हिंदी स्टेनोग्राफी कोर्स के आज के लेख में, हम लेक्चर 21 से 25 तक के कोर्स मटीरियल को कवर करेंगे। (Hindi Stenography Course in Hindi) चूँकि ये लेसन काफी हद तक एक जैसे हैं और इनमें बहुत कम अंतर है, इसलिए इनका एक साथ अभ्यास करना आसान होगा और समय की भी बचत होगी।
हिंदी स्टेनोग्राफी कोर्स: Day 21 – सभी महत्वपूर्ण आंकड़ों (Hooks) का संपूर्ण अभ्यास
आज का यह पाठ केवल एक अध्याय नहीं है, बल्कि आपकी शॉर्टहैंड यात्रा का वह महत्वपूर्ण मोड़ है जहाँ से आपकी गति और शुद्धता में एक क्रांतिकारी बदलाव आने वाला है। यदि हम Stenography की दुनिया को गहराई से समझें, तो यहाँ सारा खेल समय बचाने और कम से कम हाथ हिलाकर अधिक से अधिक शब्द लिखने का है। आज का विषय “सभी महत्वपूर्ण आंकड़ों का अभ्यास” इसी मूल मंत्र को सार्थक करता है।
स्टेनोग्राफी में गति बढ़ाने का सबसे बड़ा रहस्य “मानसिक स्पष्टता” है। जब आप पेंसिल हाथ में लेते हैं, तो आपका मस्तिष्क शब्द सुनते ही यह तय कर लेना चाहिए कि वहाँ ‘न’ का हुक लगेगा या शब्द की लंबाई दोगुनी होगी। आज हम इसी “मसल्स मेमोरी” को विकसित करने का प्रयास करेंगे। इस 3000 से अधिक शब्दों के विस्तृत अभ्यास गाइड में, हम न केवल नियमों को दोबारा समझेंगे, बल्कि उनके पीछे के “मैकेनिकल मूवमेंट” यानी पेंसिल के घुमाव की बारीकियों पर भी चर्चा करेंगे। यह अभ्यास आपकी नींव को इतना मजबूत कर देगा कि आप आगामी दिनों के कठिन डिक्टेशन के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएंगे। पूरे धैर्य और एकाग्रता के साथ इस पाठ को अंत तक पढ़ें और अभ्यास करें।
1. स्टेनोग्राफी में आंकड़ों का महत्व (The Importance of Hooks)
शॉर्टहैंड में आंकड़ों का उपयोग केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्य आवश्यकता है। यदि आप प्रत्येक अक्षर को पूरा-पूरा बनाएंगे, तो आप कभी भी 80 या 100 शब्द प्रति मिनट की गति प्राप्त नहीं कर पाएंगे। एक पेशेवर स्टेनोग्राफर की पहचान यह है कि वह कम से कम पेंसिल उठाता है।
आंकड़ों के महत्व को हम निम्नलिखित तकनीकी दृष्टिकोणों से समझ सकते हैं:
- पेंसिल लिफ्टिंग नियम (Pencil Lifting Rule): “पेंसिल जितनी कम उठेगी, गति उतनी ही अधिक बढ़ेगी।” आंकड़े हमें यह सुविधा देते हैं कि हम शब्द के अंत में या बीच में हाथ उठाए बिना नए वर्ण जोड़ सकें। उदाहरण के लिए, ‘सकना’ में ‘न’ का आंकड़ा लगाने के लिए आपको पेंसिल उठाने की जरूरत नहीं पड़ती, बस एक छोटा सा हुक शब्द को पूरा कर देता है।
- प्रवाह और निरंतरता (Flow): जब हम ‘शन’ जैसे बड़े आंकड़ों का उपयोग करते हैं, तो हाथ की गति में एक लय (Rhythm) बनी रहती है। यह निरंतरता डिक्टेशन के दौरान होने वाली मानसिक थकान को कम करती है।
- स्पष्टता और विभेदन (Clarity): कई बार लोग सोचते हैं कि संक्षिप्त लिखने से पढ़ने में दिक्कत होगी, लेकिन आंकड़े निश्चित दिशाओं में लगते हैं। जैसे ‘न’ का आंकड़ा घड़ी की विपरीत दिशा में और ‘त’ का आंकड़ा घड़ी की दिशा में लगने से दोनों के बीच का अंतर स्पष्ट रहता है।
- दक्षता (Efficiency): आंकड़े एक पूरे व्यंजन की जगह घेर लेते हैं, जिससे लाइन में जगह कम लगती है और आप कम समय में ज्यादा कंटेंट लिख पाते हैं।
2. ‘शन’ (San) के आंकड़े का प्रयोग (The ‘San’ Hook)
‘शन’ का आंकड़ा स्टेनोग्राफी के सबसे उपयोगी आंकड़ों में से एक है। यह मूल रूप से ‘न’ के आंकड़े का ही एक बड़ा रूप है। नियम यह है कि यदि किसी व्यंजन के अंत में ‘न’ के आंकड़े को थोड़ा बड़ा कर दिया जाए, तो वह ‘शन’, ‘शण’, ‘षण’ या ‘सन’ की ध्वनि देने लगता है। इसमें मात्राओं का बहुत बड़ा रोल नहीं होता क्योंकि स्टेनोग्राफी में हम ध्वनि के आधार पर शब्द पहचानते हैं।
तकनीकी बनावट: ‘शन’ हुक हमेशा व्यंजन के अंत में लगाया जाता है। सरल रेखाओं (Straight Strokes) में इसे व्यंजन की दिशा के विपरीत या सुविधा अनुसार लगाया जाता है, जबकि वक्र रेखाओं (Curved Strokes) में यह हमेशा अंदर की तरफ लगता है।
| शब्द (Hindi) | संरचना और नियम (Structural Components) |
| राशन | ‘र’ (नीचे से ऊपर) के अंत में ‘न’ के आंकड़े को बड़ा करके ‘शन’ बनाया गया। |
| पेंशन | ‘प’ व्यंजन के साथ अंत में बड़ा ‘शन’ का हुक। |
| किशन | ‘क’ व्यंजन के अंत में ‘शन’ का बड़ा आंकड़ा। |
| मिशन | ‘म’ व्यंजन के अंत में अंदर की ओर बड़ा ‘शन’ हुक। |
| सेशन | ‘स’ के वृत्त के साथ ‘शन’ का आंकड़ा जोड़ना। |
| स्टेशन | ‘स्ट’ का चाप (Loop) प्रारंभ में और अंत में ‘शन’ का हुक। |
| भाषण | ‘भ’ को काटकर अंत में बड़ा ‘शन’ का आंकड़ा। |
| टेंशन | ‘ट’ व्यंजन के अंत में बड़ा ‘शन’ हुक। |
| दर्शन | ‘द’ और ‘र’ के साथ अंत में ‘शन’ का आंकड़ा। |
विशेष टिप: बेटा, याद रखना कि ‘राशन’ जैसे शब्दों में ‘र’ के बाद ‘शन’ लगाने के लिए हाथ को थोड़ा बाहर की तरफ घुमाना पड़ता है ताकि हुक बड़ा और स्पष्ट दिखे।
3. ‘न’ और ‘त’ के आंकड़ों का अभ्यास (Practice of ‘Na’ and ‘Ta’ Hooks)
‘न’ और ‘त’ के आंकड़े स्टेनोग्राफी की बुनियादी ईंटें हैं। अधिकांश क्रियाएं ‘ना’ पर खत्म होती हैं और बहुत से शब्द ‘ता’ पर। इन आंकड़ों को व्यंजनों के अंत में एक बहुत छोटे घुमाव के रूप में लगाया जाता है।
नियम:
- सरल व्यंजनों में ‘न’ का आंकड़ा बाईं ओर (Left) और ‘त’ का आंकड़ा दाईं ओर (Right) लगता है।
- वक्र व्यंजनों में ये आंकड़े हमेशा अंदर की ओर लगते हैं, जहाँ इनकी पहचान इनके स्थान से की जाती है।
| शब्द (Hindi) | संरचनात्मक घटक (Structural components) |
| सकना | ‘स’ का वृत्त + ‘क’ व्यंजन + अंत में ‘न’ का हुक। |
| रखना | ‘र’ (नीचे से ऊपर) + ‘ख’ + ‘न’ का हुक। |
| देखना | ‘द’ + ‘ख’ + ‘न’ का हुक। |
| पढ़ना | ‘प’ + ‘ढ़’ (र को काटकर) + ‘न’ का हुक। |
| पढ़ता | ‘प’ + ‘ढ़’ + ‘त’ का हुक (दाईं ओर का घुमाव)। |
| रखता | ‘र’ + ‘ख’ + ‘त’ का हुक। |
| रोकना | ‘र’ + ‘क’ + ‘न’ का हुक (ओ की मात्रा के लिए प्रथम स्थान पर बिंदु)। |
| जानना | ‘ज’ का आंकड़ा + ‘न’ व्यंजन के अंत में पुनः ‘न’ हुक। |
| पाना | ‘प’ व्यंजन के अंत में ‘न’ का छोटा हुक। |
| रहना | ‘र’ + ‘ह’ का छोटा वृत्त + ‘न’ का हुक। |
| बांटना | ‘ब’ का आंकड़ा + ‘ट’ + ‘न’ का हुक। |
| चाटना | ‘च’ + ‘ट’ + ‘न’ का हुक। |
| सकना/सकता | ‘स’ + ‘क’ के साथ क्रमशः ‘न’ और ‘त’ का हुक। |
| बांधना | ‘ब’ का आंकड़ा + ‘न’ + ‘ध’ + ‘न’ हुक (इसे संक्षिप्त रूप में भी लिखा जाता है)। |
बेटा/बेटी, जब आप ‘पढ़ना’ या ‘पढ़ता’ लिखते हैं, तो ध्यान दें कि ‘ढ़’ के लिए ‘र’ को काटना पड़ता है, लेकिन अभ्यास से आप इसे बिना काटे भी गति में पहचानना सीख जाएंगे।
4. विशेष शब्दों की आउटलाइन (Special Word Outlines)
कुछ शब्द ऐसे होते हैं जो नियमों के सीधे प्रयोग से थोड़े कठिन लग सकते हैं, इसलिए उनके लिए विशिष्ट संयोजन (Combinations) बनाए गए हैं। इसमें ‘ह’, ‘ल’ और ‘म’ का विशेष प्रवाह देखा जाता है।
‘महल’ और ‘पहल’ का रहस्य: इन शब्दों में ‘ह’ को एक पूर्ण व्यंजन के बजाय एक छोटे वृत्त या आंकड़े के रूप में ‘म’ और ‘ल’ के बीच पिरोया जाता है। इससे पेंसिल को एक झटके में ‘म’ से ‘ल’ तक ले जाने में मदद मिलती है।
- महल: ‘म’ के साथ ‘ह’ का अंदरूनी घुमाव और फिर ‘ल’। यह एक लहर की तरह बनता है।
- पहल: ‘प’ व्यंजन के तुरंत बाद ‘ह’ का आंकड़ा और ‘ल’ को जोड़ना।
- महिला: ‘महल’ की आउटलाइन बनाकर अंत में ‘आ’ की मात्रा (डैश) लगा दी जाती है।
- कल्पना: इसमें ‘कल’ (क में ल का आंकड़ा) का प्रयोग होता है, फिर ‘प’ और अंत में ‘न’ का हुक। यह एक अत्यंत तीव्र आउटलाइन है।
- कंबल और चंबल: यहाँ ‘बल’ का विशेष नियम काम करता है। ‘ब’ के अंदर ‘ल’ का आंकड़ा लगाया जाता है। ‘कंबल’ के लिए ‘क’ + ‘बल’ और ‘चंबल’ के लिए ‘च-म’ + ‘बल’।
- नाश्ता: ‘न’ व्यंजन के साथ ‘स’ का वृत्त और फिर ‘त’ को जोड़ना। इसमें हाथ को बिना रोके ‘स’ से ‘त’ की ओर मोड़ना होता है।
