आज का यह अध्याय आपकी स्टेनोग्राफी की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है। (Rules for applying vowel marks to consonants – व्यंजनों में मात्राएँ लगाने के नियम और अभ्यास) बिना मात्राओं के ज्ञान के, आप केवल व्यंजनों का एक ढांचा तैयार कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अर्थपूर्ण शब्द और वाक्यों में ढालना असंभव है। उदाहरण के लिए, यदि आप केवल ‘प’ और ‘ल’ लिखते हैं, तो जब तक आप मात्राओं का प्रयोग नहीं करेंगे, आप यह स्पष्ट नहीं कर पाएंगे कि वह ‘पल’ है, ‘पाला’ है, ‘पीला’ है, या ‘पुल’ है।
“85 दिनों में संपूर्ण हिंदी स्टेनोग्राफी” सीखने के इस क्रांतिकारी सफर में आज आपका चौथा दिन है। पिछले तीन दिनों में हमने वर्णमाला के व्यंजनों की बनावट, उनके कोण और व्यंजनों को आपस में जोड़ने की कला सीखी है। यदि व्यंजन स्टेनोग्राफी का शरीर हैं, तो ‘मात्राएँ’ (Vowels/Matras) उसकी आत्मा हैं।
आशुलिपि (Shorthand) की दुनिया में गति के साथ-साथ शुद्धता का होना अनिवार्य है, और शुद्धता तभी आती है जब आपको स्वरों (Vowels) का सटीक ज्ञान हो। आज हम सीखेंगे कि कैसे एक छोटा सा ‘बिंदु’ (Dot) या ‘डैश’ (Dash) पूरे शब्द का स्वरूप बदल देता है। धैर्य रखें, यह पाठ विस्तृत है क्योंकि हम हर सूक्ष्म नियम को गहराई से समझेंगे।
1. व्यंजनों की दिशा और उनके पक्ष (Understanding Sides of Consonants)
मात्रा लगाने की प्रक्रिया को समझने से पहले, आपको यह आत्मसात करना होगा कि प्रत्येक व्यंजन के दो पक्ष (Sides) होते हैं। यह पक्ष ही यह निर्धारित करते हैं कि स्वर (Vowel) की ध्वनि व्यंजन से पहले पढ़ी जाएगी या उसके बाद।
खड़े व्यंजन (Vertical Strokes)
जैसे ‘ट’, ‘प’, ‘च’, ‘ज’ आदि, जो ऊपर से नीचे की ओर तिरछे या सीधे लिखे जाते हैं।
- प्रथम पक्ष (बाएं – Left): रेखा के बाईं ओर का हिस्सा ‘प्रथम पक्ष’ कहलाता है। यदि आप यहाँ कोई मात्रा लगाते हैं, तो इसका अर्थ है कि स्वर व्यंजन से पहले उच्चारित होगा।
- द्वितीय पक्ष (दाएं – Right): रेखा के दाईं ओर का हिस्सा ‘द्वितीय पक्ष’ है। यहाँ मात्रा होने का अर्थ है कि स्वर व्यंजन के बाद पढ़ा जाएगा।
लेटे हुए व्यंजन (Horizontal Strokes)
जैसे ‘क’, ‘न’, ‘म’ जो बाएं से दाएं क्षैतिज रूप में लिखे जाते हैं।
- प्रथम पक्ष (ऊपर – Top): रेखा के ऊपरी हिस्से को प्रथम पक्ष माना जाता है। यहाँ लगने वाली मात्रा व्यंजन से पहले पढ़ी जाती है।
- द्वितीय पक्ष (नीचे – Bottom): रेखा के निचले हिस्से को द्वितीय पक्ष माना जाता है। यहाँ मात्रा व्यंजन के बाद पढ़ी जाती है।
ऊपर जाने वाले और वक्र व्यंजन (Upward & Curved Strokes)
यहाँ अक्सर छात्र गलती करते हैं, इसलिए ध्यान से समझें:
- ल और र (ऊपर जाने वाला): चूंकि ये नीचे से ऊपर की ओर जाते हैं, इनका बायां हिस्सा प्रथम पक्ष और दायां हिस्सा द्वितीय पक्ष होता है।
- ह (दोनों रूप): ऊपर जाने वाले ‘ह’ और नीचे आने वाले ‘ह’ दोनों में बनावट की दिशा के अनुसार ‘बाएं’ और ‘दाएं’ का नियम लागू होता है।
- स और श: इनके घुमाव के आंतरिक और बाहरी हिस्सों के आधार पर पक्ष तय किए जाते हैं।
विशेषज्ञ सलाह (Expert Advice): हमेशा याद रखें कि पेंसिल जिस दिशा में चल रही है, उसके ‘प्रवाह’ को देखें। पेंसिल की टिप के ‘आगे’ (बाएं या ऊपर) की दुनिया प्रथम पक्ष है और ‘पीछे’ (दाएं या नीचे) की दुनिया द्वितीय पक्ष है।
व्यंजन पक्षों की विस्तृत निर्देश तालिका
| व्यंजन का प्रकार | उदाहरण | प्रथम पक्ष (Side 1) | द्वितीय पक्ष (Side 2) | छात्र के लिए टिप |
| अधोमुखी (Vertical) | ट, ठ, ड, ढ, प, फ, ब, भ, च, छ, ज, झ | बायां (Left) | दायां (Right) | पेंसिल ऊपर से नीचे लाएं, बायां हिस्सा स्वर पहले आने के लिए है। |
| अग्रगामी (Horizontal) | क, ख, ग, घ, म, न | ऊपर (Top) | नीचे (Bottom) | रेखा के ऊपर मात्रा मतलब स्वर पहले, नीचे मतलब स्वर बाद में। |
| ऊर्ध्वमुखी (Upward) | ल, र, ह, य, व | बायां (Left/Top) | दायां (Right/Bottom) | नीचे से ऊपर जाते समय बायीं तरफ पहला स्थान होता है। |
| वक्र (Curved) | त, थ, द, ध, स, ष | बायां/बाहरी | दायां/आंतरिक | वक्र के मुड़ाव की दिशा का अनुसरण करें। |
2. व्यंजनों के तीन स्थान (The Three Positions on a Stroke)
व्यंजन के प्रत्येक पक्ष (Side) में तीन स्थान (Positions) होते हैं। यह स्थान यह तय करते हैं कि कौन सी मात्रा (अ, ए, ई या आ, ओ, ऊ) लगी है।
- प्रथम स्थान (1st Position): यह वह बिंदु है जहाँ से व्यंजन बनना शुरू होता है।
- सावधानी: यदि व्यंजन ‘ट’ है, तो प्रथम स्थान ऊपर होगा। लेकिन यदि व्यंजन ‘ल’ है, तो प्रथम स्थान नीचे होगा क्योंकि ‘ल’ नीचे से ऊपर बनता है।
- द्वितीय स्थान (2nd Position): यह व्यंजन का मध्य भाग (Middle) होता है। यह हमेशा केंद्र में ही रहता है, चाहे व्यंजन किसी भी दिशा में बने।
- तृतीय स्थान (3rd Position): यह वह बिंदु है जहाँ व्यंजन समाप्त होता है।
नियम का सारांश:
- Side 1 + Position X: स्वर + व्यंजन।
- Side 2 + Position X: व्यंजन + स्वर।
3. बिंदु (Dot) से लगने वाली मात्राएँ: गहन विश्लेषण
हिंदी स्टेनोग्राफी में बिंदु का उपयोग हल्के और मध्यम स्वरों के लिए किया जाता है। ‘Source Context’ के अनुसार बिंदु के तीन विशिष्ट स्थान इस प्रकार हैं:
- प्रथम स्थान पर बिंदु: यह ‘अ’ (A) की ध्वनि देता है। (जैसे: अट, अप)
- द्वितीय स्थान पर बिंदु: यह ‘ए’ या ‘ऐ’ (E/Ai) की ध्वनि देता है। (जैसे: नने, ससे, कके)
