“85 दिनों में संपूर्ण हिंदी स्टेनोग्राफी” सीखने के इस महा-अभियान के पाँचवें दिन (Day 5) में आपका हृदय से स्वागत है। Transfer of 3rd Position Vowels (मात्रा का स्थानांतरण), यदि आप यहाँ तक पहुँच गए हैं, तो इसका अर्थ है कि आपमें न केवल सीखने की ललक है, बल्कि आप एक पेशेवर स्टेनोग्राफर बनने के लिए आवश्यक अनुशासन का भी परिचय दे रहे हैं। कल यानी Day 4 में, हमने मात्राओं के मूल सिद्धांतों, उनके तीन विशिष्ट स्थानों और लेखन की दिशा के आधार पर उनके वर्गीकरण को समझा था।
आज का यह पाठ आपके स्टेनोग्राफी कौशल की आधारशिला रखने वाला है। आज हम “तीसरे स्थान की मात्रा का स्थानांतरण” (Transfer of 3rd Position Vowels) नामक एक ऐसे तकनीकी नियम पर चर्चा करेंगे, जो ऋषि प्रणाली (Rishi System) और मानक हिंदी शॉर्टहैंड का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह नियम न केवल आपकी लेखन गति को बढ़ाता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि आपके द्वारा बनाए गए रेखाचित्र (Outlines) स्पष्ट और पठनीय हों। इस गाइड में, हम न केवल नियमों को पढ़ेंगे, बल्कि पेंसिल की गति, स्ट्रोक के कोण और ध्वन्यात्मक ज्यामिति (Phonetic Geometry) के माध्यम से इस जटिल विषय को सरलतम रूप में समझेंगे।
1. तीसरे स्थान की मात्रा क्या है? (Understanding 3rd Position Vowels)
शॉर्टहैंड पूरी तरह से ध्वनि (Sound) पर आधारित लिपि है। हिंदी स्टेनोग्राफी में स्वरों को उनकी ध्वनि की गहराई और अवधि के आधार पर ‘बिंदु’ और ‘डैश’ के रूप में चिन्हित किया जाता है। तीसरे स्थान की मात्राएँ वे होती हैं जिनका उच्चारण व्यंजन के अंत में होता है।
स्रोत संदर्भ के अनुसार, स्थानांतरण के नियम के अंतर्गत मुख्य रूप से चार मात्राएँ आती हैं:
- ई (ee): यह एक गहरा बिंदु (Dark Dot) है। इसे व्यंजन के अंतिम भाग (तृतीय स्थान) पर लगाया जाता है। यह दीर्घ स्वर है, इसलिए पेंसिल पर थोड़ा दबाव डालकर इसे स्पष्ट किया जाता है।
- इ (i): यह एक हल्का बिंदु (Light Dot) है। यह ह्रस्व स्वर है, जिसे बहुत ही हल्के स्पर्श के साथ तृतीय स्थान पर अंकित किया जाता है।
- ऊ (oo): यह एक गहरा डैश (Dark Dash) है। यह व्यंजन के तीसरे स्थान पर लगाया जाने वाला दीर्घ स्वर है।
- उ (u): यह एक हल्का डैश (Light Dash) है। यह ह्रस्व स्वर है, जिसे हल्के दबाव के साथ तीसरे स्थान पर लगाया जाता है।
जब कोई व्यंजन अकेला होता है, तो ये मात्राएँ अपने प्राकृतिक स्थान पर रहती हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि हमें केवल ‘ई’ लिखना हो, तो हम ‘य’ या ‘व’ के अंत में बिंदु लगा सकते हैं। परंतु, जैसे ही दो व्यंजनों का मिलाप (Joining of Consonants) होता है, ज्यामितीय बाधाएं उत्पन्न हो जाती हैं, जिन्हें हल करने के लिए स्थानांतरण का सहारा लिया जाता है।
2. मात्रा स्थानांतरण का मुख्य नियम (The Core Rule of Vowel Transfer)
स्टेनोग्राफी में जब दो व्यंजनों को जोड़ा जाता है, तो पहले व्यंजन का अंत और दूसरे व्यंजन का आरंभ एक ही संधि-स्थल (Junction) पर होता है। यहीं से स्थानांतरण के नियम की आवश्यकता जन्म लेती है।
नियम की तकनीकी परिभाषा
जब दो व्यंजनों के बीच तीसरे स्थान की कोई भी मात्रा (ई, इ, ऊ, उ) आती है, तो वह मात्रा अपने मूल व्यंजन के तीसरे स्थान पर न लगकर, उसके ठीक बाद आने वाले व्यंजन के वाम पक्ष (Preceding Side) के तीसरे स्थान पर स्थानांतरित हो जाती है।
यह स्थानांतरण क्यों आवश्यक है? (The Geometric Constraint)