5. द्र, धर, टर, और डर का नियम (The Double Length Rule for ‘Dar/Dhar/Ter’)
यह नियम स्टेनोग्राफी में जादुई प्रभाव पैदा करता है। इसे “दोगुना करने का नियम” (Doubling Principle) कहा जाता है। नियम सरल है: यदि आप किसी भी व्यंजन की सामान्य लंबाई को दोगुना (Double) कर देते हैं, तो उस व्यंजन के उच्चारण के बाद स्वतः ही ‘दर’, ‘धार’, ‘तर’, ‘टर’, ‘डर’ या ‘अंबर’ की ध्वनि जुड़ जाती है।
यह एक जबरदस्त स्पीड-बूस्टर है क्योंकि यह आपको ‘द’, ‘त’ या ‘ट’ के अलग से स्ट्रोक बनाने की मेहनत से बचाता है।
उदाहरण और अभ्यास:
- मदर: ‘म’ व्यंजन को दोगुना लंबा कर दें। (म + दर = मदर)।
- सुंदर: ‘स’ का वृत्त और ‘न’ के आंकड़े को दोगुना लंबा खींच दें। (सन + दर = सुंदर)।
- निरादर: ‘न’ और ‘र’ की संयुक्त आउटलाइन को दोगुना लंबा करने पर ‘दर’ जुड़ जाता है।
- डॉक्टर: ‘ड’ और ‘क’ को एक साथ लिखकर उसे दोगुना लंबा कर दें, यह ‘टर’ की ध्वनि देगा।
- समंदर: ‘स’ और ‘म’ को दोगुना लंबा करने से ‘दर’ जुड़ जाता है।
- कलेक्टर: ‘क’ में ‘ल’ का आंकड़ा लगाकर उसे दोगुना बड़ा कर दें।
- नरेंद्र: ‘न’ और ‘र’ के आंकड़े को दोगुना करने पर ‘दर’ जुड़ता है।
- सिकंदर: ‘स-क-न’ के प्रवाह को दोगुना लंबा कर दें।
- बंदर: ‘ब’ और ‘न’ के संयोजन को दोगुना लंबा करने से ‘दर’ जुड़ता है।
- आडंबर: ‘ड’ और ‘ब’ को दोगुना लंबा करने से ‘अंबर’ की ध्वनि आती है।
- चंद्रमा: ‘च’ और ‘न’ को दोगुना करके अंत में ‘म’ जोड़ दिया जाता है।
6. ‘स्व’ और ‘य’ के विशिष्ट आंकड़े (Advanced Hooks for ‘Swa’ and ‘Ya’)
उन्नत स्टेनोग्राफी में ‘स्व’ और ‘य’ के लिए विशेष चिन्ह निर्धारित हैं जो बड़े शब्दों को बहुत छोटा कर देते हैं।
‘स्व’ का बड़ा वृत्त (Large Circle for Swa)
नियम यह है कि शब्द के प्रारंभ में यदि हम ‘स’ के छोटे वृत्त को बड़ा कर दें, तो वह ‘स्व’ पढ़ा जाता है।
- स्वर्ग: प्रारंभ में ‘स्व’ का बड़ा वृत्त और फिर ‘र’ व ‘ग’।
- स्वपन: ‘स्व’ का वृत्त + ‘प’ + ‘न’ का आंकड़ा।
- स्वागत: ‘स्व’ का वृत्त + ‘ग’ + ‘त’ का आंकड़ा।
- स्वदेश: ‘स्व’ का वृत्त + ‘द’ + ‘स’ का वृत्त।
- स्वराज: ‘स्व’ का वृत्त + ‘र’ + ‘ज’।
- स्वार्थ (विशेष नियम): ‘स्व’ और ‘र’ के बाद ‘थ’ के लिए पेंसिल उठाने या अक्षर काटने के बजाय अंत में एक छोटी सी घुंडी (Loop) लगा दी जाती है। यह ‘थ’ का काम करती है और पेंसिल उठाने की मजबूरी खत्म कर देती है।
‘य’ का अंत हुक (Final Hook for Ya)
शब्द के अंत में ‘य’ की ध्वनि के लिए एक छोटा सा हुक लगाया जाता है। यह ‘कार्यालय’ जैसे शब्दों में बहुत उपयोगी होता है।
- कार्यालय: ‘क-र-ल’ और अंत में ‘य’ का छोटा हुक।
- हिमालय: ‘ह-म-ल’ और अंत में ‘य’ का हुक।
- न्याय: ‘न’ व्यंजन के अंत में ‘य’ का हुक।
- हत्या: ‘ह’ और ‘त’ के बाद अंत में ‘य’ का हुक।
- कार्य: ‘क’ में ‘र’ का आंकड़ा और अंत में ‘य’ का हुक।
- गाय: ‘ग’ व्यंजन के साथ अंत में ‘य’ का हुक।
7. रिश्तेदार और व्यावसायिक शब्दावली (Relationship and Professional Terms)
दैनिक कामकाज में कुछ शब्द बार-बार आते हैं जिनमें ‘दार’ या ‘धार’ लगा होता है। इन शब्दों को लिखने के लिए हम मुख्य रूप से “दोगुना करने के नियम” का उपयोग करते हैं।
- ईमानदारी: ‘म’ और ‘न’ की आउटलाइन को दोगुना लंबा करके अंत में ‘ई’ की मात्रा के लिए एक छोटा डैश निकाल दिया जाता है।
- दुकानदार: ‘द’ और ‘क’ के बाद ‘न’ को दोगुना लंबा किया जाता है।
- हकदार: ‘ह’ और ‘क’ को दोगुना लंबाई में लिखा जाता है।
- रिश्तेदार: ‘र’, ‘स’ और ‘त’ के संयोजन को दोगुना लंबा खींच दिया जाता है।
- किरायेदार: ‘क’ और ‘र’ की आउटलाइन को दोगुना लंबा किया जाता है।
- पहरेदार: ‘प’, ‘ह’ और ‘र’ को दोगुना लंबा करके ‘दार’ जोड़ा जाता है।
8. त्र, त्र्य और अन्य मिश्रित आंकड़े (Tra and Miscellaneous Hooks)
‘त्र’ का आंकड़ा एक बड़ा चाप (Large Arc/Hook) है जो व्यंजन के अंत में लगाया जाता है। यह ‘शन’ के आंकड़े जैसा ही दिखता है लेकिन इसकी स्थिति और प्रयोग के संदर्भ अलग होते हैं।
- पत्र: ‘प’ व्यंजन के अंत में ‘त्र’ का बड़ा आंकड़ा।
- छात्र: ‘छ’ व्यंजन के अंत में ‘त्र’ का आंकड़ा।
- सर्वत्र: ‘स-र-व’ के बाद ‘त्र’ का आंकड़ा।
- मंत्र/मंत्री: ‘म-न’ के साथ ‘त्र’ का आंकड़ा। यदि ‘मंत्री’ लिखना हो, तो अंत में ‘ई’ का स्वर लगा दें।
- जन्म: ‘ज’ का आंकड़ा, ‘न’ का व्यंजन और ‘म’।
- जानकारी: ‘ज’ का आंकड़ा, ‘न’, ‘क’, ‘र’ और अंत में ‘ई’ की मात्रा।
- जनसंख्या (तकनीकी बारीकी): इसमें ‘ज-न-स’ लिखने के बाद ‘ख’ को काटकर अंत में ‘य’ का आंकड़ा लगाया जाता है।
स्टेनोग्राफी सीखने के साथ-साथ अपनी हिंदी टाइपिंग पर भी समान रूप से ध्यान दें। याद रखें, आप शॉर्टहैंड चाहे जितनी तेज लिख लें, अंततः आपको उसे कंप्यूटर पर टाइप करके ही आउटपुट देना होगा।
9. अभ्यास निर्देश (Practice Instructions & Expert Tips)
मेरे प्रिय विद्यार्थियों (बेटों/बेटियों), स्टेनोग्राफी में थ्योरी केवल 10% है, बाकी 90% अभ्यास है। जब आप इन आंकड़ों का अभ्यास करें, तो नीचे दिए गए निर्देशों का पालन अवश्य करें:
- मसल मेमोरी का विकास: एक शब्द को तब तक लिखें जब तक कि वह शब्द सुनते ही आपकी पेंसिल बिना सोचे उसे न बना दे।
- दबाव न डालें: पेंसिल को कागज पर बहुत जोर से न दबाएं। हाथ को हल्का रखें ताकि आंकड़ों में गोलाई और स्पष्टता बनी रहे।
- 4-5 बार पुनरावृत्ति: इस अध्याय के प्रत्येक शब्द और तालिका को कम से कम 4 से 5 बार अपनी अभ्यास पुस्तिका में भरें।
- ध्वनि पर ध्यान दें: ‘बचपन’ और ‘बचत’ जैसे शब्दों में ध्यान दें कि ‘न’ और ‘त’ के आंकड़े ही उन्हें अलग करते हैं।
मास्टर शब्द सूची (Master Word List – 40+ Words)
नीचे दी गई तालिका में वे सभी महत्वपूर्ण शब्द हैं इसे अपनी कॉपी में ज्यों का त्यों उतारें।
| आंकड़े का प्रकार | उदाहरण शब्द (Practice List) | नियम का विवरण |
| ‘शन’ हुक (San) | राशन, मिशन, स्टेशन, भाषण, टेंशन, सेशन, पेंशन, किशन | अंत में बड़ा हुक लगाना। |
| ‘न’ हुक (Na) | सकना, रखना, देखना, पढ़ना, रोकना, जानना, पाना, रहना | व्यंजन के अंत में छोटा विपरीत घुमाव। |
| ‘त’ हुक (Ta) | पढ़ता, रखता, बांटता, चाटना, सक्ता, नाश्ता, बचत | व्यंजन के अंत में सीधा (Clockwise) घुमाव। |
| दोगुना नियम (Double) | सुंदर, डॉक्टर, समंदर, मदर, नरेंद्र, सिकंदर, बंदर, निरादर | व्यंजन की लंबाई 2x करना। |
| ‘स्व’ वृत्त (Swa) | स्वर्ग, स्वपन, स्वागत, स्वदेश, स्वराज, स्वार्थ, स्वजन | प्रारंभ में बड़ा वृत्त। |
| ‘य’ हुक (Ya) | कार्यालय, न्याय, हत्या, कार्य, हिमालय, गाय, प्राप्य | शब्द के अंत में छोटा हुक। |
| ‘त्र’ हुक (Tra) | पत्र, छात्र, सर्वत्र, मंत्र, पलस्तर, अस्त्र | अंत में बड़ा ‘त्र’ चाप। |
| ‘दर/दार’ नियम | ईमानदारी, दुकानदार, हकदार, रिश्तेदार, किरायेदार | लंबाई बढ़ाकर ‘दार’ जोड़ना। |
| ब-संयोजन (Missing Words) | बचपन, बचत, बंधन, बरात, बरकत, बंद | ‘ब’ के साथ ‘न/त’ का संयोजन। |
| मिश्रित/विशिष्ट | महल, पहल, महिला, कल्पना, कंबल, चंबल, जनसंख्या | ‘ह’, ‘ल’, ‘म’ का विशेष प्रयोग। |
| अन्य | कष्ट, अष्ट, पुष्ट, दुष्ट, जानकारी, जन्म, कहना | संक्षेप चिन्हों का प्रयोग। |
हिंदी स्टेनोग्राफी कोर्स: डे 22 – प्रत्यय (Suffixes) और संख्यात्मक लेखन की संपूर्ण मार्गदर्शिका
आज का अध्याय आपकी गति (Speed) को एक नई ऊँचाई देने वाला है। आज हम ‘प्रत्यय’ (Suffixes) और ‘संख्यात्मक लेखन’ की उन बारीकियों को समझेंगे जो एक साधारण स्टेनोग्राफर और एक प्रोफेशनल रिपोर्टर के बीच का अंतर तय करती हैं। हिंदी आशुलिपि में शब्दों को पूरा लिखना संभव नहीं होता, विशेषकर तब जब डिक्टेशन की गति 80 से 100 शब्द प्रति मिनट (WPM) के पार जा रही हो। ऐसे में प्रत्यय वे औजार हैं जो लंबे शब्दों को एक छोटे से संकेत में समेट देते हैं। चलिए, आज के इस तकनीकी और रोचक सत्र को पूरी ऊर्जा के साथ शुरू करते हैं!
