आज के इस आर्टिकल (Hindi Stenography – हिंदी आशुलिपि) में हम तीन दिनों का कोर्स कम्पलीट करेंगे लेक्चर 13 से लेक्चर 15 तक क्योकि ये लगभर एक जैसे है बस थोड़ा बहुत अंतर है तो सभी का अभयास एक साथ करना सरल रहेगा और समय भी बचेगा।
LEC 13 – हिंदी स्टेनोग्राफी Day 13: ‘ल’ के आंकड़े का संपूर्ण ज्ञान
हिंदी स्टेनोग्राफी के इस 85 दिवसीय निशुल्क मास्टरक्लास में आप सभी का पुनः हार्दिक स्वागत है। आज हमारे इस कठिन लेकिन रोमांचक सफर का 13वां दिन (Day 13) है। अब तक हमने स्टेनोग्राफी की वर्णमाला, मात्राओं के सूक्ष्म प्रयोग और पिछले पाठ में ‘र’ के आंकड़े की बारीकियों को सफलतापूर्वक सीखा है।
यदि आपने ‘र’ के आंकड़े का अभ्यास पूरी निष्ठा से किया है, तो आज का पाठ आपके लिए अत्यंत सरल और आनंददायक होने वाला है। आज का हमारा मुख्य विषय है, ‘ल’ का आंकड़ा (L-Hook)। स्टेनोग्राफी की दुनिया में ‘ल’ का आंकड़ा आपकी गति को रॉकेट की तरह बढ़ाने वाला एक जादुई औजार है। यह नियम न केवल आपके लेखन की लंबाई को कम करेगा, बल्कि आपकी पेंसिल के प्रवाह (Flow) को भी एक नई दिशा प्रदान करेगा। एक वरिष्ठ प्रशिक्षक के रूप में, मेरा यह अनुभव रहा है कि जो छात्र ‘र’ और ‘ल’ के आंकड़ों के अंतर को बारीकी से समझ लेते हैं, वे ही 100+ शब्द प्रति मिनट (WPM) की गति को प्राप्त करने में सक्षम होते हैं। तो चलिए, अपनी नोटबुक और पेंसिल उठा लीजिए और इस महत्वपूर्ण अध्याय की गहराइयों में उतरते हैं।
‘ल’ का आंकड़ा: मूल सिद्धांत और सूक्ष्म नियम (Fundamental Rules & Mechanics)
‘ल’ का आंकड़ा क्या है? सरल शब्दों में कहें तो यह व्यंजन के साथ ‘ल’ की ध्वनि को जोड़ने का एक संक्षिप्त तरीका है। लेकिन इसे लगाने की तकनीक में ही इसकी असली शक्ति छिपी है।
नियम 1: स्थान और सटीक दिशा (The Geometry of the Hook)
‘ल’ का आंकड़ा हमेशा व्यंजन के प्रारंभ (Start) में लगाया जाता है। अब यहाँ सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी बिंदु आता है: इसकी दिशा। हमने सीखा था कि ‘र’ का आंकड़ा घड़ी की सुई की दिशा (Clockwise) में लगता है, लेकिन ‘ल’ का आंकड़ा हमेशा ‘घड़ी की सुई की उल्टी दिशा’ (Anti-clockwise) में लगाया जाता है।
शिक्षक की सलाह: इसे लिखते समय अपने हाथ के दबाव और कलाई के घुमाव को महसूस करें। जब आप हाथ को बाईं ओर से घुमाकर (Anti-clockwise) ऊपर या नीचे ले जाते हैं, तो वह ‘ल’ की ध्वनि पैदा करता है। यह मनोवैज्ञानिक रूप से भी महत्वपूर्ण है कि आप शुरुआत से ही इन दोनों दिशाओं के बीच एक स्पष्ट मानसिक रेखा खींच लें।
नियम 2: ध्वनि और पठन का क्रम (Reading Sequence)
एक आम गलती जो छात्र अक्सर करते हैं, वह यह है कि वे आंकड़े को व्यंजन के शुरू में देखकर उसे पहले पढ़ लेते हैं। याद रखें, ‘ल’ का आंकड़ा भले ही व्यंजन के शुरू में लगाया जाता है, लेकिन इसकी ध्वनि हमेशा व्यंजन के बाद ही पढ़ी जाएगी।
- उदाहरण के लिए: यदि आप ‘क’ में ‘ल’ का हुक लगाते हैं, तो उसे ‘लक’ नहीं, बल्कि ‘कल’ पढ़ा जाएगा।
नियम 3: निषेध और अपवाद (The Non-Negotiable Exceptions)
स्टेनोग्राफी में हर नियम के कुछ अपवाद होते हैं, और ये अपवाद ही स्पष्टता (Legibility) बनाए रखते हैं। सोर्स कॉन्टेक्स्ट के अनुसार, ‘ल’ का आंकड़ा निम्नलिखित व्यंजनों में कभी नहीं लगाया जाता:
- य, व, र और ह कारण: इन व्यंजनों की अपनी प्राकृतिक बनावट ऐसी होती है जिनमें पहले से ही छोटे वृत्त (Circles) या हुक मौजूद होते हैं। यदि हम इनमें ‘ल’ का आंकड़ा जोड़ने का प्रयास करेंगे, तो आउटलाइन इतनी जटिल हो जाएगी कि उसे पढ़ना असंभव होगा। इससे आपकी गति बढ़ने के बजाय धीमी हो जाएगी। एक गुरु के रूप में मैं आपको सलाह देता हूँ कि इन वर्णों में ‘ल’ को हमेशा पूरा ही लिखें।
नियम 4: शब्दों के मध्य में प्रयोग (Hooks in the Middle)
‘ल’ का आंकड़ा केवल शब्दों के आरंभ में ही सीमित नहीं है। यह दो व्यंजनों के संधि स्थल (Joining point) पर भी बहुत खूबसूरती से काम करता है। जब हम दो व्यंजनों को जोड़ते हैं, तो दूसरे व्यंजन की शुरुआत में ‘ल’ का हुक लगाकर हम पूरे शब्द को एक ही झटके में लिख सकते हैं।
तुलनात्मक विश्लेषण: ‘र’ बनाम ‘ल’ का आंकड़ा (The Ultimate Comparison)
इन दोनों हुक्स के बीच का सूक्ष्म अंतर ही एक औसत छात्र और एक विशेषज्ञ के बीच की दूरी तय करता है। आइए इस तालिका के माध्यम से इसे स्पष्ट करते हैं:
| विशेषता | ‘र’ का आंकड़ा (R-Hook) | ‘ल’ का आंकड़ा (L-Hook) | हाथ का प्रवाह (Hand Flow) |
| प्रारंभिक स्थान | व्यंजन के शुरू में | व्यंजन के शुरू में | समान प्रारंभिक बिंदु |
| घूर्णन दिशा | घड़ी की सुई की दिशा (Clockwise) | घड़ी की सुई की उल्टी दिशा (Anti-clockwise) | विपरीत दिशाएं (Opposite Directions) |
| पढ़ने का क्रम | व्यंजन + र | व्यंजन + ल | व्यंजन के बाद ध्वनि |
| मुख्य उदाहरण 1 | कर (दाहिने से घुमाव) | कल (बाएं से घुमाव) | ‘कल’ में हाथ बाईं ओर खिंचता है |
| मुख्य उदाहरण 2 | पर (ऊपर से दाहिने) | पल (ऊपर से बाएं) | ‘पल’ में हुक अंदर की तरफ मुड़ता है |
सरल व्यंजनों (Straight Strokes) में ‘ल’ का प्रयोग: विस्तृत अभ्यास
सरल व्यंजन (जैसे क, च, ट, प वर्ग) में ‘ल’ का आंकड़ा लगाना सबसे आसान है क्योंकि यहाँ कोण (Angle) बिल्कुल स्पष्ट होता है। यहाँ आपको बस अपनी कलाई को ‘एंटी-क्लॉकवाइज’ झटका देना है।
1. क-वर्ग (Horizontal Strokes)
- कल: ‘क’ की सीधी रेखा शुरू करने से पहले एक छोटा सा हुक बाईं ओर से घुमाकर ऊपर की ओर लाएं। यह ‘कल’ बनेगा। तुलना करें: यदि यही हुक नीचे की ओर से आता, तो वह ‘कर’ होता।
- खल, गल, घल: इनमें भी वही सिद्धांत लागू होगा। ‘खल’ में बीच का कट बाद में लगाएं। ‘गल’ को गहरा (Dark) रखें और ‘घल’ को गहरा और कटा हुआ।
2. च-वर्ग (Downward Slanting)
- चल: ‘च’ ऊपर से नीचे आता है। इसके शुरू में अंदर की तरफ (बाएं) एक छोटा हुक दें। अभ्यास करें: ‘चल-चर’, ‘चल-चर’। महसूस करें कि ‘चल’ लिखते समय हाथ अंदर की ओर सिकुड़ता है।
- छल, जल, झल: ‘जल’ लिखते समय रेखा को गहरा करना न भूलें।
3. प-वर्ग (Downward Strokes)
- पल: ‘प’ के शीर्ष पर बाईं ओर से हुक लगाएं। यह एक पतंग की डोर की तरह दिखना चाहिए जो बाईं ओर मुड़ी हो।
- फल, बल, भल: ‘बल’ की आउटलाइन गहरी होगी। ‘फल’ में हल्का कट लगेगा।
4. ट-वर्ग (Vertical Downward)
- टल: ‘ट’ एकदम सीधा 90 डिग्री पर आता है। इसके शीर्ष पर बाईं ओर का हुक ‘टल’ कहलाएगा।
- ठल, डल, ढल: इनका अभ्यास करते समय ध्यान रखें कि हुक का आकार बहुत बड़ा न हो जाए, वरना वह अगले नियम (वक्र व्यंजन) के साथ भ्रम पैदा कर सकता है।
वक्र व्यंजनों (Curved Strokes) में ‘ल’ का प्रयोग: “खुला हुक” सिद्धांत
वक्र व्यंजनों (त, स, म, न) में ‘र’ और ‘ल’ दोनों आंकड़े वक्र के अंदर की तरफ ही लगते हैं। अब आप पूछेंगे कि गुरु जी, फिर हम इनमें अंतर कैसे करेंगे?
सोर्स कॉन्टेक्स्ट के अनुसार महत्वपूर्ण निर्देश: वक्र व्यंजनों में ‘र’ का हुक छोटा और संकरा होता है, जबकि ‘ल’ का आंकड़ा ‘र’ के मुकाबले थोड़ा बड़ा और “थोड़ा खुला हुआ” (Gaping/Open) बनाया जाता है। यह सूक्ष्म अंतर आपकी आँखों को यह पहचानने में मदद करेगा कि आप ‘मल’ पढ़ रहे हैं या ‘मर’।
- दल, थल, तल: ‘त’ वर्ग की आउटलाइन में एक बड़ा और खुला हुआ हुक लगाएं। (तुलना: ‘दर’ में यह हुक बहुत छोटा और सटा हुआ होता है)।
- सल: ‘स’ के अंदर एक बड़ा घुमावदार हुक।
- मल (Mal): ‘म’ के आरंभ में हुक को थोड़ा फैलाकर (Wide) लगाएं। यदि आप इसे छोटा कर देंगे, तो यह ‘मर’ पढ़ा जाएगा।
- नल (Nal): ‘न’ के वक्र में बड़ा हुक। यह एक छोटी प्याली जैसा दिखना चाहिए।
- लल (Lal): ‘ल’ व्यंजन में ही ‘ल’ का आंकड़ा। (हालांकि इसका प्रयोग कम होता है, पर अभ्यास अनिवार्य है)।
दो व्यंजनों के बीच ‘ल’ का आंकड़ा: प्रवाह और गति (Hooks Between Consonants)
जब हम शब्दों को जोड़ते हैं, तो हाथ का प्रवाह टूटना नहीं चाहिए। बीच में हुक लगाने का अर्थ है कि आपने पेंसिल उठाए बिना दो या तीन अक्षरों को जोड़ दिया है।
- गकल (Gakal): ‘ग’ की सीधी रेखा और बिना रुके ‘क’ में ‘ल’ का हुक जोड़ते हुए आगे बढ़ें।
- पचल (Pachal): ‘प’ बनायें और उसके अंत से ही ‘च’ के लिए ‘ल’ वाला हुक मोड़ दें।
- सजल, सगल, सगर: ‘सजल’ में ‘स’ के बाद ‘ज’ में ‘ल’ का हुक। ध्यान दें कि ‘सगर’ में हुक की दिशा बदल जाएगी।
- बचल (Bachal) और चमल (Chamal): यहाँ वक्र और सरल रेखाओं का मेल है। ‘चमल’ में ‘म’ का हुक थोड़ा खुला रखें।
- सतलज (Satlaj): ‘स’ के बाद ‘त’ में ‘ल’ का आंकड़ा और अंत में ‘ज’। यह एक लंबी और सुंदर आउटलाइन बनेगी।
- कलकल (Kal-Kal): ‘क-ल’ और फिर तुरंत ‘क-ल’। इसे दो बार लिखने के बजाय स्टेनोग्राफी में कभी-कभी ‘s’ मार्क (रिपीटीशन) भी लगाया जाता है, लेकिन अभी आप पूरा हुक लगाकर अभ्यास करें।