- तृतीय स्थान पर बिंदु: यह ‘इ’ या ‘ई’ (I/EE) की ध्वनि देता है। (जैसे: ननी, पपी, खखी)
भ्रम की स्थिति (Common Confusion): छात्र अक्सर ‘अ’ और ‘आ’ में उलझ जाते हैं। याद रखें, ‘अ’ के लिए बिंदु का प्रयोग होगा और ‘आ’ के लिए डैश का।
अभ्यास तालिका: बिंदु (Dot) मात्रा का प्रयोग
| शब्द | व्यंजन | पक्ष | स्थान | ध्वनि तर्क | छात्र के लिए टिप |
| अट | ट | प्रथम (बाएं) | प्रथम | अ + ट | पेंसिल ट के शीर्ष के बाईं ओर रखें। |
| एट | ट | प्रथम (बाएं) | द्वितीय | ए + ट | ट के मध्य में बाईं ओर बिंदु लगाएं। |
| ईट | ट | प्रथम (बाएं) | तृतीय | ई + ट | ट जहाँ समाप्त होता है वहां बाईं ओर बिंदु। |
| पे | प | द्वितीय (दाएं) | द्वितीय | प + ए | प के मध्य में दाईं ओर बिंदु लगाएं। |
| पी | प | द्वितीय (दाएं) | तृतीय | प + ई | प के अंत में दाईं ओर बिंदु लगाएं। |
| नी | न | द्वितीय (नीचे) | तृतीय | न + ई | न के अंत में नीचे की तरफ बिंदु। |
| मे | म | द्वितीय (नीचे) | द्वितीय | म + ए | म के मध्य में नीचे बिंदु। |
| से | स | द्वितीय (दाएं) | द्वितीय | स + ए | स के मध्य भाग में दाईं ओर। |
| ही | ह | द्वितीय (दाएं) | तृतीय | ह + ई | ह के अंत में दाईं ओर (ऊपर की तरफ)। |
| एक | क | प्रथम (ऊपर) | द्वितीय | ए + क | क के ऊपर मध्य में बिंदु लगाएं। |
| खी | ख | द्वितीय (नीचे) | तृतीय | ख + ई | ख के अंत में नीचे बिंदु। |
| जी | ज | द्वितीय (दाएं) | तृतीय | ज + ई | ज के अंत में दाईं ओर। |

4. डैश (Dash) से लगने वाली मात्राएँ: विस्तृत नियम
डैश का उपयोग भारी या खिंचाव वाले स्वरों के लिए किया जाता है। इसकी स्थिति भी बिंदु की तरह ही तीन स्थानों में विभाजित है:
- प्रथम स्थान पर डैश: यह ‘आ’ (AA) की ध्वनि देता है। (जैसे: आम, ममा, नना)
- द्वितीय स्थान पर डैश: यह ‘ओ’ (O) की ध्वनि देता है। (जैसे: ममो, चचो, ओम)
- तृतीय स्थान पर डैश: यह ‘उ’ या ‘ऊ’ (U/UU) की ध्वनि देता है। (जैसे: पपू, ननु, ऊन)
अभ्यास तालिका: डैश (Dash) मात्रा का प्रयोग
| शब्द | व्यंजन | पक्ष | स्थान | ध्वनि तर्क | छात्र के लिए टिप |
| मा | म | द्वितीय (नीचे) | प्रथम | म + आ | म शुरू होते ही नीचे डैश लगाएं। |
| मो | म | द्वितीय (नीचे) | द्वितीय | म + ओ | म के मध्य में नीचे डैश। |
| मु | म | द्वितीय (नीचे) | तृतीय | म + उ | म के अंत में नीचे डैश। |
| आम | म | प्रथम (ऊपर) | प्रथम | आ + म | म के ऊपर शुरुआत में डैश। |
| ओम | म | प्रथम (ऊपर) | द्वितीय | ओ + म | म के ऊपर मध्य में डैश। |
| पा | प | द्वितीय (दाएं) | प्रथम | प + आ | प के शीर्ष पर दाईं ओर डैश। |
| पो | प | द्वितीय (दाएं) | द्वितीय | प + ओ | प के मध्य दाईं ओर डैश। |