1. प्रत्यय (Pratyay) की परिभाषा और स्टेनो में उपयोग
व्याकरण के अनुसार, प्रत्यय वे शब्द या शब्दांश होते हैं जो किसी मूल शब्द के अंत में जुड़कर उसके अर्थ में विशेषता उत्पन्न करते हैं या उसके भाव को पूरी तरह बदल देते हैं। उदाहरण के लिए, ‘शांति’ एक भाव है, लेकिन जब इसके पीछे ‘पूर्ण’ जुड़ता है, तो यह ‘शांतिपूर्ण’ विशेषण बन जाता है।
स्टेनोग्राफी में प्रत्यय का सामरिक महत्व: आशुलिपि में हमारा मुख्य लक्ष्य होता है “न्यूनतम प्रयास, अधिकतम गति”। जब हम किसी शब्द के अंत में बार-बार आने वाले शब्दांशों (जैसे -जनक, -पूर्वक, -वाद) को देखते हैं, तो उनके लिए पूरी आउटलाइन बनाना समय की बर्बादी है। प्रत्यय के नियमों का पालन करके हम शब्द के मुख्य भाग को लिखने के बाद अंत में एक छोटा सा प्रतीक (Symbol) या ‘कट’ (Cut) लगाते हैं। इससे न केवल समय बचता है, बल्कि हाथ का प्रवाह (Flow) भी नहीं टूटता। आज हम जिन प्रत्ययों को सीखेंगे, वे आपकी लेखनी को अत्यंत संक्षिप्त और सुपाठ्य बना देंगे।
2. प्रमुख प्रत्यय और उनके संकेत (Core Suffixes and Symbols)
नीचे दी गई तालिका में उन प्रत्ययों का विवरण है जो दैनिक डिक्टेशन में सबसे अधिक उपयोग किए जाते हैं। इन संकेतों को ध्यान से समझें और इनके ज्यामितीय कोणों पर विशेष ध्यान दें:
| प्रत्यय | स्टेनो नियम/संकेत (Logic) | उदाहरण शब्द (Examples) |
| -पूर्ण (Purn) | शब्द के अंत में ‘प’, ‘र’ और ‘न’ (P-R-N) के संयुक्त आंकड़े का प्रयोग करें। | शांतिपूर्ण, गौरवपूर्ण, तर्कपूर्ण, महत्वपूर्ण, सफलतापूर्वक, श्रद्धापूर्ण, युक्तिपूर्ण, उत्साहपूर्ण, सफलतापूर्वक, न्यायपूर्ण। |
| -पूर्वक (Purvak) | शब्द के अंत में ‘प’, ‘र’ और ‘व’ (P-R-V) का संयुक्त संकेत जोड़ें। | शांतिपूर्वक, सुखपूर्वक, दुखपूर्वक, धैर्यपूर्वक, ध्यानपूर्वक, उत्साहपूर्वक, नियमपूर्वक, सफलतापूर्वक, विवेकपूर्वक, यत्नपूर्वक। |
| -जनक (Janak) | शब्द के अंतिम हिस्से को छोटे ‘न’ के आंकड़े से काटें। यह गति बढ़ाने का सबसे अचूक नियम है। | संतोषजनक, आशाजनक, निराशाजनक, आश्चर्यजनक, चिंताजनक, विस्मयजनक, खेदजनक, भयजनक, आपत्तिजनक, रोमांचजनक। |
| -आत्मक (Atmak) | लेटे हुए (Horizontal) शब्दों के लिए ‘त’ से काटें, खड़े (Standing) शब्दों के लिए ‘म’ से काटें। | सकारात्मक, आध्यात्मिक, नकारात्मक, विचारात्मक, ध्वन्यात्मक, रचनात्मक, विवरणात्मक, तुलनात्मक, भावनात्मक, प्रयोगात्मक। |
| -वाद/वादी (Vad/Vadi) | शब्द के अंत में ‘ब’ संकेत का प्रयोग करें। ‘वादी’ के लिए ‘ब’ के अंत में एक सूक्ष्म बिंदी लगाएं। | साम्राज्यवाद, राष्ट्रवाद, मुरादाबाद, अहमदाबाद, निराशावादी, आशावादी, गांधीवाद, समाजवाद, पूंजीवादी, साम्यवादी। |
| -त्व (Tva) | शब्द के अंत में ‘व’ का हल्का लेटा हुआ छोटा अर्धवृत्ताकार आंकड़ा लगाएं। | तत्व, दायित्व, उत्तरदायित्व, महत्व, कवित्व, सतीत्व, गुरुत्व, प्रभुत्व, व्यक्तित्व, भ्रातृत्व। |
| -वाला (Wala) | शब्द के अंत में ‘ब’ और ‘ल’ (नीचे की ओर जाने वाला) को जोड़कर लिखें। | दूधवाला, घीवाला, तेलवाला, आमवाला, सब्जीवाला, मिठाईवाला, घरवाला, फलवाला, रिक्शावाला, गाड़ीवाला। |
| -आलय (Alay) | शब्द के अंत में ‘ल’ के आंकड़े का उपयोग करें (सामान्यतः बड़ा ल)। | हिमालय, पुस्तकालय, संग्रहालय, कार्यालय, विद्यालय, औषधालय, वाचनालय, भोजनालय, अनाथालय, शिवालय। |
नियमों का विस्तृत विवरण और अतिरिक्त उदाहरण:
- -पूर्ण (Purn) का सूक्ष्म नियम: सोर्स कॉन्टेक्स्ट के अनुसार, ‘पूर्ण’ के लिए केवल ‘प’ और ‘र’ पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि ‘प-र-न’ (P-R-N) का उपयोग करना चाहिए। जैसे ‘श्रद्धापूर्ण’ लिखते समय ‘श्रद्धा’ की आउटलाइन बनाकर अंत में ‘प-र-न’ जोड़ें। अन्य उदाहरण: विधिपूर्ण, नीतिपूर्ण, दोषपूर्ण, अर्थपूर्ण, गरिमापूर्ण।
- -जनक (Janak) की तकनीक: जब आप ‘न’ से काटते हैं, तो वह ‘जनक’ पढ़ा जाता है। उदाहरण के लिए ‘खेदजनक’ में ‘खेद’ लिखकर उसे छोटे ‘न’ से काट दें। ध्यान रहे कि कट छोटा और तिरछा हो ताकि वह मूल शब्द का हिस्सा न लगे। अन्य उदाहरण: लज्जाजनक, अपमानजनक, विस्मयजनक, अरुचिकर-जनक, संदेहास्पद-जनक।
- -आत्मक (Atmak) का द्वैध नियम: यह नियम हाथ के प्रवाह (Flow) पर आधारित है। यदि शब्द खड़ा है (जैसे ‘ट’ वर्ग के शब्द), तो उसे ‘त’ से काटना कठिन होता है, इसलिए वहाँ ‘म’ का प्रयोग करें। जैसे ‘तुलनात्मक’ में ‘ल’ के बाद ‘म’ से काटना अधिक सुगम है। अन्य उदाहरण: प्रेरणात्मक, संवेदनात्मक, व्याख्यात्मक, उपदेशात्मक, प्रतीकात्मक।
3. विशेष विशेषण और सहायक प्रत्यय (Special Suffixes)
कुछ प्रत्यय शब्दों की प्रकृति को बदलकर उन्हें विशेषण बना देते हैं। इनका अभ्यास आपकी शब्दावली को स्टेनो में और भी समृद्ध करेगा:
- -शील (Shil): इसके लिए ‘श’ और ‘ल’ के आंकड़े का उपयोग किया जाता है। यहाँ गुरु-मंत्र यह है कि ‘ल’ को हमेशा नीचे की ओर (Downward) बनाना चाहिए ताकि वह ‘शील’ की स्पष्ट ध्वनि दे सके।
- उदाहरण: क्रियाशील, प्रयत्नशील, न्यायशील, प्रगतिशील, विचारशील, सहनशील, गतिशील, मननशील, परिवर्तनशील, विकासशील।
- -शाली (Shali): इसमें ‘श’ और ‘ल’ का उपयोग किया जाता है, लेकिन अंत में ‘ई’ की मात्रा के लिए हुक को थोड़ा बाहर निकाला जाता है।
- उदाहरण: प्रभावशाली, बलशाली, शक्तिशाली, भाग्यशाली, वैभवशाली, गौरवशाली, प्रतिभाशाली, ऐश्वर्यशाली, प्रभावशाली, ओजस्वी-शाली।
- -कारक और -कारी (Karak & Kari): यहाँ ‘क’ को दुगुना (Double Length) करने का नियम लागू होता है। जब हम ‘क-र-क’ को बड़ा कर देते हैं, तो वह ‘कारक’ पढ़ा जाता है। अंत में द्वि-ध्वनिक ई की मात्रा लगाने पर वह ‘कारी’ बन जाता है।
- उदाहरण (कारक): हानिकारक, फलकारक, हितकारक, कष्टकारक, गुणकारक, विनाशकारक, सुखकारक, अनिष्टकारक, लाभकारी-कारक, कल्याणकारक।
- उदाहरण (कारी): लाभकारी, हितकारी, क्रांतिकारी, गुणकारी, अत्याचारी, आज्ञाकारी, परोपकारी, सहकारी, अनर्थकारी, मंगलकारी।
4. संख्यात्मक स्टेनोग्राफी और मुद्रा लेखन (Numerical Shorthand & Currency)
एक कुशल स्टेनोग्राफर कभी भी “दो करोड़ सात लाख” को अंकों में पूरा नहीं लिखता। इसके लिए हम संकेत-अक्षर (Indicator Letters) का उपयोग करते हैं:
- करोड़: संख्या के तुरंत बाद ‘क’ जोड़ें।
- लाख: संख्या के तुरंत बाद ‘ल’ जोड़ें।
- हज़ार: संख्या के तुरंत बाद ‘ह’ जोड़ें।
- सौ: संख्या के तुरंत बाद ‘स’ जोड़ें।
जटिल संख्याओं का संयोजन: सोर्स के अनुसार, यदि आपको लिखना है: “2 करोड़ 7 लाख 35 हजार 502”, तो आपकी पेंसिल कुछ इस तरह चलेगी: 2(क) 7(ल) 35(ह) 5(स) 2
विशेष परिस्थितियाँ और सूक्ष्म नियम:
- 3005 लिखना हो: यहाँ ‘हज़ार’ का संकेत मुख्य है। इसे
3(ह) 5लिखें। छात्र अक्सर यहाँ भ्रमित होकर शून्य लिखने लगते हैं, जिससे गति धीमी हो जाती है। - 11,007 लिखना हो: इसे
11(ह) 7के रूप में लिखें। - 502 लिखना हो: इसे
5(स) 2लिखें। - दशमलव संख्याएँ: यदि ‘5.5 लाख’ लिखना हो, तो 5.5 के साथ छोटा ‘ल’ जोड़ दें।
- रुपये का संकेत: संख्या के नीचे एक छोटा ‘र’ बना देने से वह रुपये का बोध कराता है।
5. संख्याओं के लिए विशेष प्रत्यय: -गुना और -वां
संख्याओं के साथ आने वाले विशेषणों को लिखने के लिए हम निम्नलिखित विधियों का उपयोग करते हैं:
- -गुना (Guna): किसी भी अंक के ठीक नीचे छोटा ‘न’ बनाने से वह ‘गुना’ पढ़ा जाता है।
- उदाहरण: दोगुना (2 के नीचे न), तिगुना (3 के नीचे न), चारगुना (4 के नीचे न), पांचगुना (5 के नीचे न), दसगुना (10 के नीचे न)।
- -वां (Va): संख्या के अंत में ‘व’ का हल्का लेटा हुआ अर्धवृत्त (V-hook) लगाने पर वह ‘वां’ की ध्वनि देता है।
- उदाहरण: सातवां (7 के बाद व), आठवां (8 के बाद व), नौवां (9 के बाद व), दसवां (10 के बाद व), सौवां (100 के बाद व)।
नीचे दिए गए अभ्यास को अपनी स्टेनो नोटबुक में कम से कम 10 बार लिखें। प्रत्येक आउटलाइन स्पष्ट और सटीक होनी चाहिए।
क. अभ्यास के लिए 30 महत्वपूर्ण शब्द:
- शांतिपूर्ण 2. सफलतापूर्वक 3. संतोषजनक 4. सकारात्मक 5. राष्ट्रवाद 6. उत्तरदायित्व 7. दूधवाला 8. विद्यालय 9. क्रियाशील 10. शक्तिशाली 11. हानिकारक 12. क्रांतिकारी 13. गौरवपूर्ण 14. धैर्यपूर्वक 15. आश्चर्यजनक 16. आध्यात्मिक 17. समाजवाद 18. महत्वपूर्ण 19. फलवाला 20. पुस्तकालय 21. प्रयत्नशील 22. प्रभावशाली 23. हितकारी 24. कल्याणकारक 25. मुरादाबाद 26. सतीत्व 27. विचारशील 28. भाग्यशाली 29. विनाशकारी 30. सचिवालय।
ख. अभ्यास के लिए 10 विशेष वाक्य:
- हमें अपना प्रत्येक कार्य शांतिपूर्वक और नियमपूर्वक करना चाहिए।
- समाज में साम्राज्यवाद के विरुद्ध राष्ट्रवाद की लहर अत्यंत प्रभावशाली रही।
- पुस्तकालय में बैठकर पढ़ना एक संतोषजनक अनुभव है।
- दूधवाला प्रतिदिन सुबह मुरादाबाद से ताज़ा दूध लाता है।
- इस वर्ष देश का बजट 5 करोड़ 20 लाख रुपये निर्धारित किया गया है।
- यदि हम प्रयत्नशील रहें, तो परिणाम हमेशा आशाजनक होते हैं।
- किसी भी संस्था में उत्तरदायित्व का निर्वहन विवेकपूर्वक करना चाहिए।
- युद्ध के परिणाम हमेशा विनाशकारी और दुखपूर्ण होते हैं।
- उसने अपनी संपत्ति का दोगुना हिस्सा दान कर दिया।
- आश्चर्यजनक रूप से वह दसवां स्थान प्राप्त करने में सफल रहा।