- जमकल (Jamkal): ‘ज’, ‘म’ और फिर ‘क’ में ‘ल’ का आंकड़ा। यहाँ ‘म’ से ‘क’ पर जाते समय हुक का कोण स्पष्ट होना चाहिए।
सर्वश्रेष्ठ अभ्यास पद्धति: ‘चार हुक’ ड्रिल (The Master 4-Hook Drill)
मेरे प्यारे शिष्यों, यह इस पूरे कोर्स का सबसे महत्वपूर्ण अभ्यास है। यदि आपने इस ड्रिल पर महारत हासिल कर ली, तो दुनिया का कोई भी शब्द आपकी गति नहीं रोक पाएगा। इस ड्रिल में हम एक ही व्यंजन पर अब तक सीखे गए चारों हुक (र, ल, न, त) का प्रयोग करते हैं।
उदाहरण: ‘क’ व्यंजन के साथ ‘महा-अभ्यास’
- कर (Kar): व्यंजन के शुरू में, घड़ी की दिशा (Clockwise) में हुक।
- कल (Kal): व्यंजन के शुरू में, घड़ी की उल्टी दिशा (Anti-clockwise) में हुक।
- कन (Kan): व्यंजन के अंत में हुक।
- कत (Kat): व्यंजन के अंत में, विपरीत दिशा में हुक।
अभ्यास चार्ट (हर छात्र को इसे 10-10 बार बनाना है):
- प-वर्ग: पर, पल, पन, पत।
- च-वर्ग: चर, चल, चन, चत।
- ग-वर्ग: गर, गल, गन, गत।
मनोवैज्ञानिक टिप: जब आप ‘कर’ लिखें, तो मन में बोलें “सीधा र”। जब ‘कल’ लिखें, तो बोलें “उल्टा ल”। इससे आपका मस्तिष्क और उंगलियां एक तालमेल में आ जाएंगी। इसे तब तक करें जब तक कि आपका हाथ बिना सोचे सही दिशा में न मुड़ने लगे।
वाक्य अभ्यास: व्यावहारिक अनुप्रयोग (Sentence Practice Exercises)
अब इन आंकड़ों को वाक्यों में पिरोने का समय है। यहाँ दिए गए प्रत्येक वाक्य का विश्लेषण करें और अपनी नोटबुक में कम से कम 5 बार लिखें।
- पानी में कमल है। – गुरु मंत्र: ‘कमल’ लिखते समय ‘क’ के शुरू में ‘म’ के लिए जगह छोड़ें और ‘म’ में ‘ल’ का आंकड़ा लगाएं।
- पानी कल-कल करता है। – विशेष निर्देश: ‘करता’ लिखते समय सोर्स के अनुसार ‘त’ के आंकड़े को ‘खोल’ देना (त का पूरा व्यंजन बनाना) बेहतर होता है ताकि ‘आ’ की मात्रा स्पष्ट रूप से लग सके। हालांकि ‘क-र-ता’ (हुक के साथ) भी सही है, पर शुरुआती छात्रों के लिए ‘त’ खोलना सुरक्षित है।
- कलर पीला है। – नोट: ‘पीला’ में ‘ल’ का आंकड़ा प्रयोग करें (प+ल हुक + मात्रा)। हालांकि इसे पूरा भी लिखा जा सकता है, पर आज हमारा लक्ष्य आंकड़े का अभ्यास है।
- खिलाड़ी खेल खेलते हैं। – आउटलाइन विश्लेषण: ‘खिलाड़ी’ के लिए ‘ख’ में ‘ल’ का आंकड़ा लगाएं (ख-ल-ली) और फिर ‘ड़’ जोड़ें। ‘खेल’ और ‘खेलते’ में ‘ल’ के हुक का जादू देखें पेंसिल एक बार भी नहीं उठेगी!
- मुजरिम जेल में है। – नोट: ‘मुजरिम’ में ‘ज’ के वृत्त (Circle) का प्रयोग करें और ‘जेल’ में ‘ज’ के साथ ‘ल’ का हुक।
- नदी का सारा जल सूख गया। – विश्लेषण: ‘जल’ में ‘ज’ के शुरू में बाईं ओर का हुक।
- जल थल नीला है। – नोट: ‘थल’ एक वक्र व्यंजन (त-वर्ग) है, इसलिए यहाँ हुक को बड़ा और खुला रखना अनिवार्य है ताकि यह ‘थर’ न पढ़ा जाए।
विशेषज्ञ खंड: उपकरण और तकनीक
एक अनुभवी शिक्षक के नाते, मैं अक्सर छात्रों को उपकरणों के चुनाव में उलझते देखता हूँ।
पेंसिल बनाम पेन: शुरुआती 3-4 महीनों में केवल अटलांटिस या स्टेनो विशिष्ट पेंसिल का ही प्रयोग करें। पेंसिल आपको यह फीडबैक देती है कि आप रेखा पर कितना दबाव डाल रहे हैं। स्टेनोग्राफी में ‘हल्की’ और ‘गहरी’ रेखाओं का बहुत महत्व है (जैसे ‘प’ और ‘ब’)। पेन बहुत ज्यादा फिसलता है (Glide), जिससे शुरुआत में हाथ के नियंत्रण (Grip) में कमी आ सकती है। जब आप 80 WPM पार कर लें, तब ही पेन पर स्विच करें।
ज्ञान का विस्तार: आशुलिपि केवल एक लिपि नहीं, बल्कि एक विज्ञान है। इसके वैश्विक इतिहास और पिटमैन (Pitman) एवं अन्य प्रणालियों के बारे में अधिक जानने के लिए आप Wikipedia का संदर्भ ले सकते हैं।
Day 14 – प, ब, और ज के आंकड़े (Hooks) का प्रयोग और नियम
अब मैं आपको स्टेनोग्राफी के उस गुप्त हथियार से परिचित कराने जा रहा हूँ जो आपकी गति को 80 WPM की चुनौतीपूर्ण बाधा के पार ले जाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वह हथियार है ‘आंकड़े’ (Hooks)। स्टेनोग्राफी में जब हम अपनी पेंसिल की गति को तेज करना चाहते हैं, तो हमें बड़े व्यंजनों को सूक्ष्म संकेतों में बदलना सीखना होता है। आज हम प (P), ब (B), और ज (J) के आंकड़ों की बारीकियों को समझेंगे।
1. स्टेनोग्राफी में ‘आंकड़े’ (Hooks) का आधारभूत सिद्धांत
