Circle Hindi Shorthand (स और ज का व्रत) – Day 8

Circle Hindi Shorthand (स और ज का व्रत) - Day 8

हमारी 85 दिवसीय हिंदी स्टेनोग्राफी (Hindi Shorthand) की इस गहन प्रशिक्षण यात्रा के 8वें दिन में आपका हृदय से स्वागत है। Circle Hindi Shorthand (स और ज का व्रत), यदि आपने पिछले सात दिनों के अभ्यासों, विशेषकर व्यंजनों के रेखाचित्रों और उनके मिलान की ईमानदारी से प्रैक्टिस की है, तो आज की कक्षा आपके लिए मील का पत्थर साबित होने वाली है।

आशुलिपि के इस पड़ाव पर हम एक ऐसी तकनीक सीखने जा रहे हैं जो आपकी लिखने की गति को रातों-रात दोगुना कर सकती है। स्टेनोग्राफी का मुख्य सिद्धांत है, “न्यूनतम प्रयास, अधिकतम आउटपुट”। जिस प्रकार कंप्यूटर पर टाइपिंग या टंकण सीखते समय हम अपनी उंगलियों को कीबोर्ड के ‘होम रो’ पर सेट करते हैं ताकि गति बढ़ सके, ठीक वैसे ही शॉर्टहैंड में हम शब्दों को संक्षिप्त करने के लिए ‘आंकड़ों’ और ‘व्रतों’ (Circles) का सहारा लेते हैं।

आज का विषय “स” और “ज” का व्रत है। अब तक आप “स” और “ज” के लिए पूरे व्यंजनों का उपयोग करते आ रहे थे, जो लंबी रेखाएँ होती हैं। लेकिन आज से आप सीखेंगे कि कैसे एक नन्हा सा गोला इन भारी-भरकम व्यंजनों की जगह ले सकता है। यह न केवल आपकी गति बढ़ाएगा बल्कि आपके हाथ के प्रवाह को भी निरंतरता प्रदान करेगा। यह कक्षा तकनीकी दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए प्रत्येक नियम को ध्यान से समझें और उसके पीछे के वैज्ञानिक तर्क को आत्मसात करें।

1. स, ष, श और ज के लिए ‘व्रत’ (Circle) की अवधारणा

हिंदी आशुलिपि में ‘व्रत’ का अर्थ एक छोटा, सूक्ष्म गोला होता है। यह गोला दिखने में साधारण है, लेकिन इसकी कार्यक्षमता अत्यंत व्यापक है।

  • ध्वन्यात्मक प्रतिनिधित्व: यह छोटा व्रत हिंदी वर्णमाला के तीनों ‘स’ (स, ष, श) और ‘ज’ की ध्वनि को व्यक्त करता है। छात्र अक्सर भ्रमित होते हैं कि एक ही गोले से ‘स’ और ‘ज’ की पहचान कैसे होगी? इसका उत्तर है, ‘संदर्भ’ (Context)। जब आप डिक्टेशन के बाद अनुवाद करते हैं, तो वाक्य की बनावट आपको स्वयं बता देती है कि वहाँ “राज” पढ़ना है या “रास”।
  • स्थान और पठन का क्रम: यह व्रत किसी व्यंजन के प्रारंभ, मध्य या अंत में आ सकता है।
    • यदि यह प्रारंभ में है, तो पहले व्रत की ध्वनि (‘स’ या ‘ज’) पढ़ी जाएगी, फिर व्यंजन।
    • यदि यह अंत में है, तो पहले मुख्य व्यंजन पढ़ा जाएगा और अंत में व्रत की ध्वनि।
  • आकार का महत्व: यह व्रत हमेशा व्यंजन की लंबाई के अनुपात में बहुत छोटा रखा जाता है। इसे बड़ा बनाने पर यह अन्य संकेतों (जैसे ‘स्व’ का बड़ा गोला) से भ्रमित कर सकता है।
  • लेखन का प्रवाह: यह व्रत आपकी पेंसिल को बिना उठाए अगले व्यंजन तक पहुँचने में मदद करता है, जो Shorthand की सबसे बड़ी विशेषता है।