Expert Tip: हाथ का प्रवाह और पेंसिल की पकड़ स्टेनोग्राफी में आपकी पेंसिल आपके विचारों की गति से चलनी चाहिए। प्रत्यय लगाते समय ध्यान दें कि पेंसिल पर अनावश्यक दबाव न डालें। ‘आत्मक’ जैसे शब्दों में जब आप ‘म’ या ‘त’ से काटते हैं, तो वह कट इतना सूक्ष्म होना चाहिए कि मूल शब्द की पहचान बनी रहे। खड़े शब्दों (जैसे ‘ट’, ‘प’ वर्ग) को ‘म’ से काटना इसलिए सिखाया जाता है क्योंकि खड़ी रेखा को खड़ी रेखा (त) से काटना ज्यामितीय रूप से कठिन होता है और इससे पेंसिल अटक सकती है। अभ्यास के दौरान पेंसिल की नोक को मध्यम रखें न बहुत नुकीली, न बहुत मोटी।
हिंदी स्टेनोग्राफी (Day 23): व्यंजनों को काटने के आधुनिक नियम और गति बढ़ाने के गुप्त मंत्र
स्टेनोग्राफी की दुनिया में एक सर्वकालिक सत्य है: “पेंसिल उठाना गति का सबसे बड़ा शत्रु है।” जब भी एक स्टेनोग्राफर किसी व्यंजन को बीच में से काटने के लिए पेंसिल को कागज की सतह से ऊपर उठाता है, तो एक सूक्ष्म समय अंतराल उत्पन्न होता है जिसे तकनीकी भाषा में ‘पेन-लिफ्ट लेटेंसी’ (Pen-lift Latency) कहते हैं। यद्यपि यह अंतराल एक सेकंड के दसवें हिस्से जैसा प्रतीत होता है, परंतु 100-120 शब्द प्रति मिनट की उच्च गति पर, यह संचयी विलंबता आपके प्रवाह को बाधित कर देती है और आप डिक्टेशन में पीछे छूट जाते हैं।
आज हम Stenography की उस आधुनिक पद्धति पर चर्चा करेंगे जिसमें ‘व्यंजनों को काटने’ की पारंपरिक, समय खपाने वाली विधि का त्याग कर ‘टिक मार्क’ (Tick Mark) और ‘प्रवाह आधारित कटिंग’ (Flow-based Cutting) को अपनाया गया है।
1. व्यंजनों को काटने का मूल नियम: पारंपरिक बनाम आधुनिक
पारंपरिक ‘संकेत-लिपि’ में ‘ख’, ‘छ’, ‘झ’, ‘ध’, ‘थ’ जैसे वर्गों को लिखने के बाद बीच में से एक छोटी रेखा द्वारा काटा जाता था। इस प्रक्रिया में हाथ को रुकना पड़ता था, पेंसिल उठानी पड़ती थी, और फिर उसे काटने के लिए वापस सटीक स्थान पर लाना पड़ता था।
पारंपरिक विधि की समस्याएँ:
- रेखीय प्रवाह का टूटना: हाथ की मांसपेशियां जब एक ‘फ्लो’ में होती हैं, तो अचानक रुकने से उनकी गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) नष्ट हो जाती है।
- सटीकता में कमी: उच्च गति पर पेंसिल उठाकर ठीक बीच में काटना कठिन होता है, जिससे आउटलाइन गंदी हो सकती है।
- मानसिक थकान: हर शब्द पर पेंसिल उठाने का निर्णय लेने से ‘कॉग्निटिव लोड’ (Cognitive Load) बढ़ता है।
आधुनिक विधि (The Tick Mark Method):
आधुनिक विशेषज्ञ निर्देश देते हैं कि अब किसी भी व्यंजन को बीच में से काटने की आवश्यकता नहीं है। इसके स्थान पर हम दो तकनीकों का उपयोग करेंगे:
- प्रारंभिक टिक (Initial Tick): व्यंजन को शुरू करते समय ही एक छोटा सा तिरछा ‘टिक’ लगा दें। इससे मस्तिष्क को तुरंत संकेत मिल जाता है कि यह कटा हुआ वर्ण है।
- अंतिम टिक (Final Tick/Ghundi): जहाँ प्रारंभिक टिक संभव न हो, वहाँ व्यंजन के अंत में एक छोटी सी घुंडी या टिक लगा दी जाती है।
यह तकनीक ‘लाइन ऑफ राइटिंग’ (Line of Writing) को बनाए रखती है और हाथ को एक ‘निरंतर गति’ (Continuous Motion) प्रदान करती है।
2. विस्तृत उदाहरण तालिका: व्यंजनों का रूपांतरण (Transformation Table)
यह तालिका आधुनिक स्टेनोग्राफी के ‘शॉर्टकट’ नियमों का सार है। इसे अपनी अभ्यास पुस्तिका में कम से कम 10 बार अंकित करें।
| मूल व्यंजन | काटने की नई विधि | तकनीक का संक्षिप्त विवरण |
| ख, छ, झ, ध, थ | प्रारंभ में छोटा टिक | रेखाक्षर को आरंभ करने से पूर्व एक तीव्र सूक्ष्म गति से टिक लगाएं। |
| म से ‘न’ बनाना | प्रारंभ में टिक | ‘म’ के वक्र (Curve) की शुरुआत में टिक लगाने से उसे ‘न’ पढ़ा जाता है। |
| न से ‘म’ बनाना | प्रारंभ में टिक | ‘न’ के वक्र की शुरुआत में टिक लगाने से उसे ‘म’ पढ़ा जाता है। |
| ल (कटा हुआ) | अंत में हल्की घुंडी | ‘ल’ के अंत में हाथ को हल्का सा घुमाकर छोड़ें, यह ‘ड़’ या कटे ‘ल’ का संकेत है। |
| र (कटा हुआ) | अंत में सूक्ष्म टिक | ‘र’ के अंत में दिशा के विपरीत एक छोटा टिक लगाएं। |
| फ, भ | प्रारंभिक टिक | ‘प’ और ‘ब’ के प्रारंभ में टिक लगाकर ‘फ’ और ‘भ’ प्राप्त करें। |
3. अभ्यास हेतु शब्द सूचियाँ (Stroke-by-Stroke Analysis)
केवल शब्दों को जानना पर्याप्त नहीं है, उन्हें ‘फ्लो’ में बनाना सीखना होगा। यहाँ स्रोत में दिए गए महत्वपूर्ण शब्दों का सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत है:
(A) प्रारंभिक टिक वाले शब्द (Initial Tick Mastery)
- छत: ‘छ’ के लिए पहले एक छोटा प्रारंभिक टिक लगाएं और बिना हाथ रोके नीचे की ओर ‘त’ का रेखाक्षर खींचें।
- खत: ‘ख’ के लिए प्रारंभिक टिक मारते हुए क्षैतिज रेखा (Horizontal line) खींचें और तुरंत ‘त’ जोड़ें।
- कण: यहाँ ‘न’ को ‘ण’ के रूप में प्रयोग किया गया है। ‘क’ के बाद ‘न’ का वक्र बनाएं।
- कल: ‘क’ के बाद ‘ल’ का उर्ध्वगामी (Upward) रेखाक्षर बनाएं, अंत में हल्की घुंडी (Tick) मारें ताकि वह विशिष्ट दिखे।
- थन: ‘थ’ के लिए प्रारंभिक टिक के साथ वक्र शुरू करें और ‘न’ के साथ समाप्त करें।
- खत: ‘ख’ का प्रारंभिक टिक + ‘त’।
(B) अंतिम टिक वाले शब्द (Final Tick Precision)
- रख: ‘र’ (ऊपर जाने वाला) बनाएं और उसके अंत में एक छोटा टिक मारें। यह टिक संकेत देता है कि यह ‘क’ नहीं बल्कि ‘ख’ है।
- पेड़: ‘प’ बनाएं, फिर ‘ल’ का रेखाक्षर बनाएं और अंत में हल्की घुंडी या टिक दें। ‘ल’ को काटकर ‘ड़’ पढ़ने का यह सबसे तेज तरीका है।
- जड़: ‘ज’ के साथ ‘ल’ और अंत में सूक्ष्म टिक।
- मिशन: ‘म’, ‘स’ का वृत्त और अंत में ‘न’ का टिक। यहाँ पेंसिल उठाए बिना ‘न’ को स्पष्ट किया गया है।
(C) संयुक्त शब्द और आँकड़ों के साथ अभ्यास
- भर: ‘भ’ के लिए प्रारंभिक टिक और साथ में ‘र’ का आँकड़ा या पूर्ण रेखाक्षर।
- भर कर: ‘भर’ की आउटलाइन को ही थोड़ा लंबा करें या ‘कर’ के प्रत्यय का प्रयोग करें।
- धन: ‘ध’ का प्रारंभिक टिक और ‘न’ का वक्र।
- धूल: ‘ध’ का टिक + ‘ल’ का उर्ध्वगामी रेखाक्षर।
- खेलना: ‘ख’ का प्रारंभिक टिक + ‘ल’ + ‘ना’ का आँकड़ा।
- धर्म: ‘ध’ का टिक + ‘र’ + ‘म’। इसे एक ही स्ट्रोक में लिखें।
- फसल: ‘फ’ का प्रारंभिक टिक + ‘स’ का वृत्त + ‘ल’।
- भविष्य: ‘भ’ का टिक + ‘व’ + ‘स’ का वृत्त + ‘य’ का आँकड़ा।
- दक्षता / रक्षा: ‘द’ के साथ ‘छ’ का टिक मार्क प्रयोग करें। ‘रक्षा’ में ‘र’ के बाद ‘छ’ का टिक और ‘आ’ की मात्रा।
- रथ / मुख: ‘र’ + ‘थ’ (टिक) / ‘म’ + ‘ख’ (अंतिम टिक)।
- खरीदना: ‘ख’ के लिए प्रारंभिक टिक, फिर ‘र’ का आँकड़ा, ‘द’ और अंत में ‘ना’ का हुक।
4. संदर्भ और बोध का नियम (The Rule of Context and Sense)
स्टेनोग्राफी केवल हाथ की कला नहीं, बल्कि भाषाई तर्क (Linguistic Logic) का खेल है। स्रोत के अनुसार, हर बार व्यंजन को काटना अनिवार्य नहीं है। इसे ‘सेंस’ का नियम कहते हैं।
भाषाई अतिरेक (Linguistic Redundancy) का सिद्धांत:
जब हम कोई वाक्य पढ़ते हैं, तो हमारा मस्तिष्क अगले शब्द का पूर्वानुमान लगा लेता है। यदि आपने किसी व्यंजन को नहीं काटा है, तब भी वाक्य का अर्थ आपको सही शब्द तक ले जाएगा।
उदाहरण 1: “राम पेड़ से फल (पल) तोड़ता है” मान लीजिए आपने ‘फ’ को नहीं काटा और वह ‘प’ जैसा दिख रहा है। जब आप अनुवाद करेंगे, तो आप पढ़ेंगे “राम पेड़ से पल तोड़ता है।” आपका मस्तिष्क तुरंत हस्तक्षेप करेगा कि ‘पल’ तोड़ना अर्थहीन है, यहाँ निश्चित रूप से ‘फल’ ही होगा। अतः, समय बचाने के लिए ‘फल’ के ‘फ’ को न काटना भी एक बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय है।
उदाहरण 2: “राम बाजार से सब्जी खरीदने (गरीदने) गया” यहाँ यदि आपने ‘ख’ को नहीं काटा और वह ‘क’ या ‘ग’ जैसा प्रतीत हो रहा है, तो “गरीदने” या “करीदने” जैसा कोई सार्थक शब्द हिंदी शब्दकोश में सब्जी के संदर्भ में नहीं है। वाक्य का प्रवाह स्वतः सिद्ध कर देगा कि यह ‘खरीदने’ है।
उदाहरण 3: ‘तोड़ता’ बनाम ‘तरता’ स्रोत में उल्लेख है कि ‘ड़’ को काटने के लिए पेंसिल उठानी पड़ती है। “राम पेड़ से फल तोड़ता है।” यदि आप ‘ड़’ को न काटें और वह ‘र’ जैसा दिखे, तो वाक्य बनेगा “राम पेड़ से फल तरता है।” चूँकि ‘तरता’ यहाँ फिट नहीं बैठता, आप इसे ‘तोड़ता’ ही पढ़ेंगे।
विशेषज्ञ चेतावनी: यह नियम केवल तभी लागू करें जब आपकी पकड़ भाषा पर मजबूत हो। जहाँ दो शब्दों में भ्रम की स्थिति हो (जैसे ‘खाना’ और ‘गाना’), वहाँ काटना अनिवार्य है।
5. प्रारंभिक ‘अ/आ’ स्वर जोड़ने का नियम (Initial Vowel Attachment)
पेंसिल उठाने का दूसरा बड़ा कारण है शब्द के शुरू में आने वाले ‘अ’ या ‘आ’ स्वर। नई तकनीक: शब्द के शुरू में ही एक छोटा सा ‘हुक’ या ‘टिक’ जोड़ दें जो ‘आ’ का प्रतिनिधित्व करे।
- आम: ‘आ’ का छोटा हुक + ‘म’ का रेखाक्षर।
- आय / आयु: ‘आ’ का हुक + ‘य’। ‘आयु’ के लिए अंत में ‘उ’ का स्वर लगा सकते हैं।
- आत्म: ‘आ’ का हुक + ‘त’ + ‘म’।
- आदर / आदर्श: ‘आ’ का हुक + ‘दर’ का चाप/रेखाक्षर।
प्रो-टिप: कई छात्र भ्रमित होते हैं कि ‘आ’ का यह टिक ‘ध’ जैसा लग सकता है। यहाँ फिर से ‘सेंस’ का नियम काम आता है। ‘धदर’ या ‘धदर्श’ जैसे कोई शब्द नहीं होते, इसलिए इसे ‘आदर’ या ‘आदर्श’ ही पढ़ा जाएगा। शुरू में स्वर जोड़ने से आप हर शब्द में कम से कम 0.5 सेकंड बचाते हैं।
6. आगामी पाठों की रूपरेखा (Future Roadmap)
Day 23 के साथ आपका बुनियादी ढांचा तैयार हो चुका है। अब हम वास्तविक ‘स्पीड बिल्डिंग’ की ओर बढ़ रहे हैं:
- शब्द चिन्ह (Word Signs): अगले 2-3 दिनों में हम उन शब्दों को सीखेंगे जिन्हें केवल एक बिंदु या छोटी रेखा से दर्शाया जाता है।