आंकड़े वास्तव में व्यंजनों के सिरों पर लगाए जाने वाले सूक्ष्म घुमाव होते हैं। इनका उद्देश्य एक ही स्ट्रोक में दो वर्णों की ध्वनि को समाहित करना है। यदि आप typingmasterpro.com के हमारे पिछले पाठों को याद करें, जहाँ हमने बुनियादी व्यंजनों की लंबाई और कोणों पर ध्यान दिया था, तो आज का पाठ उस नींव पर एक भव्य इमारत बनाने जैसा है।
याद रखें, एक कुशल स्टेनोग्राफर वह नहीं है जो बहुत तेज हाथ चलाता है, बल्कि वह है जो न्यूनतम पेंसिल मूवमेंट के साथ अधिकतम शब्द लिखता है। आंकड़े इसी ‘न्यूनतम मूवमेंट’ के सिद्धांत पर काम करते हैं।
2. प (P) का आंकड़ा: पहचान और दिशा
प (P) का आंकड़ा अंग्रेजी के बड़े अक्षर ‘B’ के आकार के समान होता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका लचीलापन है।
- बनावट के निर्देश: इसे लिखते समय पेंसिल को व्यंजन के प्रारंभ में थोड़ा घुमाकर ‘B’ जैसी आकृति बनाएं। इसे आप अपनी सुविधा (Comfort) के अनुसार किसी भी दिशा में घुमा सकते हैं, बशर्ते वह व्यंजन के साथ स्वाभाविक रूप से जुड़े।
- प्रमुख उदाहरणों की चरण-दर-चरण व्याख्या:
- पक: क-व्यंजन की क्षैतिज रेखा शुरू करने से ठीक पहले एक छोटा ‘B’ आकार का हुक ऊपर की ओर बनाएं।
- पर: र-व्यंजन (ऊपर जाने वाला) के प्रारंभ में बाएँ से दाएँ एक छोटा हुक लगाएं।
- पन: न-व्यंजन के शुरू में ही प का आंकड़ा जोड़कर पेंसिल को बिना उठाए ‘न’ की वक्र रेखा पूरी करें।
- पस: स-वृत्त के साथ प के हुक का समन्वय करें।
- पैसा: प का हुक और स का वृत्त, इसमें ‘ऐ’ और ‘आ’ की मात्राओं को हुक के सापेक्ष प्रथम और तृतीय स्थान पर लगाएं।
- पाठक: प का हुक और ठ (मध्य में कटा हुआ), फिर बिना रुके क जोड़ें। इसमें ‘पा’ की ध्वनि के लिए प्रथम स्थान पर डैश लगाएं।
- पानी: प का हुक और न, अंत में ‘ई’ की मात्रा के लिए एक छोटा सा बिंदु या डैश बाहर की ओर निकालें।
- पज, पच, पग, पख, पम, पद: इन सभी में प का हुक व्यंजन की प्रकृति के अनुसार (सरल या वक्र) प्रारंभ में लगाया जाता है।
- पड़ता: इसमें प के हुक के साथ ड़ और त का संयोजन होता है। त के अंत में ‘आ’ की मात्रा का स्पष्ट संकेत दें।
3. ब (B) का आंकड़ा: पहचान और प्रयोग
ब (B) का आंकड़ा प के आंकड़े की तुलना में सूक्ष्म और छोटा होता है। हिंदी स्टेनोग्राफी में ‘ब’ और ‘व’ की ध्वनियों के लिए अक्सर समान नियमों का पालन किया जाता है ताकि प्रवाह बना रहे।
- महत्वपूर्ण शब्द निर्माण:
- बर, बन, बस, बप: किसी भी सरल व्यंजन के प्रारंभ में एक बहुत छोटा सा हुक (Hook) लगाएं। ध्यान रहे कि यह प के हुक से छोटा होना चाहिए ताकि पढ़ते समय भ्रम न हो।
- बचपन: यह एक उत्कृष्ट उदाहरण है जहाँ दो आंकड़ों का प्रयोग होता है। शुरुआत में ‘ब’ का आंकड़ा, फिर ‘च’ व्यंजन, और अंत में ‘न’ का आंकड़ा।
- बचत: ब का हुक, च व्यंजन और अंत में त का आंकड़ा।
- वन: इसे ‘बन’ की तरह ही छोटे हुक और न-व्यंजन के साथ लिखा जाता है।
- बनाना: इसमें ब का हुक और न-व्यंजन को दो बार दोहराया जाता है।
- बंसी / बंदी: ‘ब’ का हुक, न-व्यंजन और स-वृत्त या द-व्यंजन। ‘ई’ की मात्रा के लिए हुक या रेखा को थोड़ा बाहर निकालें।
- बनकर, बंद, बंधन, बरात: इन शब्दों में ब के हुक के साथ र, न, ध और त के आंकड़ों का जटिल लेकिन स्पष्ट समन्वय किया जाता है।
- बरकत: इसमें ‘ब’ का प्रारंभिक हुक और ‘त’ का अंतिम हुक दोनों का कुशलता से प्रयोग होता है।
4. ज (J) का आंकड़ा: पहचान और विशेष नियम
ज (J) का आंकड़ा अंग्रेजी के अक्षर ‘U’ की तरह एक छोटे कप के आकार का होता है। यह प और ब के आंकड़ों से अपनी बनावट के कारण बिल्कुल भिन्न होता है।
- शब्द निर्माण और तकनीक:
- जक, जर, जन, जस, जम, जद: व्यंजन के प्रारंभ में एक छोटा ‘U’ आकार का हुक लगाएं और फिर मुख्य व्यंजन खींचें।
- जान / जाना: ज-हुक और न-व्यंजन। ‘जा’ की ध्वनि के लिए पेंसिल को पहले स्थान पर हल्का दबाव दें।
- जन्म: ज-हुक, न और म को एक निरंतर वक्र रेखा में पिरोएं।
- जानकारी: ज-हुक, न, क और र के साथ अंत में ‘ई’ की मात्रा। यह एक संयुक्त आउटलाइन है जो गति बढ़ाने में सहायक है।
- जनसंख्या (विशेष शब्द): इसकी बनावट पर ध्यान दें, ज-हुक के साथ न, फिर ‘स’ का छोटा वृत्त, फिर ‘ख’ और अंत में ‘य’ को पूरी तरह खोलकर लिखें (ज-न-सं-ख-य)।
- जैन, जाना: हुक के साथ मात्राओं का सही नियोजन करें।
5. आंकड़ों के प्रयोग के अनिवार्य नियम (Core Rules)
एक वरिष्ठ प्रशिक्षक होने के नाते, मैं आपको इन तीन नियमों को कंठस्थ करने की सलाह देता हूँ:
- स्थान (Position): ये आंकड़े (प, ब, ज) केवल और केवल व्यंजन के प्रारंभ में लगते हैं। इन्हें कभी भी अंत में लगाने की गलती न करें।
- मध्य निषेध (No Middle Use): दो व्यंजनों के बीच में इन आंकड़ों का प्रयोग कभी नहीं किया जाता। यदि आप बीच में हुक लगाने की कोशिश करेंगे, तो आउटलाइन का प्रवाह (Flow) टूट जाएगा और उसे पढ़ना असंभव होगा।
- य, व और ह का अपवाद: ये आंकड़े ‘य’, ‘व’ और ‘ह’ में नहीं लगाए जाते।
- कारण: ‘य’ और ‘व’ के पास पहले से ही अपना प्रारंभिक हुक होता है, और ‘ह’ के प्रारंभ में एक वृत्त (Circle) होता है। यदि इनमें एक और आंकड़ा जोड़ा जाए, तो वह एक ‘क्लस्टर’ या गांठ जैसा दिखने लगेगा, जिससे गति और स्पष्टता दोनों नष्ट हो जाएंगी।
6. तुलनात्मक अध्ययन: प, ब और ज के आंकड़े
| आंकड़ा | प्रतीक (Symbol Description) | प्रमुख उदाहरण |
| प (P) | अंग्रेजी के ‘B’ की तरह (लचीला और मध्यम आकार) | पक, पर, पाठक, पानी, पग |
| ब (B) | सूक्ष्म हुक (Small Hook) | बर, बस, बचपन, वन, बरकत |
| ज (J) | अंग्रेजी के ‘U’ की तरह (कप आकार) | जक, जन, जान, जन्म, जनसंख्या |
7. उन्नत शब्द निर्माण और मात्राओं का स्थान
आंकड़े वाले शब्दों में मात्रा लगाना एक कला है। नियम यह है कि आंकड़ा + व्यंजन को एक इकाई माना जाता है।
- प्रथम स्थान की मात्रा (जैसे ‘आ’): यदि प के हुक वाले शब्द में ‘आ’ की मात्रा है (जैसे पाठक), तो मात्रा व्यंजन के शुरुआती हिस्से के पास लगाई जाएगी।
- ई की मात्रा: शब्दों जैसे ‘पानी’ या ‘बंदी’ में, ‘ई’ की ध्वनि को दर्शाने के लिए आउटलाइन के अंत में एक छोटा डैश बाहर की तरफ निकाला जाता है, जो गति को बाधित नहीं करता।
- प्रवाह: ‘बरकत’ जैसे शब्दों में जहाँ मात्राएं नहीं हैं, वहां मुख्य ध्यान हुक के आकार पर होना चाहिए ताकि वे बहुत बड़े (व्यंजन जैसे) न दिखने लगें।
8. एक्सपर्ट प्रैक्टिस गाइड और ई-ई-ए-टी (EEAT)
स्टेनोग्राफी केवल सुनने से नहीं, बल्कि हाथ और दिमाग के तालमेल से आती है। एक वरिष्ठ शिक्षक के रूप में मेरा अनुभव कहता है कि छात्र अक्सर हुक को बहुत गोल या बहुत तीखा बना देते हैं आपको इसे सहज रखना है।
- अभ्यास का लक्ष्य: प, ब और ज के प्रत्येक उदाहरण शब्द को कम से कम 20-20 बार अपनी नोटबुक में लिखें।
- सफलता का मंत्र: प्रतिदिन 2 घंटे का समर्पित अभ्यास आपको 80 WPM की गति तक ले जाएगा।
- सावधानी: पेंसिल को बहुत जोर से न दबाएं। हुक सूक्ष्म होने चाहिए ताकि वे अगले व्यंजन के साथ आसानी से विलीन हो सकें।

Day 15 – ‘ह’ और ‘स्व’ के आंकड़े (व्रत) का संपूर्ण ज्ञान
एक वरिष्ठ स्टेनोग्राफी प्रशिक्षक के रूप में, मैंने हजारों छात्रों को शून्य से शिखर तक पहुँचते देखा है। स्टेनोग्राफी केवल एक कौशल नहीं, बल्कि एक साधना है। यदि आप SSC स्टेनोग्राफर, पार्लियामेंट्री रिपोर्टर, या विभिन्न राज्य स्तरीय अदालतों (High Court/District Court) में एक प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी का सपना देख रहे हैं, तो आपकी सफलता दो स्तंभों पर टिकी है शुद्धता और गति (Speed)।
अब हम उन तकनीकी बारीकियों को समझेंगे जो आपको एक औसत लेखक से एक पेशेवर आशुलिपिक (Stenographer) के रूप में अलग करती हैं। आज का विषय है ‘ह’ और ‘स्व’ के आंकड़े (व्रत) का प्रयोग।
आशुलिपि का मूल सिद्धांत है ‘न्यूनतम प्रयास में अधिकतम आउटपुट’। पिछले अध्यायों में हमने ‘स’ के छोटे व्रत के बारे में सीखा था। लेकिन जैसे-जैसे शब्द जटिल होते जाते हैं, हमें भारी ध्वनियों जैसे ‘ह’ और ‘स्व’ को संभालने के लिए विशेष उपकरणों की आवश्यकता होती है। आज हम सीखेंगे कि कैसे एक ही व्रत के आकार और स्थान में परिवर्तन करके हम अपनी गति को 80 से 100 शब्द प्रति मिनट (WPM) तक ले जा सकते हैं।
यह अध्याय हमारे “85 Days Free Hindi Steno Course” की श्रृंखला का एक अभिन्न अंग है, जिसे आप typingmasterpro.com पर विस्तार से पढ़ सकते हैं। मेरा सुझाव है कि आप अपनी नोटबुक और पेंसिल तैयार रखें, क्योंकि आज हम न केवल नियम सीखेंगे, बल्कि उनके पीछे के ध्वन्यात्मक विज्ञान (Phonetic Science) को भी समझेंगे। चलिए, स्टेनोग्राफी की इस रोमांचक यात्रा को आगे बढ़ाते हैं।
1. ‘ह’ का व्रत: नियम और तकनीकी बारीकियां (The ‘Ha’ Circle: Rules & Logic)
स्टेनोग्राफी में ‘ह’ एक ऐसी ध्वनि है जो हिंदी भाषा में अत्यंत प्रचलित है। यदि आप ‘ह’ को हर स्थान पर उसके पूर्ण रूप (Strokes) में लिखेंगे, तो आपका हाथ बार-बार उठेगा, जिससे समय की हानि होगी। ‘ह’ के व्रत का नियम इसी समस्या का समाधान है।