2. नियम 1: सरल रेखाएँ और घड़ी की विपरीत दिशा (The Anti-Clockwise Rule)

सरल रेखा वाले व्यंजनों (जैसे क-वर्ग, च-वर्ग, ट-वर्ग, त-वर्ग का सीधा रूप, प-वर्ग, य, र, व, ह) के साथ ‘स’ का व्रत लगाने का एक बहुत ही स्पष्ट और अनिवार्य नियम है। इसे हमेशा “घड़ी की सुई की उल्टी दिशा” (Anti-Clockwise Direction) में ही बनाया जाना चाहिए।

इस दिशा का वैज्ञानिक कारण (Expert Insight)

शॉर्टहैंड में दिशा का चयन केवल सुविधानुसार नहीं किया गया है। हमारे प्रशिक्षक के अनुसार, यदि आप आज ‘स’ के गोले को घड़ी की दिशा (Clockwise) में बनाना शुरू कर देंगे, तो आगे चलकर आप गंभीर संकट में पड़ सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि स्टेनोग्राफी के उन्नत नियमों में ‘घड़ी की दिशा’ में लगने वाले हुक और गोले ‘र’ और ‘ल’ जैसे अन्य व्यंजनों के लिए आरक्षित होते हैं। इसलिए, अपने हाथ को शुरू से ही एंटी-क्लॉकवाइज दिशा के लिए प्रशिक्षित करें।

नियम अनुप्रयोग विस्तृत तालिका:

शब्द (Hindi)व्यंजन + व्रत की स्थितिलेखन निर्देश (Mechanics)
सकस (व्रत) + कक के प्रारंभ में ऊपर की ओर से घूमता हुआ व्रत।
कसक + स (व्रत)क के अंत में ऊपर की ओर मुड़ता हुआ एंटी-क्लॉकवाइज गोला।
जसज + स (व्रत)ज व्यंजन की ढलान के अंत में बाईं ओर से मुड़ता गोला।
सजस (व्रत) + जज के प्रारंभ में छोटा गोला, फिर नीचे की ओर ज।
पसप + स (व्रत)प के अंत में दाईं ओर से ऊपर की ओर मुड़ता गोला।
सटस (व्रत) + टट के प्रारंभ में बाईं ओर से शुरू होकर नीचे की ओर।
बसब + स (व्रत)ब के अंत में एंटी-क्लॉकवाइज दिशा में छोटा गोला।
खसख + स (व्रत)ख के अंत में गोला, बीच में ख को काटने का निशान।
सयस (व्रत) + यय के हुक के साथ स का सामंजस्य।
सड़स (व्रत) + ड़ड़ के प्रारंभ में व्रत, ड़ को काटते हुए।

सामान्य गलती: छात्र अक्सर ‘कस’ लिखते समय गोले को नीचे की ओर घुमा देते हैं। ध्यान रखें, ‘क’ रेखा के ऊपर की ओर घूमना ही एंटी-क्लॉकवाइज है।

3. नियम 2: वक्र रेखाएँ (Curved Strokes) – आंतरिक प्रवाह का नियम

जब हम वक्र रेखाओं (जैसे त-वर्ग का वक्र रूप, म, न, ल, र का वक्र रूप, श) की बात करते हैं, तो एंटी-क्लॉकवाइज वाला नियम गौण हो जाता है और “आंतरिक संरचना” का नियम प्राथमिक हो जाता है।

स्पष्ट निर्देश: सभी वक्र व्यंजनों में ‘स’ या ‘ज’ का व्रत हमेशा “अंदर की ओर” (Inside the curve) लगाया जाता है।

हाथ का संतुलन (Hand Ergonomics)

वक्र रेखाओं के बाहर गोला बनाना न केवल कठिन है, बल्कि इससे शब्द की आकृति भी अस्पष्ट हो जाती है। जब आप पेंसिल को वक्र के अंदर घुमाते हैं, तो गति बनी रहती है।

अभ्यास के उदाहरण:

  1. दस: ‘द’ के गहरे वक्र के भीतर अंत में छोटा गोला।
  2. धस: ‘ध’ के अंदर की तरफ अंत में व्रत, ‘ध’ को काटते हुए।
  3. सन: ‘न’ के प्रारंभ में, वक्र के भीतरी हिस्से में गोला।
  4. नस: ‘न’ के अंत में, वक्र के अंदर की ओर मुड़ता हुआ व्रत।
  5. लस: ‘ल’ व्यंजन (नीचे से ऊपर) के अंत में अंदर की ओर गोला।
  6. सल: ‘ल’ के प्रारंभ में अंदर की ओर व्रत।
  7. मस: ‘म’ के अंत में अंदर की ओर छोटा गोला।
  8. सथ: ‘स’ का व्रत शुरू में, फिर ‘थ’ का वक्र।

4. नियम 3: दो व्यंजनों के बीच व्रत का प्रयोग (Medial Circle)

व्रत का प्रयोग केवल शब्दों की सीमा (प्रारंभ या अंत) तक सीमित नहीं है। यह दो व्यंजनों के बीच एक ‘पुल’ (Bridge) का कार्य करता है। जब ‘स’ की ध्वनि दो व्यंजनों के मध्य आती है, तो व्रत को इस तरह जोड़ा जाता है कि पेंसिल का प्रवाह न टूटे।

मध्यवर्ती व्रत के उदाहरण और विश्लेषण:

  • कसक: ‘क’ बनाइए, बिना पेंसिल उठाए ऊपर की ओर ‘स’ का गोला घुमाइए और वहीं से दूसरा ‘क’ निकालिए।
  • नसन: ‘न’ के अंदर ‘स’ का गोला और तुरंत दूसरा ‘न’।
  • मसन: ‘म’ के भीतर ‘स’ का गोला और फिर ‘न’।
  • टसट: ‘ट’ के अंत में गोला और फिर नीचे की ओर दूसरा ‘ट’।
  • पसम: ‘प’ के अंत में ‘स’ का गोला और उसे जोड़ते हुए ‘म’।
  • रसम: ‘र’ (नीचे से ऊपर) के अंत में ‘स’ का गोला और ‘म’।
  • कसन: ‘क’ के ऊपर ‘स’ का गोला और ‘न’।

विशेष नोट: मध्य में व्रत लगाते समय ध्यान रखें कि गोला बहुत बड़ा न हो जाए, वरना वह अगले व्यंजन की दिशा को प्रभावित कर सकता है।

Circle Hindi Shorthand (स और ज का व्रत) - Day 8
Circle Hindi Shorthand (स और ज का व्रत) – Day 8

5. नियम 4: कोण का नियम (The Angle Rule – Outside Placement)

यह एक तकनीकी नियम है जो आपकी लिखावट की स्पष्टता सुनिश्चित करता है। जब दो व्यंजन मिलते हैं और उनके जोड़ पर एक स्पष्ट कोण (Angle) बनता है, और उसी जोड़ पर ‘स’ का व्रत लगाना हो, तो व्रत हमेशा कोण के “बाहर की दिशा” (Outside) में बनाया जाता है।

क्यों आवश्यक है?

यदि आप व्रत को कोण के अंदर बनाएंगे, तो दोनों व्यंजन आपस में घुल-मिल जाएंगे और आप यह नहीं पहचान पाएंगे कि पहला व्यंजन कहाँ खत्म हुआ और दूसरा कहाँ शुरू हुआ।

कोण के बाहर व्रत के उदाहरण:

  • टसक (Tasak): ‘ट’ नीचे आया, ‘क’ दाईं ओर गया। इनके बीच बने कोण के बाहर स का व्रत। (ध्यान दें: पिछली कक्षा की त्रुटि ‘टक’ को यहाँ ‘टसक’ के रूप में सुधारें)।
  • चसक: ‘च’ और ‘क’ के जोड़ पर बाहर की तरफ व्रत।
  • रसक: ‘र’ और ‘क’ के बीच के कोण के बाहर व्रत।
  • पसक: ‘प’ और ‘क’ के जोड़ पर बाहरी दिशा में व्रत।
  • दर्शक: ‘द’, ‘र’, और ‘क’ के बीच ‘स’ का व्रत बाहर की ओर।
  • फसल: ‘फ’ और ‘ल’ के बीच बनने वाले कोण पर बाहर की ओर व्रत।
  • चश्मा: ‘च’ और ‘म’ के बीच ‘श’ का व्रत कोण के बाहरी हिस्से में।

6. नियम 5: अंत में स्वर (Vowels) और व्रत का विशेष प्रयोग

एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है: यदि शब्द के अंत में ‘स’ पर कोई मात्रा हो (जैसे ‘पड़ोसी’ में ‘सी’), तो क्या करें?