- वाक्यांश (Phrases): “किया जा रहा है”, “हो सकता है” जैसे बड़े वाक्यांशों को एक साथ जोड़कर लिखना।
- रामधारी गुप्ता अभ्यास: खंड 1 और 2 की आउटलाइन्स का अभ्यास शुरू होगा।
- नकल और इमला: अब आपको प्रतिदिन कम से कम 2 पेज की नकल (Copying) और 10 मिनट का इमला (Dictation) लेना अनिवार्य है।
7. विशेषज्ञ सुझाव और निष्कर्ष: गति का मनोविज्ञान
स्टेनोग्राफी में 80 WPM से 120 WPM तक का सफर शारीरिक से अधिक मानसिक है। जब आप ‘काटने’ वाले नियमों को त्यागकर ‘टिक’ और ‘सेंस’ का उपयोग करते हैं, तो आप अपने मस्तिष्क की निर्णय लेने की क्षमता को सरल बना रहे होते हैं।
टाइपिंग का महत्व: याद रखें, आप कितनी भी तेज स्टेनो लिख लें, अंततः आपको उसे कंप्यूटर पर टाइप करना होगा। यदि आपकी टाइपिंग स्पीड 40-50 WPM नहीं है, तो आपकी स्टेनो की मेहनत व्यर्थ है। अपनी टाइपिंग गति और सटीकता को निखारने के लिए typingmasterpro.com जैसे डिजिटल संसाधनों का नियमित उपयोग करें। टाइपिंग और स्टेनो एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
निष्कर्ष: आज की कक्षा का सार यह है कि ‘पेंसिल का कागज से जुड़ाव’ ही आपकी सफलता की कुंजी है। इस अध्याय में दिए गए नियमों को केवल पढ़ें नहीं, बल्कि प्रत्येक शब्द की आउटलाइन को कम से कम 20 बार बनाएं। जब तक आपका हाथ बिना सोचे ‘ख’ के लिए टिक न लगाने लगे, तब तक अभ्यास जारी रखें।
8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: क्या बिना काटे व्यंजन पढ़ना सुरक्षित है? उत्तर: शत-प्रतिशत सुरक्षित है, बशर्ते आप वाक्य के संदर्भ को समझ रहे हों। परीक्षा के दबाव में ‘सेंस’ का नियम ही सबसे अधिक काम आता है।
प्रश्न 2: क्या मुझे अपनी पुरानी आदत (बीच में काटने की) तुरंत छोड़ देनी चाहिए? उत्तर: हाँ। जितनी जल्दी आप ‘टिक पद्धति’ अपनाएंगे, आपकी मांसपेशियों की स्मृति (Muscle Memory) उतनी ही बेहतर होगी। पुरानी पद्धति आपकी गति को एक निश्चित सीमा पर रोक देगी।
प्रश्न 3: ‘आ’ का टिक और ‘ध’ के टिक में अंतर कैसे करें? उत्तर: इनके कोण (Angle) में सूक्ष्म अंतर होता है, परंतु सबसे बड़ा अंतर ‘संदर्भ’ का है। वाक्य को पढ़ते समय आप कभी भी ‘आदर’ को ‘धदर’ नहीं पढ़ेंगे।
प्रश्न 4: पेंसिल उठाना गति को वास्तव में कितना धीमा करता है? उत्तर: वैज्ञानिक शोध और ‘पेन-लिफ्ट लेटेंसी’ के अनुसार, यदि आप एक मिनट के डिक्टेशन में 50 बार पेंसिल उठाते हैं, तो आप लगभग 5-7 शब्द लिखने का समय केवल पेंसिल को हवा में घुमाने में नष्ट कर देते हैं।
प्रश्न 5: क्या यह नियम सभी प्रणालियों (Systems) में लागू होता है? उत्तर: यह आधुनिक ऋषि प्रणाली और विशिष्ट मानक प्रणालियों का निचोड़ है। यह तकनीक सार्वभौमिक रूप से गति बढ़ाने के लिए स्वीकृत है।

Hindi Stenography Day 24: शब्द चिन्ह (Word Signs) सीखने का सबसे आसान तरीका
24वें दिन का अध्याय आपके पूरे करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित होने वाला है। आज हम उस विषय पर चर्चा करेंगे जिसे मैं व्यक्तिगत रूप से शॉर्टहैंड (आशुलिपि) का ‘दिल’ (Heart) मानता हूँ। जिस तरह मानव शरीर के बिना हृदय के कार्य नहीं कर सकता, ठीक उसी प्रकार स्टेनोग्राफी में बिना ‘शब्द चिन्ह’ (Word Signs) के आप गति और शुद्धता की कल्पना भी नहीं कर सकते।
जब आप डिक्टेशन लिखना शुरू करते हैं, तो आपका लक्ष्य केवल शब्दों को लिखना नहीं, बल्कि वक्ता की गति के साथ तालमेल बिठाना होता है। यदि आप 80, 100 या 120 शब्द प्रति मिनट की गति प्राप्त करना चाहते हैं, तो शब्द चिन्ह ही वह जादुई चाबी है जो आपके लिए यह रास्ता खोलेगी। स्टेनोग्राफी के बारे में और अधिक तकनीकी और ऐतिहासिक जानकारी के लिए आप आशुलिपि के आधिकारिक विकिपीडिया पेज का अवलोकन कर सकते हैं। चलिए, आज के इस अत्यंत महत्वपूर्ण और उत्साहवर्धक अध्याय की गहराई में उतरते हैं।
शब्द चिन्ह क्या हैं? (Word Signs)
किसी भी भाषा, विशेषकर हिंदी में, कुछ शब्द ऐसे होते हैं जो लगभग हर वाक्य में बार-बार दोहराए जाते हैं। उदाहरण के लिए ‘है’, ‘को’, ‘में’, ‘ने’, ‘का’, ‘कि’, ‘उस’, ‘तुम’ आदि। यदि हम इन शब्दों को हर बार व्यंजनों और मात्राओं के पूर्ण नियमों के साथ जोड़कर लिखेंगे, तो हमारी कलम की गति बहुत धीमी हो जाएगी।
सोर्स ट्रांसक्रिप्ट के अनुसार, इन्हीं बार-बार आने वाले शब्दों के लिए शॉर्टहैंड में विशिष्ट और निश्चित प्रतीक (Fixed Symbols) निर्धारित कर दिए गए हैं। इन्हीं प्रतीकों को ‘शब्द चिन्ह’ कहा जाता है।
शब्द चिन्हों की मुख्य विशेषताएं और नियम:
- निश्चितता (Fixed Nature): एक शब्द के लिए जो चिन्ह निर्धारित कर दिया गया है, वह पूरी स्टेनोग्राफी में वैसा ही रहेगा। आपको इसे बार-बार बदलना नहीं है।
- निर्धारित रेखा स्थिति (Line Positioning): शब्द चिन्हों का सबसे बड़ा रहस्य उनकी रेखा पर स्थिति में छिपा है। ये तीन स्थितियों में लिखे जाते हैं:
- रेखा के ऊपर (Above the line): सामान्यतः प्रथम स्थान की मात्रा (जैसे ‘आ’) वाले शब्दों के लिए।
- रेखा पर (On the line): द्वितीय स्थान की मात्रा (जैसे ‘ए’, ‘ओ’) वाले शब्दों के लिए।
- रेखा को काटते हुए (Through the line): तृतीय स्थान की मात्रा (जैसे ‘इ’, ‘उ’) वाले शब्दों के लिए।
- आकार का महत्व (Size Matters): शब्द चिन्हों को सामान्य व्यंजनों की तुलना में बहुत छोटा (लगभग आधा या उससे भी कम) बनाया जाता है ताकि वे लिखते समय कम से कम समय लें।
- कुल संख्या: पूरी हिंदी शॉर्टहैंड प्रणाली में लगभग 400 से 500 महत्वपूर्ण शब्द चिन्ह होते हैं, जिनमें से आज हम प्रथम 100+ पर महारत हासिल करेंगे।
शब्द चिन्हों के प्रकार (Types of Word Signs)
अध्ययन और अभ्यास को आसान बनाने के लिए हम इन्हें दो मुख्य श्रेणियों में बाँट सकते हैं:
1. तार्किक शब्द चिन्ह (Logical Signs)
ये वे चिन्ह हैं जिनमें शॉर्टहैंड के मूल व्यंजनों (Consonants) का उपयोग किया जाता है। इनमें व्यंजनों की लंबाई कम कर दी जाती है या उनमें छोटे आंकड़े (Hooks) जोड़ दिए जाते हैं। इन्हें याद रखना आसान होता है क्योंकि ये व्याकरणिक नियमों का पालन करते हैं।
2. रटने वाले शब्द चिन्ह (Memorized/Rote Learning Signs)
कुछ शब्द चिन्ह ऐसे होते हैं जिनका शॉर्टहैंड के व्यंजनों से कोई सीधा संबंध नहीं होता। ये पूरी तरह से प्रतीकात्मक होते हैं। जैसे ‘कौन’ या ‘कुछ’ के लिए त्रिकोणीय चिन्ह। इन्हें आपको बार-बार लिखकर अपने अवचेतन मन (Subconscious mind) में बैठाना होगा।
विशेष प्रो-टिप: आज से ही इन शब्द चिन्हों के लिए एक अलग ‘डेडिकेटेड रजिस्टर’ बना लें। प्रत्येक चिन्ह के लिए कम से कम 5-10 पेज का अभ्यास अनिवार्य है।
प्राथमिक शब्द चिन्ह: विस्तृत व्याख्या और अभ्यास (Detailed Breakdown)
आइए, अब उन प्राथमिक शब्द चिन्हों को समझते हैं जो आपके डिक्टेशन का 60-70% हिस्सा कवर करते हैं।
1. संख्या, स्थान और कारक चिन्ह
इन चिन्हों की बनावट को बहुत बारीकी से देखें।
- एक: इसके लिए कॉपी की रेखा के ऊपर हवा में एक छोटी और स्पष्ट बिंदी (Dot) लगाई जाती है। यह पूरी तरह रटने वाला चिन्ह है।
- दो: यहाँ बहुत सावधानी की आवश्यकता है। यदि ‘दो’ का प्रयोग संख्या (1, 2, 3) के लिए हो रहा है, तो सीधे गणितीय अंक ‘2’ लिख दें। लेकिन यदि यह क्रिया (Verb) के रूप में आए (जैसे: ‘मुझे पानी दो’), तो आपको ‘द’ व्यंजन में ‘ओ’ की मात्रा लगाकर पूरा लिखना चाहिए ताकि अनुवाद में भ्रम न हो।
- ऊपर और पर: इन दोनों के लिए ‘प’ व्यंजन में ‘र’ का छोटा सा आंकड़ा (p-r hook) लगाया जाता है।
- ऊपर: इसे रेखा के ऊपर हवा में बनाया जाता है और इसके शुरुआती हिस्से में ‘ऊ’ की सूक्ष्म मात्रा लगा दी जाती है।
- पर: इसे रेखा के स्पर्श करते हुए बनाया जाता है। इसकी लंबाई सामान्य व्यंजन से आधी होती है।
- में: इसे रेखा पर एक बहुत छोटी और हल्की तिरछी लकीर या बिंदु के समान सूक्ष्म रूप में बनाया जाता है।
अभ्यास वाक्य:
- एक राजा के दो बेटे थे। (यहाँ संख्या ‘दो’ का प्रयोग करें)
- मेज के ऊपर पुस्तक रखी है और जमीन पर कागज।
- उसने में (अंदर) झाँककर देखा।
2. ‘मैं’ समूह और इसके रूपांतरण (I and its variations)
‘मैं’ से संबंधित शब्द चिन्ह रेखा के ऊपर बनाए जाते हैं। इनमें ‘टिक’ (Tick) का प्रयोग होता है।
- मैं: एक सीधी खड़ी टिक जो ऊपर की ओर जाती है।
- मैंने: ‘मैं’ की टिक में ‘ने’ का हल्का झुकाव जोड़ दें। हाथ की गति को झटका न दें, इसे सुचारू रखें।
- मुझे: ‘मैं’ की टिक को ऊपर की ओर मोड़कर (हुक जैसा) बनाया जाता है।
- मेरा: ‘मैं’ की टिक के साथ ‘रा’ का सूक्ष्म संकेत जोड़कर इसे हवा में (ऊपर) बनाया जाता है।
- मुझको: ‘मुझ’ के चिन्ह में ‘को’ की दिशा वाली टिक जोड़ दी जाती है।
अभ्यास वाक्य:
- मैंने उसे बुलाया लेकिन उसने मुझे नहीं देखा।
- मेरा काम समय पर पूरा हो गया है।
- मुझको आज दिल्ली जाना है।
3. सहायक क्रियाएं: ‘है’, ‘हो’, ‘हूँ’ (Auxiliary Verbs)
इनके लिए ‘ह’ व्यंजन के सूक्ष्म स्वरूप का प्रयोग होता है।
- है: इसे रेखा के ऊपर छोटा ‘ह’ (ऊपर से नीचे आने वाला) बनाकर दर्शाते हैं।
- हो: रेखा के ऊपर छोटा ‘ह’ बनाकर उसके मध्य में ‘ओ’ की मात्रा वाली बिंदी लगा देते हैं।
- हूँ: इसे रेखा पर (Touch the line) छोटा सा ‘ह’ बनाकर दर्शाते हैं।
अभ्यास वाक्य:
- वह घर पर है और मैं यहाँ हूँ।
- तुम क्या कर रहे हो?