मुख्य नियम और हाथ का संचलन (Manual Movement):
- आकार का सिद्धांत (The Principle of Size): ‘ह’ का व्रत आकार में ‘स’ के व्रत से बड़ा और स्पष्ट होता है। इसे हम “बड़ी गुंडी” (Large Gundi) भी कहते हैं। जहाँ ‘स’ का व्रत एक छोटी बिंदी जैसा दिखता है, ‘ह’ का व्रत स्पष्ट रूप से एक घेरे का रूप लेता है।
- स्थान की स्वतंत्रता: ‘ह’ का व्रत शब्द के प्रारंभ, मध्य और अंत तीनों स्थितियों में सफलतापूर्वक उपयोग किया जा सकता है। यह इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
- ध्वन्यात्मक चयन (The ‘Han’ Alternative): जैसा कि स्रोत संदर्भ में बताया गया है, ‘हन’ (Han) जैसे शब्दों को लिखते समय हमारे पास दो विकल्प होते हैं। हम या तो ‘ह’ का पूरा स्ट्रोक बनाकर ‘न’ का आंकड़ा लगा सकते हैं, या फिर ‘ह’ के व्रत का प्रयोग सीधे ‘न’ व्यंजन पर कर सकते हैं। एक कुशल प्रशिक्षक के नाते मेरी सलाह है कि गति बढ़ाने के लिए व्रत का ही प्रयोग करें।
- लेखन की दिशा: ‘ह’ के व्रत को घुमाने की दिशा वही रहती है जो ‘स’ के व्रत की होती है (प्रवाह के अनुसार), लेकिन इसका घेरा बड़ा होने के कारण यह हाथ को एक सुचारू गति प्रदान करता है।
‘ह’ के व्रत के उदाहरण:
| शब्द (Hindi) | लेखन विधि और नियम का तर्क |
| कह (Kah) | ‘क’ की क्षैतिज रेखा के अंत में एक बड़ा गोलाकार व्रत (गुंडी) जोड़ा गया है। |
| पह (Pah) | ‘प’ की नीचे आने वाली रेखा के अंत में ‘ह’ का बड़ा व्रत लगाया गया है। |
| गह (Gah) | ‘ग’ व्यंजन के साथ अंत में ‘ह’ का व्रत। रेखा को गहरा रखते हुए अंत में बड़ा गोला बनाएँ। |
| हत (Hat) | यहाँ ‘ह’ का व्रत शब्द की शुरुआत में ‘त’ व्यंजन के ऊपर की ओर लगाया गया है। |
| हन (Han) | ‘न’ व्यंजन के प्रारंभ में बड़ा व्रत। इसे ‘स’ के व्रत ‘सन’ से अलग दिखाने के लिए बड़ा रखें। |
| हक (Hak) | ‘क’ व्यंजन से पहले ‘ह’ का बड़ा व्रत। यह ‘सक’ से भिन्न होना चाहिए। |
| रह (Rah) | नीचे से ऊपर जाने वाले ‘र’ के अंत में ‘ह’ का व्रत जोड़ने से प्रवाह बना रहता है। |
2. ‘स्व’ का आंकड़ा: विशेष नियम और प्रतिबंध (The ‘Swa’ Hook/Circle)
‘स्व’ की ध्वनि (जैसे: स्वागत, स्वराज) में ‘स’ और ‘व’ का संयुक्त प्रभाव होता है। स्टेनोग्राफी में इस भारी ध्वनि के लिए भी ‘ह’ वाले बड़े व्रत का ही प्रयोग किया जाता है, लेकिन इसके कुछ कड़े नियम हैं जिन्हें समझना अनिवार्य है।
‘स्व’ के विशिष्ट नियम:
- केवल प्रारंभिक अवस्था (Initial Only): ‘स्व’ का आंकड़ा हमेशा शब्द के प्रारंभ में ही लगाया जाता है। यदि बड़ा व्रत शब्द के मध्य या अंत में आता है, तो उसे अनिवार्य रूप से ‘ह’ ही पढ़ा जाएगा, ‘स्व’ नहीं।
- पहचान और संदर्भ (Contextual Reading): यह एक महत्वपूर्ण तकनीकी बिंदु है। जब किसी शब्द की शुरुआत में एक बड़ा व्रत आता है, तो वह ‘ह’ भी हो सकता है और ‘स्व’ भी (जैसे ‘हत’ और ‘स्वत’)। एक वरिष्ठ स्टेनोग्राफर इसे वाक्य के संदर्भ (Context) से पहचानता है। उदाहरण के लिए, “वह महल गया” में ‘महल’ ही होगा, ‘स्वहल’ नहीं।
- समय की बचत: स्टेनोग्राफी में ‘स्व’ लिखने के लिए यदि आप ‘स’ और ‘व’ के अलग-अलग संकेतों का उपयोग करेंगे, तो आउटलाइन बहुत लंबी और भद्दी हो जाएगी। ‘स्व’ का व्रत इसे अत्यंत संक्षिप्त बना देता है।
3. तुलनात्मक अध्ययन: ‘स’ बनाम ‘ह’ का व्रत (Comparative Analysis)
छात्रों के बीच सबसे आम भ्रम ‘स’ और ‘ह’ के व्रत के बीच होता है। इस अंतर को स्पष्ट रूप से समझने के लिए नीचे दी गई तालिका का गहन अध्ययन करें:
| आधार | ‘स’ का व्रत (Small Circle) | ‘ह’/’स्व’ का व्रत (Large Circle) |
| आकार | छोटा और सूक्ष्म (Small & Precise) | बड़ा और स्पष्ट (Large & Thick) |
| उदाहरण 1 | सत (Sat): छोटा गोला + त | हत (Hat): बड़ा गोला + त |
| उदाहरण 2 | सक (Sak): छोटा गोला + क | हक (Hak): बड़ा गोला + क |
| उदाहरण 3 | सन (San): छोटा गोला + न | हन (Han): बड़ा गोला + न |
| स्थान | कहीं भी (प्रारंभ, मध्य, अंत) | ‘ह’ कहीं भी, ‘स्व’ केवल प्रारंभ में |
विशेष टिप: अभ्यास करते समय ‘स’ के व्रत को पेंसिल की नोक से हल्का स्पर्श देकर बनाएँ, जबकि ‘ह’ के व्रत के लिए पेंसिल के दबाव को थोड़ा स्थिर रखें और घेरा बड़ा करें।
4. शब्दों में प्रयोग: विस्तृत उदाहरण (Practical Word Drilling)