| पू | प | द्वितीय (दाएं) | तृतीय | प + ऊ | प के अंत में दाईं ओर डैश। |
| ऊन | न | प्रथम (ऊपर) | तृतीय | ऊ + न | न के ऊपर अंत में डैश। |
| चो | च | द्वितीय (दाएं) | द्वितीय | च + ओ | च के मध्य दाईं ओर डैश। |
| उच | च | प्रथम (बाएं) | तृतीय | उ + च | च के अंत में बाईं ओर डैश। |
विशेष नोट: मात्रा लगाने के लिए अपनी पेंसिल की नोक को हल्का सा दबाकर डैश बनाएं, लेकिन ध्यान रहे कि डैश बहुत बड़ा न हो जाए वरना वह दूसरे व्यंजन जैसा दिखने लगेगा।
5. वाक्य अभ्यास (Sentence Practice Exercise)
अब हम इन नियमों को वाक्यों में उतारेंगे। प्रत्येक वाक्य का विश्लेषण आपको यह समझने में मदद करेगा कि जटिल शब्दों में मात्राओं का तालमेल कैसे बिठाया जाता है।
1. चोर भाग गया
- चोर: ‘च’ व्यंजन बनाएं (ऊपर से नीचे)। च के द्वितीय स्थान पर दाईं ओर (Side 2) डैश लगाएं जिससे बना ‘चो’, फिर ‘र’ जोड़ें।
- भाग: ‘भ’ को गहरा करें और काटें। इसके प्रथम स्थान पर दाईं ओर डैश (आ) लगाएं, फिर ‘ग’ जोड़ें।
- गया: ‘ग’ बनाएं, फिर ‘य’ जोड़ें। ‘य’ के प्रथम स्थान पर दाईं ओर डैश लगाएं जिससे ‘या’ की ध्वनि आए।
2. उसको लात
- उसको: ‘स’ व्यंजन के तृतीय स्थान पर बाईं ओर (Side 1) डैश लगाएं (उ + स = उस)। फिर ‘क’ जोड़ें और ‘क’ के द्वितीय स्थान पर नीचे (Side 2) डैश लगाएं (को)।
- लात: ‘ल’ (नीचे से ऊपर) के प्रथम स्थान पर दाईं ओर डैश लगाएं (ला), फिर ‘त’ जोड़ें।
3. राम को रोटी दो
- राम: ‘र’ के प्रथम स्थान पर दाईं ओर डैश (रा) + ‘म’।
- को: ‘क’ के द्वितीय स्थान पर नीचे डैश।
- रोटी: ‘र’ के द्वितीय स्थान पर दाईं ओर डैश (रो) और ‘ट’ के तृतीय स्थान पर दाईं ओर बिंदु (टी)।
4. मैं यह काम कर सकता हूँ
- मैं: ‘म’ के द्वितीय स्थान पर नीचे बिंदु (में/मैं)।
- काम: ‘क’ के प्रथम स्थान पर नीचे डैश (का) + ‘म’।
- हूँ: ‘ह’ के तृतीय स्थान पर दाईं ओर डैश (ऊ)।
5. राधा पानी लाती है
- राधा: ‘र’ के प्रथम स्थान पर दाईं ओर डैश और ‘ध’ के प्रथम स्थान पर दाईं ओर डैश।
- पानी: ‘प’ के प्रथम स्थान पर डैश (पा) और ‘न’ के तृतीय स्थान पर बिंदु (नी)।
- लाती: ‘ल’ के प्रथम स्थान पर डैश (ला) और ‘त’ के तृतीय स्थान पर बिंदु (ती)।
अभ्यास की सलाह: इन वाक्यों को बार-बार लिखने के लिए आप Hindi Typing संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं, जिससे आपकी गति में सुधार होगा।
6. विशेषज्ञ सलाह और सामान्य त्रुटियां (Pro Tips & Common Pitfalls)
एक वरिष्ठ तकनीकी लेखक के रूप में, मैंने देखा है कि छात्र अक्सर निम्नलिखित गलतियाँ करते हैं:
- दिशा का विस्मरण: यदि आप ‘ल’ को ऊपर से नीचे लिख देंगे (जो कि गलत है), तो आपके मात्रा स्थान पूरी तरह बदल जाएंगे। हमेशा व्यंजन की मानक दिशा का पालन करें।