सर्वनामों का महा-तुलना चक्र (Pronoun Comparison Table)
शॉर्टहैंड में ‘उस’, ‘तुम’, ‘उन’ और ‘हम’ के बीच भ्रम होना सबसे बड़ी समस्या है। नीचे दी गई तालिका आपकी इस समस्या को जड़ से खत्म कर देगी।
| शब्द समूह | मूल आकृति | रेखा पर स्थिति | विवरण |
| उस (Us) | सीधी टिक (/) | रेखा पर | एक छोटी 45 डिग्री वाली तिरछी लकीर। |
| तुम (Tum) | उल्टा ‘U’ (∩) | रेखा पर | यह एक छोटा सा उल्टा अर्धवृत्त जैसा है। |
| हम (Ham) | उल्टा ‘U’ (∩) | रेखा के ऊपर | ‘तुम’ का ही रूप, लेकिन हवा में (ऊपर)। |
| उन (Un) | छोटा ‘V’ (∨) | रेखा पर | ‘व’ व्यंजन का आधा और सूक्ष्म रूप। |
विस्तृत रूपांतरण तालिका
| शब्द | प्रतीक का विवरण और हाथ की गति |
| उसने | ‘उस’ की टिक (/) में ‘ने’ का झुकाव नीचे की तरफ। |
| उसे | ‘उस’ की टिक को सीधा आगे की तरफ बढ़ा देना। |
| उसका / उसको | ‘उस’ के साथ क्रमशः ‘का’ और ‘को’ की छोटी टिक जोड़ना। |
| तुमने | उल्टा ‘U’ बनाकर अंत में ‘ने’ की टिक नीचे खींचना। |
| तुम्हें | उल्टा ‘U’ बनाकर उसे सीधा ऊपर की तरफ ले जाना। |
| तुम्हारा | उल्टा ‘U’ के साथ ‘रा’ का घुमावदार संकेत जोड़ना। |
| तुमको | उल्टा ‘U’ बनाकर अंत में ‘को’ की छोटी टिक जोड़ना। |
| उन्हे | ‘उन’ (V आकृति) के मध्य में स्पष्टता के लिए एक बिंदी लगाना। |
| उनका / उनको | ‘उन’ (V) के साथ ‘का’ और ‘को’ की सूक्ष्म दिशात्मक टिक। |
सामान्य त्रुटि: छात्र अक्सर ‘तुम’ (रेखा पर) और ‘हम’ (रेखा के ऊपर) के बीच भ्रमित हो जाते हैं। याद रखें, ‘हम’ में ‘अ’ की ध्वनि है जो प्रथम स्थान (ऊपर) को दर्शाती है।
क्रिया आधारित शब्द चिन्ह (Verb-Based Signs)
क्रियाओं के बिना स्टेनोग्राफी अधूरी है। यहाँ ‘आना’, ‘जाना’, ‘होना’ जैसी क्रियाओं के लिए शॉर्टकट दिए गए हैं:
- हुआ, हुई, हुए: ‘ह’ व्यंजन को पूरा रेखा पर बनाया जाता है।
- हुआ: केवल ‘ह’।
- हुई: ‘ह’ के अंत में ‘ई’ की मात्रा की बिंदी।
- हुए: ‘ह’ के बीच में ‘ए’ की मात्रा की बिंदी।
- होता और होना: यहाँ आंकड़ों (Hooks) का जादू चलता है।
- होता: ‘ह’ व्यंजन के साथ ‘त’ का छोटा आंकड़ा।
- होना: ‘ह’ व्यंजन के साथ ‘न’ का छोटा आंकड़ा।
- किया और क्या: ‘क’ व्यंजन को बिना किसी टिक के पूरा बनाने पर वह संदर्भ के अनुसार ‘किया’ या ‘क्या’ पढ़ा जाता है। इसे रेखा पर बनाया जाता है।
- आएंगे और आगे: ‘ग’ व्यंजन के साथ शुरुआत में ‘आ’ की सूक्ष्म टिक लगाई जाती है। ‘आगे’ के लिए अंत में ‘ए’ की मात्रा का संकेत दिया जाता है।
- गया, गए, गई: ‘ग’ व्यंजन के साथ ‘य’ के आंकड़े का प्रयोग होता है। यह एक स्मूथ कर्व (घुमाव) की तरह दिखता है।
अभ्यास वाक्य:
- वह बाजार गया था पर अब घर आ गया है।
- ऐसा काम नहीं होना चाहिए था, जो हुआ वह बुरा था।
- क्या आपने अपना होमवर्क किया?
स्थान बताने वाले शब्दों के लिए एक अत्यंत सरल और तार्किक नियम है। इसमें मूल व्यंजन के अंत में एक आधा ‘ह’ (Half ‘h’) ऊपर की ओर जोड़ दिया जाता है। इसकी आकृति एक छोटी सी चोंच जैसी लगती है।
- कहाँ: ‘क’ व्यंजन + छोटा आधा ‘ह’ (ऊपर की तरफ)।
- जहाँ: ‘ज’ व्यंजन + छोटा आधा ‘ह’।
- वहाँ: ‘व’ व्यंजन + छोटा आधा ‘ह’।
- यहाँ: ‘य’ व्यंजन + छोटा आधा ‘ह’।
- तहाँ: ‘त’ व्यंजन + छोटा आधा ‘ह’।
सावधानी: इस आधे ‘ह’ को बहुत छोटा रखें। यदि आप इसे बड़ा कर देंगे, तो यह पूरा ‘ह’ व्यंजन पढ़ा जाएगा और शब्द का अर्थ बदल जाएगा।
अभ्यास वाक्य:
- तुम कहाँ जा रहे हो?
- जहाँ चाह है, वहाँ राह है।
- यहाँ कोई नहीं आया था।
महत्वपूर्ण शब्दावली: द, थ, और ब वर्ग (Consonant Clusters)
ये वे शब्द हैं जो डिक्टेशन में बहुत अधिक भ्रम पैदा करते हैं क्योंकि इनकी ध्वनियाँ आपस में मिलती-जुलती हैं।
द (D) Group – रेखा पर स्थिति का खेल
- यदि: रेखा पर केवल ‘द’ व्यंजन। इसे छोटा रखें।
- दे: ‘द’ के साथ ‘ए’ की मात्रा।
- देना / दिन: इन दोनों के लिए ‘द’ में ‘न’ का आंकड़ा लगाया जाता है। इनकी पहचान वाक्य के अर्थ (Context) से होती है। जैसे- “पैसे देना” और “आज का दिन“।
- दिया: केवल ‘द’ व्यंजन। (यदि और दिया में अंतर करने के लिए ‘दिया’ में छोटी ‘इ’ का संकेत दे सकते हैं)।
- दान: ‘द’ और ‘न’ को स्पष्ट मात्रा के साथ पूरा लिखें।
थ (Th) Group – कटा हुआ व्यंजन
- हाथ: रेखा के ऊपर छोटा ‘थ’ (शुरुआत में कटा हुआ)। इसे बहुत सूक्ष्म बनाएं।
- था, थी, थे: छोटा ‘थ’ बनाकर बिंदी (Vowel) की स्थिति से अंतर स्पष्ट करें। ‘थी’ के लिए अंत में बिंदी और ‘थे’ के लिए मध्य में।
ब (B) Group – लाइन काटने वाले शब्द
- बड़ा, बड़े, बड़ी: रेखा पर ‘ब’ व्यंजन बनाकर मात्रा के अनुसार बिंदी लगाएं।
- बहुत और बुरा: यहाँ सबसे महत्वपूर्ण नियम है। चूंकि ‘बहुत’ और ‘बुरा’ में ‘उ’ (तीसरे स्थान की मात्रा) की ध्वनि है, इसलिए ‘ब’ व्यंजन को रेखा काटकर (Through the line) बनाया जाता है। यह गति बढ़ाने का सबसे बेहतरीन तरीका है।
- बात: ‘ब’ व्यंजन में ‘त’ का आंकड़ा जोड़कर रेखा के ऊपर या मध्य में बनाया जाता है।
अभ्यास वाक्य:
- यह बहुत बड़ी बात है कि उसने दान दिया।
- उस दिन उसके हाथ में थोड़ा दर्द था।
- यदि वह आता, तो मैं उसे पैसे देता।
विशेष और जटिल शब्द चिन्ह (Special Signs)
कुछ शब्द ऐसे होते हैं जो बार-बार आते हैं लेकिन उन्हें तार्किक रूप से बनाना कठिन होता है। इनके लिए विशेष नियम हैं:
- अत और अति: ‘त’ व्यंजन के अंत में दो विसर्ग जैसी बिंदियाँ लगाने से वह ‘अत’ पढ़ा जाता है। ‘अति’ के लिए ‘त’ के साथ अंत में ‘ई’ की मात्रा जोड़ दी जाती है।
- अत्यंत और इत्यादि: ‘त’ व्यंजन को इसके सामान्य आकार से थोड़ा बड़ा (Enlarged) कर दिया जाता है। ‘अत्यंत’ के लिए इसे रेखा काटकर बनाया जाता है। यदि इसके साथ अंत में ‘ई’ की बिंदी लगा दें, तो यह ‘इत्यादि’ बन जाता है।
- यद्यपि और पीछे: ये ‘रटने’ वाले शब्दों की श्रेणी में आते हैं।
- यद्यपि: ‘ध’ और ‘प’ के संयुक्त स्वरूप को थोड़ा खींचकर बड़ा बनाया जाता है। इसे शुरू में काटना अनिवार्य है।
- पीछे: इसमें ‘प’ और ‘छ’ के संकेत को जोड़कर बीच में ‘ए’ की मात्रा दी जाती है।
- कैसा, किस, किसलिए:
- कैसा: ‘क’ व्यंजन में ‘स’ का छोटा वृत्त (Circle) जोड़ें।
- किस: इसी ‘कैसा’ को रेखा पर (On the line) ले आएं।
- किसलिए: ‘क’ + ‘स’ का वृत्त + ‘ल’ का संकेत। यह एक प्रवाह में बनना चाहिए।
- संपूर्ण और समय: ‘स’ के वृत्त को ‘म’ व्यंजन के साथ मिलाकर एक बहुत ही छोटा चिन्ह बनाया जाता है। यह चिन्ह ‘संपूर्ण’ और ‘समय’ दोनों के लिए काम करता है।
अभ्यास के स्वर्णिम नियम (Rules for Master Practice)
शॉर्टहैंड में केवल जान लेना पर्याप्त नहीं है, उसे ‘उंगलियों की स्मृति’ (Muscle Memory) में लाना जरूरी है।
- छोटा ही सुंदर है: शब्द चिन्हों को हमेशा छोटा और सटीक बनाएं। यदि आप ‘का’ को बहुत लंबा बना देंगे, तो वह ‘क’ व्यंजन पढ़ा जाएगा। शुद्धता के लिए आकार पर नियंत्रण रखें।
- रेखा की स्थिति ही जीवन है: एक स्टेनोग्राफर के लिए रेखा (Line) पवित्र है। यदि आपने ‘को’ को रेखा के ऊपर बना दिया, तो वह ‘का’ पढ़ा जाएगा। अपनी रेखा स्थिति पर कभी समझौता न करें।
- पेन बनाम पेंसिल: शुरुआती अभ्यास के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली शॉर्टहैंड पेंसिल का उपयोग करें ताकि आप गहरे और हल्के दबाव के अंतर को समझ सकें।
- प्रतिदिन 100 बार: प्रत्येक चिन्ह को तब तक लिखें जब तक कि वह शब्द कान में पड़ते ही आपका हाथ बिना सोचे उसे कागज पर न उकेर दे।
- टाइपिंग गति: केवल शॉर्टहैंड लिखना ही काफी नहीं है, उसे कंप्यूटर पर टाइप करना भी आना चाहिए। अपनी टाइपिंग स्किल्स सुधारने के लिए हमारे Hindi Typing Course को अवश्य देखें।
