात्र ‘अभ्यास 6’ के वाक्यांशों पर अपनी पकड़ मजबूत कर लेता है, उसके लिए आगे की डिक्टेशन मात्र एक औपचारिकता रह जाती है। चलिए, इस तकनीकी सफर की शुरुआत करते हैं।

2. स्टेनोग्राफी में ‘शब्द-चिह्न’ और ‘वाक्यांश’ का तकनीकी महत्व

शॉर्टहैंड या स्टेनोग्राफी में गति बढ़ाने का एकमात्र वैज्ञानिक तरीका है, ‘न्यूनतम प्रयास, अधिकतम आउटपुट’। जब वक्ता धाराप्रवाह बोलता है, तो हमारे पास इतना समय नहीं होता कि हम व्याकरण के हर नियम के अनुसार एक-एक अक्षर को सजाकर लिखें। यहीं पर ‘शब्द-चिह्न’ (Logograms) और ‘वाक्यांश’ (Phrasography) का महत्व समझ में आता है।

शब्द-चिह्नों का मनोविज्ञान: स्टेनोग्राफी में शब्द-चिह्न उन संकेतों को कहते हैं जो किसी शब्द के सबसे विशिष्ट हिस्से को दर्शाते हैं। उदाहरण के लिए, ‘महोदय’ के लिए केवल एक विशिष्ट रेखा निर्धारित है। इसे याद करना वैसा ही है जैसे हम गणित में सूत्रों को याद करते हैं। एक वरिष्ठ विशेषज्ञ के रूप में, मैं आपको सलाह देता हूँ कि शब्द-चिह्नों को हाथ की मांसपेशियों की स्मृति (Muscle Memory) में इस तरह उतार लें कि कान में शब्द पड़ते ही हाथ स्वतः चल पड़े।

वाक्यांशों का निर्माण और प्रवाह: दो या दो से अधिक शब्दों को बिना पेंसिल उठाए एक साथ जोड़ देना ‘वाक्यांश’ कहलाता है। वाक्यांश बनाने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि पेंसिल को कागज से बार-बार उठाना नहीं पड़ता, जिससे सेकंड के सौवें हिस्से की बचत होती है। यही संचित सेकंड्स अंततः आपकी गति को 60 से 80 और 80 से 100 WPM तक ले जाते हैं।

आजकल डिजिटल युग में, केवल शॉर्टहैंड लिखना ही काफी नहीं है। आपको अपनी typing practice पर भी उतना ही ध्यान देना होगा। स्टेनोग्राफी की आउटलाइन को सही ढंग से पढ़ने के बाद उसे कंप्यूटर पर टाइप करना आपकी अंतिम परीक्षा होती है। इसलिए, अभ्यास के दौरान सही keyboard लेआउट (जैसे मंगल या रेमिंगटन गेल) का चुनाव करें और अपनी टाइपिंग स्पीड को भी स्टेनो के साथ तालमेल में रखें।

3. आज के प्रमुख शब्द और उनकी विस्तृत तकनीकी रूपरेखा (Technical Outlines)

‘अभ्यास 6’ में आने वाले शब्द प्रशासनिक और सामाजिक विषयों के आधार स्तंभ हैं। आइए, सिद्धांतों के आधार पर इनकी बनावट को विस्तार से समझते हैं।

3.1 माननीय सभापति महोदय (The Triple Combination)

संसदीय डिक्टेशन की शुरुआत अक्सर इसी वाक्यांश से होती है।

  • बनावट: ‘म-न-य’ (माननीय) की प्रारंभिक आउटलाइन बनाएं। इसके तुरंत बाद पेंसिल उठाए बिना ‘स-भ’ (सभापति) जोड़ें और अंत में ‘म’ का एक छोटा डैश (महोदय के लिए) लगा दें।
  • विशेष नियम: ‘भ’ को बीच में काटना वैकल्पिक है। यदि आप तेज गति में हैं, तो ‘स-भ’ के प्रवाह से ही इसे ‘सभापति’ समझें।
  • तुलना:
    • अध्यक्ष महोदय: अ + ध + क्ष + म। (लाइन के ऊपर)
    • उपाध्यक्ष महोदय: उ + प + ध + क्ष + म। (लाइन को काटते हुए)

3.2 अहम (Aham) – विशेष शब्द-चिह्न

सोर्स कॉन्टेक्स्ट के अनुसार, ‘अहम’ एक बहुत ही महत्वपूर्ण शब्द है।

  • बनावट: इसमें ‘अ’ का छोटा डैश, फिर ‘ह’ का बड़ा वृत्त (Circle) और अंत में ‘म’ की वक्र रेखा जोड़ी जाती है।
  • नियम: इसे लाइन पर (Position 2) लिखें। यह ‘हम’ से भिन्न होना चाहिए, इसलिए ‘अ’ का स्वर स्पष्ट रखें।