नीचे दिए गए उदाहरणों को ध्यान से देखें और उनकी आउटलाइन बनाने का प्रयास करें।
क) मध्य और अंत में ‘ह’ का प्रयोग (Medial & Final ‘Ha’)
जब ‘ह’ किसी शब्द के बीच में या अंत में आता है, तो वह केवल ‘ह’ की ध्वनि ही देता है:
| शब्द | आउटलाइन निर्माण का तर्क |
| नहन | ‘न’ रेखा + मध्य में बड़ा ‘ह’ व्रत + पुनः ‘न’ रेखा। |
| महन | ‘म’ रेखा + मध्य में ‘ह’ की बड़ी गुंडी + ‘न’। |
| रहन | ‘र’ (ऊपर जाने वाला) + ‘ह’ व्रत + ‘न’। |
| सहन | ‘स’ का छोटा व्रत + ‘ह’ का बड़ा व्रत + ‘न’। (यहाँ दो व्रतों का संगम है) |
| पहर | ‘प’ + ‘ह’ व्रत + ‘र’। हाथ बिना रोके एक प्रवाह में चलता है। |
| चहल | ‘च’ + ‘ह’ व्रत + ‘ल’। यहाँ ‘ह’ का गोला ‘च’ के अंत में जुड़ता है। |
| कटहल | ‘क’ + ‘ट’ + ‘ह’ व्रत + ‘ल’। लंबी आउटलाइन को संक्षिप्त करता है। |
| महल | ‘म’ + ‘ह’ व्रत + ‘ल’। (अत्यंत महत्वपूर्ण शब्द) |
| महिला | ‘म’ + ‘ह’ व्रत + ‘ल’ + ‘आ’ की मात्रा। |
ख) शुरुआत में ‘ह’ का प्रयोग (Initial ‘Ha’)
| शब्द | विवरण |
| होना | ‘ह’ का बड़ा व्रत + ‘न’ + ‘ओ’ और ‘आ’ की मात्राएँ। |
| होता | ‘ह’ व्रत + ‘त’। इसमें व्रत ऊपर की ओर खुलता है। |
| कहना | ‘क’ + मध्य में ‘ह’ व्रत + ‘न’ रेखा। |
| कहानी | ‘क’ + ‘ह’ व्रत + ‘न’ + ‘ई’ की मात्रा। |
| हानिकारक | ‘ह’ का व्रत + ‘न’ + ‘क’ + ‘र’ + ‘क’। यह एक संयुक्त आउटलाइन है। |
ग) ‘स्व’ से बनने वाले शब्द (Words with ‘Swa’)
याद रखें, ये केवल शब्द के प्रारंभ में ही लगेंगे:
| शब्द | आउटलाइन निर्माण की तकनीक |
| स्वप | बड़ा व्रत (स्व) + ‘प’ रेखा। |
| स्वग | बड़ा व्रत (स्व) + ‘ग’ रेखा। |
| स्वर | बड़ा व्रत (स्व) + नीचे आने वाला ‘र’। |
| स्वर्ग | ‘स्व’ व्रत + ‘र’ + ‘ग’ (प्रवाह के अनुसार ‘र’ का छोटा रूप)। |
| स्वपन | ‘स्व’ व्रत + ‘प’ + ‘न’ का अंतिम आंकड़ा। |
| स्वागत | ‘स्व’ व्रत + ‘ग’ + ‘त’ का आंकड़ा। (बहुत महत्वपूर्ण शब्द) |
| स्वार्थ | ‘स्व’ व्रत + ‘र’ + ‘थ’ रेखा। |
| स्वतः | ‘स्व’ व्रत + ‘त’ + अंत में विसर्ग के दो बिंदु। |
| स्वदेश | ‘स्व’ व्रत + ‘द’ + अंत में ‘स’ का छोटा व्रत। |
| स्वराज | ‘स्व’ व्रत + ‘र’ + ‘ज’ रेखा। |
5. एडवांस्ड तकनीक: ‘स्व’ के साथ ‘र’ का प्रयोग (The Swa + r Trick)
स्टेनोग्राफी में कुछ ऐसी तकनीकें होती हैं जो जादुई गति प्रदान करती हैं। उनमें से एक है “विपरीत दिशा का नियम”।
नियम (The Reversal Rule): यदि ‘स्व’ के व्रत को किसी व्यंजन (जैसे ‘क’) के साथ उसकी सामान्य दिशा के विपरीत घुमाया जाए, तो वह उस व्यंजन के बाद ‘र’ की ध्वनि को स्वतः ही समाहित कर लेता है।
उदाहरण: स्वीकार (Sweekar)
- सामान्यतः ‘स्व’ + ‘क’ + ‘र’ लिखने में तीन अंग लगेंगे।
- लेकिन इस तकनीक में, ‘स्व’ के व्रत को ‘क’ के साथ इस प्रकार विपरीत दिशा में पिरोया जाता है कि ‘र’ का आंकड़ा उसमें अंतर्निहित हो जाता है। इससे ‘स्व-क-र’ एक ही झटके में लिखा जाता है। यह एक उच्च-स्तरीय तकनीक है जो केवल वरिष्ठ प्रशिक्षकों द्वारा सिखाई जाती है।
6. विशेष नियम: ‘स’ और ‘ह’ का संयुक्त प्रयोग (Combined S+H Rule)
कभी-कभी शब्दों में ‘स’ और ‘ह’ की ध्वनियाँ एक साथ आती हैं, जैसे “सहयोग” या “सहायक”। इसके लिए ऋषि प्रणाली में एक बहुत ही सरल और प्रभावी नियम है।
नियम (Thickening the Gundi): यदि ‘ह’ के व्रत की शुरुआती गुंडी (Loop) को सामान्य से थोड़ा और अधिक बड़ा या थोड़ा मोटा (Heavy) बना दिया जाए, तो यह स्वतः ही ‘स + ह’ पढ़ा जाता है।
प्रमुख उदाहरण:
- सहभागिता: ‘स+ह’ के लिए बहुत बड़ा व्रत + ‘भ’ + ‘ग’ + ‘त’ का आंकड़ा। यहाँ गुंडी का आकार सामान्य ‘ह’ से भी बड़ा होगा।
- सहायक: ‘सह’ का मोटा व्रत + ‘य’ + ‘क’ रेखा।
- सहयोगी: ‘सह’ का मोटा व्रत + ‘य’ + ‘ग’ + ‘ई’ की मात्रा।
- सहयोग: ‘सह’ का मोटा व्रत + ‘य’ + ‘ग’ + ‘ओ’ की मात्रा।
इस नियम का अभ्यास करने से आपको ‘स’ और ‘ह’ के दो अलग-अलग व्रत नहीं बनाने पड़ते, जिससे आपकी पेंसिल एक ही निरंतर प्रवाह में चलती रहती है।
स्टेनोग्राफी “हाथ की मांसपेशियों की याददाश्त” (Muscle Memory) का विषय है। नियम याद करने से ज्यादा जरूरी है उन्हें हाथ से उतारना।
क) शब्द अभ्यास (Word Drilling)
नीचे दिए गए शब्दों को अपनी नोटबुक में कम से कम 10-10 बार लिखें:
- महल, महिला, कटहल, पहल, चहल-पहल, हानिकारक, कहानी, होना, होता, कहना।