हिंदी स्टेनोग्राफी कोर्स Day 25: शब्द चिन्ह (Shabd Chinh) याद करने का सबसे आसान तरीका – Part 2
यदि आप आज इस अध्याय तक पहुँचे हैं, तो इसका स्पष्ट अर्थ है कि आपने पिछले 24 दिनों के कड़े अभ्यास और वर्णमाला के जटिल नियमों पर विजय प्राप्त कर ली है। यह लेख हमारे पिछले सत्र “शब्द चिन्ह – भाग 1” की अगली कड़ी है, और आज का यह पाठ आपकी गति (Speed) और सटीकता (Accuracy) के निर्धारण में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाला है। स्टेनोग्राफी में शब्द चिन्ह (Word Signs) का महत्व वैसा ही है जैसे गणित में सूत्रों (Formulas) का होता है। एक सामान्य लेखक जब ‘संपूर्ण’ या ‘यथार्थ’ जैसे शब्दों को लिखता है, तो उसे कई वर्णों और मात्राओं का संयोजन करना पड़ता है, जिसमें बहुमूल्य सेकंड नष्ट होते हैं। इसके विपरीत, एक कुशल स्टेनोग्राफर उसी शब्द को पलक झपकते ही एक छोटी सी रेखा या आकृति में बदल देता है। यही वह कला है जो आपको 80 से 120 शब्द प्रति मिनट की जादुई गति तक ले जाती है।
आज के इस व्यापक गाइड में, हम सर्वनामों (Pronouns) के विशाल संसार और उनके साथ जुड़ने वाले कारक चिन्हों (Case Endings) की वैज्ञानिक पद्धति को समझेंगे। अक्सर छात्र सर्वनामों के शब्द चिन्हों में भ्रमित हो जाते हैं क्योंकि ‘मैं’, ‘हम’, ‘तुम’, ‘इस’, ‘इन’, ‘उस’ और ‘उन’ के संकेतों में बहुत ही सूक्ष्म अंतर होता है। इस लेख में, मैं आपको उन बारीकियों के बारे में बताऊंगा जो मैंने अपने वर्षों के अनुभव में सीखी हैं। हम केवल यह नहीं सीखेंगे कि क्या लिखना है, बल्कि यह भी समझेंगे कि हाथ की दिशा, स्ट्रोक का झुकाव और लाइन पर उसकी स्थिति (Positioning) कैसे अर्थ बदल देती है।
याद रखें, Day 25 एक मील का पत्थर है। यहाँ से आपकी लेखन शैली में परिपक्वता आएगी। हम ‘समय’ और ‘संपूर्ण’ जैसे भ्रमित करने वाले शब्दों से लेकर ‘यथेष्ट’ और ‘अंग्रेजी’ जैसे उन्नत शब्दों के निर्माण की प्रक्रिया को विस्तार से देखेंगे। यदि आप इस पाठ में बताए गए प्रत्येक स्ट्रोक का 100-100 बार अभ्यास करते हैं, तो डिक्टेशन के समय आपका हाथ बिना सोचे, स्वचालित रूप से चलेगा। आइए, शब्द चिन्हों के इस मास्टरक्लास को शुरू करते हैं।
1. समय और संपूर्ण: सूक्ष्म अंतर की पहचान (Mastering ‘Samay’ and ‘Sampurn’)
स्टेनोग्राफी में कई बार दो अलग-अलग शब्दों के लिए एक ही मूल आकृति का सुझाव दिया जाता है, जो पूरी तरह से वाक्य के संदर्भ (Sense) पर निर्भर करता है। ‘समय’ और ‘संपूर्ण’ इसी श्रेणी के शब्द हैं। मूलतः, इन दोनों के लिए ‘श’ का वृत्त और ‘म’ की रेखा (श-म) का उपयोग किया जाता है।
| शब्द | संकेत की बनावट और स्थिति | विभेदीकरण की तकनीक (Pro-Tip) |
| समय | लाइन पर ‘श’ का छोटा गोला और ‘म’ की आड़ी रेखा। | इसे इसके मूल ‘श-म’ रूप में ही रहने दें। |
| संपूर्ण | ‘श-म’ के अंत में एक छोटा ‘प-र-ण’ का स्ट्रोक। | ‘समय’ के चिन्ह के अंत में नीचे की ओर एक छोटा हुक जोड़ें। |
विशेषज्ञ व्याख्या: आमतौर पर, ‘श’ के वृत्त के साथ ‘म’ को जोड़ने पर वह ‘समय’ और ‘संपूर्ण’ दोनों का बोध कराता है। लेकिन जब आप उच्च गति पर डिक्टेशन लिखते हैं, तो अनुवाद के समय भ्रम पैदा हो सकता है। मेरी सलाह यह है कि ‘समय’ के लिए आप साधारण ‘श-म’ (लाइन पर) का प्रयोग करें। लेकिन ‘संपूर्ण’ लिखने के लिए, ‘श-म’ बनाने के बाद हाथ को थोड़ा नीचे की ओर झटका देते हुए ‘प’ की दिशा में एक छोटा सा स्ट्रोक निकाल दें। यह अतिरिक्त स्ट्रोक ‘पूर्ण’ का प्रतिनिधित्व करेगा। इससे आपको यह स्पष्ट हो जाएगा कि यहाँ ‘समय’ नहीं, बल्कि ‘संपूर्ण’ लिखा गया है।
2. सर्वनाम और उनके शब्द चिन्ह (Pronouns in Shorthand)
सर्वनामों को याद करने का सबसे वैज्ञानिक तरीका उनकी स्थिति (Positioning) है। आशुलिपि में लाइन का बहुत महत्व है लाइन के ऊपर, लाइन पर, और लाइन काटकर।
2.1 प्रथम पुरुष (First Person): ‘मैं’ और इसके विभिन्न रूप
‘मैं’ से संबंधित सभी शब्द चिन्ह लाइन से ऊपर (Above the line) बनाए जाते हैं। इसका कारण ‘ऐ’ की मात्रा है जो प्रथम स्थान का स्वर है।
- मैं (Main): लाइन के ऊपर एक बहुत छोटी, हल्की और सीधी टिक बनाएँ जो ऊपर से नीचे की ओर लगभग 120-डिग्री के कोण पर झुकी हो।
- मैंने (Maine): ‘मैं’ की टिक बनाएँ और उसके अंत में दाईं ओर एक छोटा सा ‘ने’ का हुक या टिक जोड़ें।
- मेरा (Mera): ‘मैं’ की टिक के अंत में ‘र’ की दिशा में (ऊपर की ओर 30-डिग्री पर) एक छोटी रेखा खींचें।
- मुझको (Mujhko): ‘मैं’ की टिक के अंत में नीचे की ओर एक सीधी छोटी टिक (90-डिग्री पर) बनाएँ। यह ‘को’ का प्रतीक है।
- मुझे (Mujhe): ‘मैं’ की टिक को ऊपर की ओर ले जाते हुए एक छोटी ऊर्ध्वमुखी रेखा बनाएँ।
- मुझसे (Mujhse): ‘मुझ’ लिखकर उसके अंत में एक लेटा हुआ छोटा ‘U’ आकार (Horizontal Curve) जोड़ें। यह ‘से’ का संकेत है।
- मुझमें (Mujhme): ‘मुझ’ की टिक के साथ एक बहुत छोटा ‘म’ का स्ट्रोक सटाकर लिखें।
- मुझपर (Mujhpar): ‘मुझ’ की टिक के अंत में एक छोटा सा ‘प’ और ‘र’ का संयुक्त आंकड़ा (झुका हुआ टिक) जोड़ें।
2.2 बहुवचन प्रथम पुरुष: ‘हम’ और इसके रूप
‘हम’ के सभी रूप लाइन पर (On the line) बनाए जाते हैं। इसकी बनावट ‘मैं’ जैसी ही है, बस इसकी स्थिति बदल जाती है।
- हम (Hum): लाइन पर एक छोटा सा अर्धवृत्त या टिक।
- हमने (Humne): ‘हम’ के चिन्ह के साथ ‘ने’ की दिशा में एक छोटी टिक।
- हमारा (Hamara): ‘हम’ के साथ ‘र’ की दिशा में ऊपर की ओर एक रेखा।
- हमको (Humko): ‘हम’ के साथ नीचे की ओर ‘को’ की सीधी टिक।
- हमें (Hamein): ‘हमें’ के लिए एक सीधी ऊर्ध्वमुखी (ऊपर की ओर) छोटी रेखा खींचें।
- हमसे (Humse): ‘हम’ के साथ लेटा हुआ ‘U’ आकार का ‘से’ जोड़ें।
- हमपर (Humpar): ‘हम’ के साथ छोटा ‘पर’ (P-R) का स्ट्रोक सटाकर बनाएँ।
2.3 मध्यम पुरुष (Second Person): ‘तुम’
‘तुम’ के शब्द चिन्ह भी लाइन पर (On the line) बनाए जाते हैं, लेकिन इनके स्ट्रोक की बनावट ‘त-म’ के संक्षिप्त रूप पर आधारित होती है।
- तुम (Tum): लाइन पर एक छोटा सा ‘त’ जैसा वक्र।
- तुमने (Tumne): ‘तुम’ के वक्र के अंत में ‘ने’ की टिक।
- तुम्हारा (Tumhara): ‘तुम’ के साथ ‘र’ की दिशा में ऊर्ध्वमुखी रेखा।
- तुमको (Tumko): ‘तुम’ के अंत में नीचे की ओर सीधी ‘को’ की टिक।
- तुम्हें (Tumhein): ‘तुम’ के अंत में एक सीधी रेखा (90-डिग्री या ऊर्ध्वमुखी) जो ‘हे’ का बोध कराती है।
2.4 निकटवर्ती और दूरवर्ती सर्वनाम: इस, इन, उस, उन
यहाँ स्ट्रोक की आकृति और स्थिति का खेल सबसे महत्वपूर्ण है।
- इस (Is): लाइन से ऊपर एक लेटा हुआ ‘U’ (Horizontal Curve)। यह ‘इ’ के स्वर के बावजूद ऊपर रहता है।
- इन (In): यही लेटा हुआ ‘U’ आकार जब लाइन पर बनाया जाता है, तो यह ‘इन’ बन जाता है।
- उस (Us): लाइन पर एक छोटा आधा वृत्त (Bracket जैसा) जिसका झुकाव बाईं ओर होता है।
- उन (Un): यह भी एक छोटा आधा वृत्त है, लेकिन इसे लाइन पर विशेष झुकाव के साथ बनाया जाता है। ‘उस’ और ‘उन’ के बीच का अंतर अभ्यास से ही स्पष्ट होता है।
‘इस’ और ‘इन’ के विस्तारित रूप:
- इससे (Isse): ‘इस’ (लेटा U) के साथ एक और छोटा ‘U’ जोड़ें, जिससे यह गणित के अंक ‘3’ जैसा दिखने लगता है।
- इन्हें (Inhein): ‘इन’ के शब्द चिन्ह के अंत में एक सीधी नीचे की ओर रेखा खींचें (हे का प्रतीक)। स्पष्टता के लिए बीच में एक छोटी बिंदी लगा दें।
2.5 विशेष सर्वनाम: आप, जिस, और किस
डिक्टेशन में इनका प्रयोग बहुत अधिक होता है, इसलिए इनके स्ट्रोक्स को ध्यान से समझें:
- आप (Aap): लाइन से ऊपर ‘प’ की एक हल्की अधोमुखी रेखा। ‘आप’ के साथ ‘ने’ जोड़ना हो तो ‘आपने’ के लिए अंत में ‘ने’ की टिक लगा दें।