विशेषज्ञ समाधान:

  1. टिक विधि (Tick Method): व्रत खत्म करने के बाद एक छोटी सी रेखा (Tick) बाहर की ओर निकाल दें, जो स्वर की उपस्थिति को दर्शाती है।
  2. पूर्ण व्यंजन विधि: यदि मात्रा बहुत महत्वपूर्ण है, तो व्रत के बजाय ‘स’ का पूरा व्यंजन बनाएँ।
    • उदाहरण: ‘पड़ोसी’ लिखते समय ‘प’, ‘ड़’ और अंत में ‘स’ का पूरा व्यंजन ‘ई’ की मात्रा के साथ।
    • परसों/नरसों: यहाँ भी अंत में ‘स’ को खोलना या टिक लगाना श्रेयस्कर है ताकि ‘परस’ और ‘परसों’ में अंतर किया जा सके।

7. मात्रा स्थानांतरण का नियम (Third-Place Vowel Transfer)

जब ‘स’ के व्रत वाले शब्दों में तीसरे स्थान की मात्राएँ (जैसे ई, उ) आती हैं, तो वे अगले व्यंजन के पूर्ववर्ती तीसरे स्थान पर स्थानांतरित हो जाती हैं।

उदाहरण:

  • मिसाल: यहाँ ‘म’ पर ‘इ’ की मात्रा है। इसे ‘स’ के व्रत के बाद आने वाले ‘ल’ व्यंजन के पहले (Before) तीसरे स्थान पर लगाया जाएगा।
  • किशन/किसान: ‘क’ की ‘इ’ की मात्रा ‘न’ के पहले तीसरे स्थान पर जाएगी।

प्रो-टिप: जैसे-जैसे आप प्रोफ़ेशनल बनेंगे, आपको ‘किसान’ और ‘किशन’ में अंतर करने के लिए मात्रा की आवश्यकता नहीं पड़ेगी; आप वाक्य के संदर्भ से इसे पहचान लेंगे।

8. व्यापक अभ्यास शब्दावली (Multi-Column Practice Table)

इन शब्दों को अपनी नोटबुक में प्रत्येक को कम से कम 5 पंक्तियों में लिखें।

शब्दसंरचना विश्लेषणमात्रा निर्देशगति टिप
रेशमर + स (व्रत) + मर पर ‘ए’ की मात्राप्रवाह बनाए रखें
बेसनब + स (व्रत) + नब पर ‘ए’ की मात्रापेंसिल न उठाएं
दशकद + स (व्रत) + ककोई मात्रा नहींकोण का ध्यान रखें
हंसह + स (व्रत)ह के साथ न का आभासछोटा गोला
सरलस (व्रत) + र + लसरल रेखा प्रवाहगति के साथ लिखें
विशालव + स (व्रत) + लव पर ‘इ’ (ट्रांसफर)ल को ऊपर ले जाएं
धर्मेशध + र + म + श (व्रत)म पर ‘ए’ की मात्राध को काटें
सुरेशस (व्रत) + र + श (व्रत)स पर ‘उ’ की मात्रादो व्रत का प्रयोग
दिनेशद + न + श (व्रत)न पर ‘ए’ की मात्राद को गहरा रखें
दुश्मनद + श (व्रत) + म + नद पर ‘उ’ की मात्राम-न का जोड़
निराशान + र + श (व्रत + टिक)र पर ‘आ’ की मात्राअंत में टिक लगाएं
हौसलाह + स (व्रत) + लह पर ‘औ’, ल पर ‘आ’स्पष्ट आकृति
जसनज + स (व्रत) + नज और न का मेलज गहरा बनाएँ
कसमक + स (व्रत) + मसीधी रेखासरल जोड़