3.3 खड़ा कर दिया है vs खरा कर दिया है (The Speed Substitution)

स्टेनोग्राफी में प्रवाह बनाए रखने के लिए कभी-कभी हम ध्वन्यात्मक समानता वाले सरल अक्षरों का प्रयोग करते हैं।

  • नियम: ‘खड़ा’ में ‘ड़’ की ध्वनि के लिए हाथ को रोकना पड़ता है और रेखा को काटना पड़ता है। इसके स्थान पर ‘खरा’ (ख-र) लिखना कहीं अधिक सरल और तरल (Fluid) है।
  • अनुवाद टिप: जब आप अपनी आउटलाइन को ट्रांसलेट करेंगे, तो वाक्य के संदर्भ “देश को जिस स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है” से स्वयं ही समझ जाएंगे कि यह ‘खरा’ नहीं बल्कि ‘खड़ा’ है।

3.4 जनसंख्या वृद्धि और परिवार नियोजन

  • जनसंख्या: ‘जन’ के लिए ‘ज-न’ का हुक, फिर ‘श-ख-य’ का संयोजन। ‘य’ का संक्षिप्त रूप अंत में जोड़ें।
  • वृद्धि: ‘व-र’ का आंकड़ा और ‘ध’ की रेखा, अंत में ‘ई’ की मात्रा के लिए एक छोटा टिक।
  • परिवार नियोजन: ‘प-र-व-र’ को एक साथ जोड़ें और इसके नीचे या साथ में ‘न-य-जन’ को सटाकर लिखें।

4. व्याकरणिक नियम: प्रत्यय और चाप (Suffixes and Arcs)

स्टेनोग्राफी में व्याकरण के कुछ नियम आपके लेखन को अत्यधिक संक्षिप्त कर देते हैं। अभ्यास 6 में दो प्रमुख नियमों पर जोर दिया गया है:

4.1 ‘त्व’ प्रत्यय (Suffix – Tva)

जब किसी शब्द के अंत में ‘त्व’ आता है (जैसे: तत्व, महत्व), तो उसे पूरा लिखने के बजाय एक संक्षिप्त प्रतीक का उपयोग किया जाता है।

  • नियम: मुख्य शब्द की अंतिम रेखा के साथ एक छोटा सा हुक जैसा झुकाव (Hook-like inclination) दिया जाता है जो ‘त्व’ को दर्शाता है। यह प्रायः ‘त’ रेखा की दिशा में होता है।

‘त्व’ प्रत्यय के 10 अभ्यास वाक्य:

  1. जल एक महत्वपूर्ण तत्व है।
  2. समाज में नारी का अपना महत्व है।
  3. नेता को अपने नेतृत्व पर ध्यान देना चाहिए।
  4. हमें अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए।
  5. उसका व्यक्तित्व बहुत प्रभावशाली है।
  6. भारत का प्रभुत्व बढ़ रहा है।
  7. सतित्व की रक्षा करना धर्म है।
  8. उसके कार्यों में विराट्व दिखता है।
  9. गुरु का गुरुत्व सराहनीय है।
  10. मनुष्यत्व ही सबसे बड़ा धर्म है।

4.2 ‘चाहिए’ का चाप (The ‘Chahiye’ Arc)

क्रिया के अंत में ‘चाहिए’ को जोड़ने के लिए पेंसिल उठाने की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए एक ‘चाप’ (Arc) का उपयोग किया जाता है।

  • विधि: क्रिया की अंतिम रेखा (जैसे ‘ना’) को थोड़ा बड़ा करें और अंत में एक चाप (Arc) घुमा दें।

‘चाहिए’ चाप के 10 अभ्यास वाक्य:

  1. अब हमें घर होना चाहिए।
  2. सरकार को विकास करना चाहिए।
  3. आपको धैर्य रखना चाहिए।
  4. सच कहना चाहिए।
  5. फल देखना चाहिए।
  6. पत्र लिखना चाहिए।
  7. उपहार देना चाहिए।
  8. वहां जाना चाहिए।
  9. समय पर आना चाहिए।
  10. ध्यान से सुनना चाहिए।

4.3 ‘के बारे में’ (The Junction Mark)

यह एक जादुई नियम है। जब किसी संज्ञा के बाद ‘के बारे में’ आए, तो उस शब्द के ऊपर एक छोटा सा ‘जुट’ (Jut/Dot) लगा दें।

  • लाभ: इससे ‘क’, ‘ब’, ‘र’, ‘म’ के अलग-अलग संकेतों को लिखने का समय बचता है। उदाहरण के लिए, ‘योजनाओं’ लिखकर उसके ऊपर डॉट लगा देने का अर्थ है “योजनाओं के बारे में”।