- जिस (Jis): लाइन पर ‘ज’ की रेखा के अंत में ‘स’ का एक छोटा वृत्त (Circle) बनाएँ।
- जिसने (Jisne): ‘जिस’ का वृत्त बनाते समय ही हाथ को दाईं ओर निकाल दें (ने की दिशा में)।
- जिसका/जिसके/जिसकी (Jiska): ‘जिस’ के साथ ‘क’ की रेखा जोड़ें। ‘जिसके’ के लिए बीच में बिंदी और ‘जिसकी’ के लिए अंत में बिंदी लगाएँ।
- किस (Kis): लाइन पर ‘क’ की रेखा के अंत में ‘स’ का वृत्त। ‘किसने’, ‘किसको’ और ‘किससे’ के नियम ‘जिस’ के समान ही रहेंगे।
3. कारक चिन्हों को जोड़ने की वैज्ञानिक तकनीक
जब हम सर्वनामों के साथ कारक चिन्ह (Case Endings) जोड़ते हैं, तो हाथ की गति को निर्बाध रखने के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं:
- ‘को’ (Ko) की टिक: यह हमेशा एक 90-डिग्री की सीधी छोटी टिक होती है। जब यह ‘मुझ’, ‘तुम’ या ‘इस’ के साथ जुड़ती है, तो यह हमेशा नीचे की तरफ जाती है।
- ‘ने’ (Ne) की टिक: यह ‘ने’ वर्ण की दिशा में एक छोटा सा तिरछा स्ट्रोक है। इसे जोड़ते समय ध्यान रखें कि यह ‘को’ की टिक से अलग दिखे (इसका कोण लगभग 45-डिग्री होता है)।
- ‘से’ (Se) का संकेत: इसके लिए एक लेटा हुआ ‘U’ या एक बहुत छोटा वृत्त इस्तेमाल किया जाता है। ‘मुझसे’ लिखते समय यह हुक जैसा दिखता है, जबकि ‘इससे’ में यह ‘3’ की आकृति ले लेता है।
- ‘में’ (Me) का संकेत: शब्द के अंत में एक बहुत ही सूक्ष्म ‘म’ (आड़ी छोटी रेखा) सटाकर लिखें। ‘मुझमें’ या ‘इनमें’ में यह स्पष्ट दिखना चाहिए।
- ‘पर’ (Par) का प्रयोग: इसके लिए ‘प’ के आंकड़े के साथ हल्का सा ‘र’ का घुमाव दिया जाता है। ‘मुझपर’ लिखते समय ‘मुझ’ की टिक के बाद हाथ को हल्का घुमाकर ‘पर’ का स्ट्रोक बनाएँ।
4. विशेष शब्द चिन्ह तालिका: सूक्ष्म अंतर और तर्क
| शब्द | स्थिति | स्ट्रोक का विस्तृत विवरण |
| साहब, सुबह, सब | लाइन पर | ‘स’ का वृत्त और ‘ब’ की अधोमुखी रेखा। ये तीनों एक ही प्रतीक साझा करते हैं। वाक्य के संदर्भ से पहचानें (जैसे: ‘सुबह’ हुई, न कि ‘साहब’ हुई)। |
| इस पर / इन पर | स्थिति अनुसार | ‘इस’ या ‘इन’ के स्ट्रोक में ‘र’ की रेखा को जोड़कर उसकी लंबाई को दोगुना (Double) कर दें। लंबाई का बढ़ना ‘पर’ का बोध कराता है। |
| उन्हें / इन्हें / जिन्हें | लाइन पर/ऊपर | अंत में ‘हे’ के लिए एक लंबवत (Vertical) छोटी सीधी रेखा नीचे की ओर खींचें। बहुवचन की बिंदी (Nasalization) के लिए एक सूक्ष्म बिंदी लगा सकते हैं। |
| पिछला / पिछले / पिछली | लाइन काटकर | ‘प’ के स्ट्रोक को सामान्य से दोगुना लंबा करें। यह स्ट्रोक लाइन को बीच से काटता हुआ ऊपर से नीचे की ओर जाता है। |
5. उच्च स्तरीय शब्द चिन्ह: निर्माण और लॉजिक
जैसे-जैसे आप एडवांस स्टेनोग्राफी की ओर बढ़ते हैं, आपको बड़े शब्दों को छोटे प्रतीकों में ढालना सीखना होता है।
- अंग्रेज (Angrez): लाइन से ऊपर ‘अ’ का स्वर, ‘ग’ में ‘र’ का प्रारंभिक आंकड़ा और अंत में ‘ज’ का बड़ा वृत्त।
- अंग्रेजी (Angrezi): ‘अंग्रेज’ के स्ट्रोक के अंत में एक छोटी सी ‘ई’ की टिक या बिंदी बाहर की ओर निकाल दें।
- यथार्थ (Yatharth): लाइन से ऊपर ‘य’ के स्ट्रोक को थोड़ा बड़ा करें या ‘र’ के साथ संयोजित करें। एक अन्य तरीका यह है कि लाइन के ऊपर ‘र’ की रेखा को अकेला छोड़ दें (संदर्भ के अनुसार)।
- यथा (Yatha): लाइन के ऊपर ‘य’ और ‘थ’ का स्ट्रोक। ‘थ’ को बीच से काटना न भूलें।
- यथेष्ट (Yathesht): ‘य’ की रेखा, ‘थ’ का स्ट्रोक और अंत में एक बड़ा ‘Sht’ चाप (Loop) जो स्ट्रोक की लगभग आधी लंबाई घेरता है। यह लूप ‘ष्ट’ ध्वनि का प्रतिनिधित्व करता है।
- यानी, युद्ध, युवक:
- यानी: ‘य’ के साथ ‘न’ का हुक और अंत में ‘ई’ की बिंदी।
- युद्ध: ‘य’ के साथ छोटा ‘ध’ का स्ट्रोक (लाइन काटकर क्योंकि ‘उ’ का स्वर है)।
- युवक: ‘य’ और ‘व’ का पूरा और स्पष्ट स्ट्रोक।
- क्यों, किन, किंतु, कठिन:
- क्यों: ‘क’ की रेखा के बीच में ‘ओ’ की मात्रा (बिंदी) लगाएँ।
- किन / किंतु: इन दोनों के लिए लाइन पर ‘क’ और ‘न’ का आंकड़ा उपयोग करें।
- कठिन (Expert Warning): यद्यपि कुछ लोग इसे ‘किन’ जैसा ही लिखते हैं, लेकिन भ्रम से बचने के लिए ‘कठिन’ को पूरा (क + ठ + न का आंकड़ा) लिखना चाहिए। ‘ठ’ को काटना अनिवार्य है।
6. स्थान का महत्व: चौड़ा, ऊँचा, और बीच (The Power of Positioning)
स्टेनोग्राफी में स्थान का निर्धारण स्वर (Vowel) की ध्वनि पर आधारित होता है। इसे समझना रटने से बेहतर है:
- ऊँचा (Uncha): चूंकि इसमें ‘ऊ’ की ध्वनि है, लेकिन याद रखने की ट्रिक के तौर पर, ‘ऊँचा’ शब्द को हमेशा लाइन से ऊपर (Above the line) बनाएँ। इसमें ‘च’ की रेखा और ऊपर की ओर एक छोटी गुंडी होती है।
- चौड़ा (Chauda): इसमें ‘ओ’ की ध्वनि है (द्वितीय स्थान), इसलिए इसे लाइन पर (On the line) बनाया जाता है। इसकी बनावट ‘ऊँचा’ जैसी ही है, बस स्थिति बदल जाती है।
- बीच (Beech): इसमें ‘ई’ की ध्वनि है (तृतीय स्थान), इसलिए इसे अनिवार्य रूप से लाइन काटकर (Through the line) बनाया जाता है।
पार, परसों, पूरा की तकनीक:
- पार (Paar): लाइन से ऊपर ‘प’ की रेखा और ‘र’ का बहुत छोटा टिक।
- परसों (Parso): लाइन पर ‘प’ और ‘र’ का स्ट्रोक और ‘ओ’ की मात्रा।
- पूरा (Poora): ‘ऊ’ की मात्रा के कारण इसे लाइन काटकर बनाया जाता है।
7. अभ्यास निर्देश और विशेषज्ञ परामर्श
Day 25 का यह पाठ बहुत विशाल है, इसलिए इसे एक दिन में समाप्त करने की जल्दबाजी न करें। इसे सीखने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
- सर्वनामों का ग्रिड बनाएँ: अपनी नोटबुक में एक तालिका बनाएँ। ऊपर ‘ने, को, से, में, पर’ लिखें और बाईं ओर ‘मैं, हम, तुम, इस, इन, उस, उन, आप, जिस, किस’ लिखें। अब प्रत्येक खाने को उसके सही शब्द चिन्ह से भरें।
- हाथ की कोमलता (Light Pressure): ध्यान रखें कि ‘मैं’, ‘इस’, ‘इन’ जैसे चिन्ह हल्के (Light) होने चाहिए। यदि आप पेंसिल पर बहुत दबाव डालेंगे, तो आपकी गति धीमी हो जाएगी और आप हल्के-गाढ़े स्ट्रोक का अंतर नहीं कर पाएंगे।
- 10-लाइन नियम: प्रत्येक शब्द चिन्ह (जैसे ‘यथेष्ट’ या ‘संपूर्ण’) की कम से कम 10-10 पंक्तियाँ लिखें। लिखते समय शब्द को मन में न बोलें, बल्कि उसे ज़ोर से उच्चारित करें।
- ऐतिहासिक शोध: स्टेनोग्राफी केवल एक कौशल नहीं, एक समृद्ध कला है। इसके विकास और प्रणालियों के बारे में अधिक जानने के लिए हिंदी स्टेनोग्राफी विकिपीडिया का अध्ययन अवश्य करें।
- नियमित डिक्टेशन: एक बार जब आप चिन्ह याद कर लें, तो हमारे Steno Classes पोर्टल पर जाएँ और ‘Day 25 Special’ डिक्टेशन का अभ्यास करें।
प्रो-टिप: मैंने अपने 10 साल के अनुभव में देखा है कि छात्र “उन्होंने” को “उनने” पढ़ लेते हैं। याद रखें, ‘उनने’ कोई मानक शब्द नहीं है। डिक्टेशन में हमेशा “उन्होंने” ही लिखें। इसी तरह ‘इन्हें’ और ‘उन्हीं’ की बिंदी का विशेष ध्यान रखें ताकि बहुवचन और एकवचन की गलतियाँ न हों।
8. निष्कर्ष
Day 25 का यह विस्तृत पाठ आपकी आशुलिपि की बुनियाद को फौलादी बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। आज हमने केवल शब्द चिन्ह नहीं सीखे, बल्कि उनके पीछे के तर्क चाहे वह स्थान का सिद्धांत हो या स्ट्रोक को दोगुना करने की तकनीक को भी आत्मसात किया है।
याद रखें, एक सफल स्टेनोग्राफर वह नहीं है जो बहुत तेज़ हाथ चलाता है, बल्कि वह है जो सबसे छोटे और सबसे सटीक शब्द चिन्हों का उपयोग करना जानता है। इन चिन्हों पर पूर्ण अधिकार प्राप्त करने के बाद ही Day 26 की ओर कदम बढ़ाएँ। आपका निरंतर परिश्रम ही आपको एक दिन सरकारी कार्यालयों या प्रेस दीर्घाओं में एक प्रतिष्ठित आशुलिपिक के रूप में स्थापित करेगा। अभ्यास करते रहें।