- बिंदु बनाम डैश: ‘ए’ की मात्रा (बिंदु) और ‘ओ’ की मात्रा (डैश) दोनों द्वितीय स्थान पर लगती हैं। यदि आप बिंदु की जगह डैश लगा देंगे, तो ‘के’ का ‘को’ बन जाएगा।
- हल्की और भारी मात्रा: पेंसिल के दबाव को नियंत्रित करना सीखें। तृतीय स्थान की मात्रा को हमेशा व्यंजन के अंत में सटीक रूप से लगाएं।
- अभ्यास का अभाव: स्टेनोग्राफी ‘देखने’ का नहीं, ‘करने’ का विषय है। प्रत्येक शब्द को कम से कम 20 बार अपनी नोटबुक में लिखें।
read also: Joining Consonants (व्यंजनों को जोड़ना) – Lec 3
7. निष्कर्ष (Conclusion)
आज हमने हिंदी स्टेनोग्राफी के “हृदय” यानी मात्राओं को समझा। आपने सीखा कि व्यंजनों के दो पक्ष और तीन स्थान कैसे शब्दों के उच्चारण को नियंत्रित करते हैं। बिंदु (अ, ए, ई) और डैश (आ, ओ, ऊ) का यह खेल ही आपको एक साधारण लेखक से एक पेशेवर स्टेनोग्राफर में बदल देगा। अगली क्लास पर जाने से पहले, सुनिश्चित करें कि आपने आज के सभी उदाहरणों और वाक्यों का 5-5 पेज अभ्यास कर लिया है। याद रखें, स्टेनोग्राफी में कोई शॉर्टकट नहीं है, केवल ‘स्मार्ट प्रैक्टिस’ ही आपको सफल बनाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: क्या ‘इ’ और ‘ई’ के लिए अलग-अलग चिन्ह हैं? उत्तर: नहीं, प्रारंभिक स्तर पर ‘इ’ (छोटी) और ‘ई’ (बड़ी) दोनों के लिए तृतीय स्थान पर बिंदु का ही प्रयोग किया जाता है। शब्द के अर्थ और वाक्य के संदर्भ के अनुसार पाठक स्वयं समझ जाता है कि वहां कौन सी ‘इ’ है।
प्रश्न 2: यदि स्वर व्यंजन से पहले आए, तो क्या करें? उत्तर: यदि स्वर पहले आ रहा है (जैसे: ‘आज’, ‘इमली’, ‘अब’), तो मात्रा को व्यंजन के प्रथम पक्ष (Side 1) पर संबंधित स्थान (1, 2, या 3) पर लगाएं।
प्रश्न 3: ‘ऐ’ (जैसे ‘मैला’) की मात्रा के लिए क्या नियम है? उत्तर: ‘ऐ’ की ध्वनि के लिए भी द्वितीय स्थान पर बिंदु का ही प्रयोग किया जाता है, जैसा कि ‘ए’ के लिए होता है। संदर्भ ही इसका भेद स्पष्ट करता है।
प्रश्न 4: तृतीय स्थान की मात्रा को व्यंजन के जोड़ पर कैसे लगाएं? उत्तर: जब दो व्यंजन जुड़े हों, तो पहले व्यंजन की तृतीय स्थान की मात्रा को अक्सर दूसरे व्यंजन के प्रथम पक्ष के तृतीय स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जाता है (यह अग्रिम नियम है जिसे हम आगे विस्तार से पढ़ेंगे)। अभी के लिए, इसे व्यंजन के अंत में ही लगाने का अभ्यास करें।
प्रश्न 5: क्या डैश को तिरछा या सीधा लगाना अनिवार्य है? उत्तर: डैश को व्यंजन रेखा के साथ समकोण (90 डिग्री) पर लगाना सबसे अच्छा माना जाता है ताकि वह स्पष्ट दिखाई दे।
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