5. अभ्यास 6: डिक्टेशन हेतु संपूर्ण गद्यांश (Practice Passage)

छात्रों, नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यान से पढ़ें। मैंने इसे खंडों में विभाजित किया है और प्रत्येक खंड के बाद उसकी तकनीकी व्याख्या जोड़ी है।

खंड 1: संबोधन और प्रस्ताव

“माननीय सभापति महोदय, माननीय सदस्य द्वारा प्रस्तुत संकल्प का मैं समर्थन करता हूं। आज देश की जो परिस्थिति है, उसके अनुसार इस संकल्प पर बहुत सोचने और चर्चा करने का समय आ गया है।”

  • स्टेनो निर्देश: ‘माननीय’ (म-न-य), ‘सदस्य द्वारा’ (स-द-स-य के साथ द-र जोड़ें), ‘समर्थन करता हूँ’ (स-म-र-थ-न के साथ क-ह का संक्षिप्त रूप)। ‘परिस्थिति’ (Position 2: प-र-स-थ-त) को लाइन पर लिखें।

खंड 2: जनसंख्या और विकास की चुनौती

“जनसंख्या की वृद्धि ने आज देश को जिस स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है, उसके हिसाब से देश की योजनाओं के बारे में सोचने का समय आ गया है। यदि इस पर नहीं सोचा गया तो जिस ढंग से दुनिया को देखते हुए हम अपने देश के विकास को गति देना चाह रहे हैं, उसमें हम सफल नहीं हो पाएंगे।”

  • स्टेनो निर्देश: ‘जनसंख्या वृद्धि’ (जन-शखय-वरधई), ‘खड़ा कर दिया है’ (यहाँ ‘खरा’ लिखकर ‘कर दिया है’ का वाक्यांश जोड़ें)। ‘योजनाओं के बारे में’ के लिए ‘योजनाओं’ की आउटलाइन बनाकर ऊपर डॉट लगाएं। ‘चाह रहे हैं’ के लिए ‘चाह’ का शब्द-चिह्न और ‘रहा/रहे’ का डबलिंग नियम लगाएं।

खंड 3: अहम तत्व और परिवार नियोजन

“इसमें जनसंख्या बहुत अहम तत्व है। इसलिए यह जरूरी है कि सरकार जनसंख्या वृद्धि की इस गंभीर समस्या पर विचार करें। आपातकाल के समय जिस ढंग से देश में परिवार नियोजन का कार्यक्रम चलाया गया, उससे लोग भयभीत हो गए थे।”

  • स्टेनो निर्देश: ‘अहम’ (अ-ह-म), ‘तत्व’ (त+त्व हुक), ‘आपातकाल’ (आ-प-त को आधा करें), ‘परिवार नियोजन’ (परवर-नयजन), ‘भयभीत हो गए थे’ (भय-भीत को एक साथ जोड़कर ‘हो गए थे’ का वाक्यांश बनाएं)।

खंड 4: गांवों की स्थिति और स्वास्थ्य सेवाएं

“आज गांव के अधिकतर आदिवासी और हरिजन इस कार्यक्रम की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। इसके लिए हमें एक-एक चीज सोचनी पड़ेगी। हमें यह कार्यक्रम ऐसे क्षेत्रों में अधिक गति से चलाना चाहिए जहां पर सभी आधुनिक सुविधाएं हों तथा स्वास्थ्य केंद्र में अच्छे डॉक्टर हों।”

  • स्टेनो निर्देश: ‘अधिकतर’ (अ-ध-क को बड़ा करें – तर/दर का नियम), ‘आदिवासी’ (अ-द-व-स + अंत में ई का टिक), ‘आकर्षित’ (आ-क-र-ष-त), ‘सुविधाएं’ (स-व-ध को बीच से काटें), ‘स्वास्थ्य केंद्र’ (स्वास्थ्य का शब्द-चिह्न + केंद्र के लिए न-दर का नियम), ‘डॉक्टर’ (ड-क-टर)।

6. आज की शब्दावली तालिका (Comprehensive Vocabulary Table)

तकनीकी गहराई प्रदान करने के लिए, मैंने यहाँ शब्दों की स्थिति (Line Placement) का भी उल्लेख किया है।