- स्वराज, स्वदेश, स्वार्थ, स्वागत, स्वपन, स्वर्ग, स्वर, स्वजन, स्वतः।
- सहयोग, सहायक, सहभागी, सहभागिता, सहयात्री।
ख) वाक्य अभ्यास (Sentence Construction)
इन वाक्यों को स्टेनोग्राफी में अनुवाद करें और प्रत्येक वाक्य को 20 बार लिखें:
- स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और हम इसे लेकर रहेंगे।
- उस विशाल महल में एक बुद्धिमान महिला रहती थी।
- हमें देश की उन्नति के लिए एक-दूसरे का पूर्ण सहयोग करना चाहिए।
- यह कहानी स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक साबित हो सकती है।
- स्वदेश की सेवा करना ही प्रत्येक नागरिक का परम धर्म है।
- स्वागत समारोह के दौरान बाजार में बहुत चहल-पहल दिखाई दी।
- स्वर्ग और नर्क की कल्पना मानवीय कर्मों पर आधारित है।
- सहायक नदी का बहाव वर्षा ऋतु में बहुत तेज हो जाता है।
- मनुष्य को अपना स्वार्थ त्याग कर लोक कल्याण के कार्य करने चाहिए।
- वह विद्यार्थी प्रतिदिन योग का अभ्यास स्वतः ही करता है।
ग) टाइमर चैलेंज (The Speed Challenge)
ऊपर दिए गए 10 वाक्यों को बिना रुके लिखें और समय नोट करें। आपका लक्ष्य होना चाहिए कि इन 10 वाक्यों को आप 2 मिनट के भीतर शुद्ध आउटलाइन के साथ लिख सकें। यदि आप अपनी टाइपिंग की गति और शुद्धता को भी परखना चाहते हैं, तो हिंदी टाइपिंग के लिए हमारी वेबसाइट के अभ्यास टूल का उपयोग करें।
8. महत्वपूर्ण टिप्स और सावधानियां (Senior Instructor’s Pro-Tips)
सावधानी: स्टेनोग्राफी में ‘साइज’ (Size) ही आपका सबसे बड़ा शत्रु या मित्र हो सकता है।
- यदि आपने ‘ह’ के व्रत को छोटा बना दिया, तो अनुवादक (Transcriber) उसे ‘स’ पढ़ेगा, जिससे ‘हत’ का ‘सत’ और ‘हक’ का ‘सक’ हो जाएगा। अर्थ का अनर्थ टालने के लिए अभ्यास के दौरान ‘स’ और ‘ह’ के घेरे में स्पष्ट अंतर बनाए रखें।
- प्रवाह (Flow): व्रत को हमेशा उस दिशा में घुमाएँ जिधर से आपकी पेंसिल अगले व्यंजन की ओर आसानी से मुड़ सके।
- गुंडी (Gundi) का महत्व: ‘सह’ के नियम में गुंडी को मोटा करना न भूलें। पेंसिल के हल्के से दबाव में बदलाव से ही आप ‘ह’ और ‘सह’ का अंतर कर पाएंगे।
9. (FAQ)
प्रश्न 1: क्या मैं ‘ह’ के व्रत का प्रयोग शब्द के अंत में कर सकता हूँ? उत्तर: बिल्कुल। ‘ह’ का व्रत सार्वभौमिक है। इसे आप प्रारंभ (हत), मध्य (नहन) और अंत (कह, पह) तीनों स्थानों पर उपयोग कर सकते हैं।
प्रश्न 2: ‘ह’ और ‘स्व’ के व्रत एक जैसे दिखते हैं, अनुवाद करते समय भ्रम से कैसे बचें? उत्तर: यह अभ्यास से आता है। याद रखें, ‘स्व’ केवल शब्द के शुरू में आता है। यदि आउटलाइन “बड़ा व्रत + र + ज” है, तो वह ‘स्वराज’ ही होगा, ‘हराज’ कोई सार्थक शब्द नहीं है। संदर्भ ही स्टेनोग्राफी की आत्मा है।
प्रश्न 3: क्या ‘हन’ को हमेशा व्रत से ही लिखना चाहिए? उत्तर: ‘हन’ को आप पूरे ‘ह’ स्ट्रोक और ‘न’ के आंकड़े से भी लिख सकते हैं, लेकिन व्रत का उपयोग करना आपको तेज बनाता है। प्रारंभिक छात्रों के लिए दोनों मान्य हैं, लेकिन विशेषज्ञों के लिए व्रत ही श्रेष्ठ है।
प्रश्न 4: ‘स्वीकार’ वाली विपरीत दिशा की ट्रिक क्या हर शब्द पर लागू होती है? उत्तर: नहीं, यह मुख्य रूप से उन शब्दों पर लागू होती है जहाँ ‘स्व’ के ठीक बाद ‘क’ या ‘ग’ जैसे व्यंजन आते हैं और उसके बाद ‘र’ की ध्वनि होती है। इसे विशिष्ट शब्दों के लिए ‘शॉर्टकट’ के रूप में याद रखना बेहतर है।
प्रश्न 5: क्या पेंसिल के दबाव से फर्क पड़ता है? उत्तर: हाँ, विशेषकर ‘सह’ वाले नियम में। हल्का दबाव ‘ह’ के लिए और थोड़ा गहरा या मोटा घेरा ‘सह’ के लिए उपयोग किया जाता है।
10. निष्कर्ष (Conclusion)
आज के Day 15 के इस गहन अध्याय में हमने ‘ह’ और ‘स्व’ के आंकड़ों के रहस्यों को उजागर किया। हमने सीखा कि कैसे एक बड़ा गोलाकार व्रत आपकी लेखन गति को क्रांतिकारी रूप से बदल सकता है। स्टेनोग्राफी में सफलता का कोई छोटा रास्ता (Shortcut) नहीं है, सिवाय निरंतर अभ्यास के।
आज सिखाए गए नियमों विशेषकर ‘ह’ का बड़ा व्रत, ‘स्व’ का प्रारंभिक उपयोग और ‘सह’ की मोटी गुंडी को आत्मसात करने के लिए आपको कम से कम 3-4 घंटे के समर्पित अभ्यास की आवश्यकता है। याद रखें, आपकी पेंसिल को यह नहीं सोचना चाहिए कि व्रत कैसा बनेगा, उसे तो बस ध्वनि सुनते ही चल पड़ना चाहिए। अगले अध्याय (Day 16) में हम कुछ और रोमांचक आंकड़ों और उनके ‘हुक’ के नियमों पर चर्चा करेंगे। तब तक अपनी स्टेनोग्राफी नोटबुक को भरते रहें।