9. व्यावहारिक अनुप्रयोग के लिए महत्वपूर्ण वाक्य

इन वाक्यों का अभ्यास आपकी ‘रीडिंग’ और ‘राइटिंग’ दोनों क्षमताओं को विकसित करेगा।

  1. किसान की सब फसल नास हो गई। (यहाँ ‘सब’ और ‘नास’ में व्रत का प्रयोग करें)
  2. सब्जी सस्ती है। (‘सब्जी’ में ‘स’ का व्रत ‘ब’ के प्रारंभ में)
  3. सब लोग संगीत सुनते हैं। (‘संगीत’ और ‘सुनते’ में व्रत का प्रयोग)
  4. सभी साथ में नाश्ता करते हैं। (‘नाश्ता’ में ‘श’ का व्रत मध्य में)
  5. संसार के सभी लोग खुश हैं। (‘संसार’ में दो बार व्रत का प्रयोग संभव है)
  6. सब साथ-साथ रहते हैं।

विशेष शॉर्टकट: वाक्य संख्या 6 में ‘साथ-साथ’ शब्द आया है। स्टेनोग्राफी में जब कोई शब्द लगातार दो बार आए, तो उसे दोबारा लिखने के बजाय उसके पास एक छोटा ‘2’ का अंक बना दें। यह समय बचाने की एक बेहतरीन तकनीक है।

10. स्टेनोग्राफी महारत के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शिका (The Mastery Roadmap)

एक विशेषज्ञ प्रशिक्षक के रूप में, मैं आपको ये तीन स्वर्ण नियम अपनाने की सलाह देता हूँ:

  1. पुनरावृत्ति की शक्ति (Power of Repetition): आशुलिपि ज्ञान से नहीं, मांसपेशियों की स्मृति (Muscle Memory) से आती है। प्रत्येक नियम को कम से कम 50 बार अभ्यास करें। ‘सक’ और ‘कस’ के अंतर को हाथ को रटा दें।
  2. पठन अभ्यास (The Reading Drill): लिखने के बाद अपनी ही शॉर्टहैंड को हिंदी में अनुवाद करने का प्रयास करें। यदि आप 1 मिनट में लिखा हुआ 2 मिनट में पढ़ पा रहे हैं, तो आप प्रगति कर रहे हैं।
  3. हल्का स्पर्श (Light Touch): व्रत बनाते समय पेंसिल पर अत्यधिक दबाव न डालें। व्रत जितना हल्का और छोटा होगा, आपकी गति उतनी ही तीव्र होगी।

also read: Diphthongs (द्वैध्वनिक मात्राएं का प्रयोग और नियम) – Day 7

11. निष्कर्ष और आपका गृहकार्य (Homework)

आज आपने ‘स’ और ‘ज’ के व्रत के माध्यम से स्टेनोग्राफी की दुनिया में एक बड़ी छलांग लगाई है। यह व्रत आपकी गति बढ़ाने का सबसे पहला और प्रभावी हथियार है। याद रखें, आज का अभ्यास मुख्य रूप से ‘स’ की ध्वनियों पर केंद्रित था। कल की कक्षा (Day 9) में हम इसी व्रत का उपयोग करते हुए ‘ज’ के विशिष्ट शब्दों और कठिन संयोजनों का अभ्यास करेंगे।

आज का असाइनमेंट:

  • ऊपर दी गई शब्दावली तालिका को 5 बार लिखें।
  • दिए गए 6 वाक्यों को एक पूरे पेज पर अभ्यास करें।
  • शॉर्टहैंड के इतिहास और इसकी विविध प्रणालियों को समझने के लिए Shorthand विकिपीडिया पेज पर अवश्य जाएँ।

अपनी टाइपिंग प्रैक्टिस जारी रखें और निरंतरता बनाए रखें। कल मिलते हैं ‘ज’ के विशेष अभ्यास के साथ। शुभकामनाएँ!

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