शब्दस्टेनो निर्माण (स्ट्रोक निर्देश)लाइन स्थिति (Position)श्रेणी
माननीयम-न-य (वक्र रेखाएं)Position 1 (ऊपर)विशेषण
सभापतिस (वृत्त) + भ + प-त (हुक)Position 2 (पर)पद
अध्यक्षअ + ध + क्ष (चाप)Position 1 (ऊपर)पद
अहमअ + ह (वृत्त) + मPosition 2 (पर)विशेषण
परिस्थितिप-र-स-थ-त (बिंदी अंत में)Position 2 (पर)संज्ञा
जनसंख्याजन (हुक) + श-ख-यPosition 1 (ऊपर)संज्ञा
नियोजनन + य + ज-न (हुक)Position 2 (पर)संज्ञा
आदिवासीअ-द-व-स + ई (टिक)Position 1 (ऊपर)संज्ञा
आधुनिकअ + ध + न-कPosition 1 (ऊपर)विशेषण
वृद्धिव-र (आंकड़ा) + ध + ईPosition 3 (काटकर)संज्ञा
बंटवाराब-ट-व-र-ा (बड़ा र)Position 2 (पर)संज्ञा
सुविधाएंस-व (बड़ा वृत्त) + ध-एPosition 1 (ऊपर)संज्ञा
स्वास्थ्यस-व (विशेष चाप/चिह्न)Position 1 (ऊपर)संज्ञा
केंद्रक-न-द-र (डबलिंग नियम)Position 2 (पर)संज्ञा

7. उच्च गति डिक्टेशन के लिए विशेषज्ञ युक्तियाँ (Expert Secrets)

एक सीनियर टेक्निकल राइटर और स्टेनो एक्सपर्ट के नाते, मैं आपको ‘स्पीड बिल्डिंग साइकिल’ के बारे में बताना चाहता हूँ। इसे ध्यान से समझें:

  1. 60-80-100 का चक्र (The 60-80-100 Cycle):
    • पहले अभ्यास 6 को 60 WPM की गति पर तब तक लिखें जब तक कि एक भी शब्द न छूटे।
    • फिर उसी गद्यांश को 80 WPM पर लिखें। यहाँ कुछ शब्द छूटेंगे, उन्हें चिह्नित करें।
    • अंत में 100 WPM पर प्रयास करें। यह आपके हाथ की जकड़न खोलेगा। इसके बाद जब आप वापस 80 पर आएंगे, तो आपको वह बहुत धीमा और आसान लगेगा।
  2. वैज्ञानिक रिकॉर्डिंग विधि:
    • स्वयं की आवाज में डिक्टेशन रिकॉर्ड करें। रिकॉर्डिंग करते समय शब्दों के बीच के विराम (Pause) का ध्यान रखें।
    • हेडफोन का प्रयोग अनिवार्य है क्योंकि यह वक्ता की ‘प’ और ‘ब’ जैसी मिलती-जुलती ध्वनियों के अंतर को स्पष्ट करता है।
  3. परीक्षा हॉल का वातावरण (Exam Hall Psychology):
    • घर पर बिल्कुल सन्नाटे में अभ्यास न करें। पंखे की आवाज या हल्की बातचीत के बीच लिखने का अभ्यास करें। परीक्षा हॉल में 100-200 छात्र एक साथ पेंसिल चलाते हैं, जिसका शोर (Scritch-scratch) आपको विचलित कर सकता है।
  4. पेंसिल बनाम पेन:
    • प्रारंभिक अवस्था में ‘अप्सरा स्टेनो पेंसिल’ का ही प्रयोग करें। इसकी ग्रिप और लेड का लचीलापन आउटलाइन को गाढ़ा-हल्का (Light/Dark) बनाने में मदद करता है।

8. निष्कर्ष और आगामी लक्ष्य (Conclusion & Next Steps)

आज ‘डे 35: अभ्यास 6’ के माध्यम से आपने हिंदी स्टेनोग्राफी के उस स्तर को स्पर्श किया है जहाँ से पेशेवर करियर की शुरुआत होती है। ‘माननीय सभापति महोदय’ से लेकर ‘स्वास्थ्य केंद्र’ तक के शब्दों का जो अभ्यास आपने आज किया है, वह केवल शब्द नहीं बल्कि आपकी सफलता के ईंट-पत्थर हैं।

छात्रों के लिए आज का कार्य:

  • प्रत्येक वाक्यांश (जैसे ‘होना चाहिए’, ‘के बारे में’) को कम से कम 2 पेज भर कर लिखें।
  • अपनी typing practice को नजरअंदाज न करें; स्टेनो के हर घंटे के अभ्यास के पीछे 20 मिनट की टाइपिंग जरूर करें।

अगले लेक्चर (Day 36) में हम ‘अभ्यास 7’ की ओर बढ़ेंगे, जहाँ हम और भी अधिक जटिल कानूनी शब्दावली (Legal Terminology) को डिकोड करेंगे। याद रखें, एक कुशल स्टेनोग्राफर वह नहीं जो सबसे तेज लिखता है, बल्कि वह है जिसकी लिखी हुई आउटलाइन कोई भी दूसरा स्टेनो पढ़ सके। निरंतर अभ्यास ही श्रेष्ठता का मार्ग है। कल फिर मिलते हैं एक नए उत्साह के साथ।

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