कल्पना कीजिए कि आप ‘प’ और ‘ल’ को जोड़ रहे हैं। ‘प’ एक 120 डिग्री पर नीचे आने वाली रेखा है और ‘ल’ नीचे से ऊपर जाने वाला एक वक्र (Curve) है। जहाँ ‘प’ समाप्त होता है, वहीं से ‘ल’ शुरू होता है। यदि हम ‘प’ की ‘ई’ मात्रा को उसके अपने तीसरे स्थान (जंक्शन के पास) पर लगाएंगे, तो वह ‘ल’ के शुरुआती स्ट्रोक के साथ टकरा जाएगी। इससे यह पहचानना असंभव हो जाएगा कि वह मात्रा ‘प’ की है या ‘ल’ की।
इस समस्या के समाधान हेतु, ऋषि प्रणाली में यह तय किया गया कि मात्रा को “अगले स्टेशन” पर भेज दिया जाए। इससे जंक्शन साफ रहता है और लेखक की गति में कोई अवरोध नहीं आता।
“च + इल” का मानसिक मॉडल (The Mental Model)
जैसा कि स्रोत में सिखाया गया है, इस नियम को समझने का सबसे आसान तरीका शब्द को मानसिक रूप से तोड़ना है। उदाहरण के लिए, शब्द ‘चील’ को आप शॉर्टहैंड लिखते समय ‘च + इल’ के रूप में सोचें। यानी ‘च’ का स्ट्रोक बनाने के बाद, मात्रा को ‘ल’ के पहले वाले हिस्से में लगा दें।
यह नियम केवल और केवल तीसरे स्थान की मात्राओं पर लागू होता है क्योंकि पहले और दूसरे स्थान की मात्राओं के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध होती है। हिंदी भाषा की प्रकृति के अनुरूप, यह प्रणाली वैज्ञानिक रूप से सटीक है।
3. शब्दों के माध्यम से विस्तार से समझें (Detailed Examples with Analysis)
नीचे दी गई तालिका में प्रत्येक शब्द के स्ट्रोक की बनावट, पेंसिल के दबाव और मात्रा के सटीक स्थान का तकनीकी विश्लेषण दिया गया है। इसे ध्यान से समझें क्योंकि यही आपकी शुद्धता का आधार है।
तीसरे स्थान की मात्रा के स्थानांतरण के उदाहरण
| शब्द (Word) | विच्छेद (Mental Breakdown) | स्ट्रोक और स्थानांतरण का विवरण (Technical Stroke Analysis) |
| चील | च + इल | स्ट्रोक: ‘च’ (60° अधोमुखी) और ‘ल’ (ऊर्ध्वमुखी वक्र)। <br>नियम: ‘ई’ का गहरा बिंदु ‘च’ के अंत में न लगकर ‘ल’ के बाईं ओर (Preceding Side) सबसे नीचे लगाया जाएगा। |
| पील | प + इल | स्ट्रोक: ‘प’ (120° अधोमुखी) और ‘ल’ (ऊर्ध्वमुखी)। <br>नियम: ‘ई’ की मात्रा ‘ल’ के शुरुआती हिस्से के विपरीत (वाम पक्ष) तीसरे स्थान पर स्थानांतरित होती है। |
| कील | क + इल | स्ट्रोक: ‘क’ (आड़ी रेखा) और ‘ल’ (ऊर्ध्वमुखी)। <br>नियम: ‘क’ के बाद स्थान न होने के कारण ‘ई’ का गहरा बिंदु ‘ल’ के नीचे की ओर वाम पक्ष में लगता है। |
| पुल | प + उल | स्ट्रोक: ‘प’ (हल्का अधोमुखी) और ‘ल’ (ऊर्ध्वमुखी)। <br>नियम: ‘उ’ की मात्रा एक हल्का डैश है। इसे ‘ल’ के तीसरे स्थान के पहले पक्ष में अंकित करें। |
| टूट | ट + ऊट | स्ट्रोक: दो ‘ट’ (90° सीधे नीचे)। <br>नियम: पहले ‘ट’ की ‘ऊ’ मात्रा दूसरे ‘ट’ के वाम पक्ष में नीचे की ओर गहरा डैश बनकर लगेगी। |
| रीना | र + ईन + आ | स्ट्रोक: ‘र’ (30° ऊर्ध्वमुखी) और ‘न’ (आड़ा वक्र)। <br>नियम: ‘र’ की ‘ई’ मात्रा ‘न’ के ऊपर (Preceding Side) तीसरे स्थान पर जाएगी। ‘न’ की ‘आ’ मात्रा अपने दक्षिण पक्ष में रहेगी। |
| गिर | ग + इर | स्ट्रोक: ‘ग’ (गहरी आड़ी रेखा) और ‘र’ (30° ऊर्ध्वमुखी)। <br>नियम: ‘इ’ का हल्का बिंदु ‘र’ के वाम पक्ष में तीसरे स्थान पर स्थानांतरित होगा। |
| सीमा | स + ईम + आ | स्ट्रोक: ‘स’ (बायाँ वक्र) और ‘म’ (आड़ा वक्र)। <br>नियम: ‘स’ की मात्रा ‘म’ के ऊपर (Preceding Side) तीसरे स्थान पर गहरा बिंदु होगी। ‘म’ की ‘आ’ मात्रा वहीं रहेगी। |
| पानी | प + आ + नी | स्ट्रोक: ‘प’ और ‘न’। <br>नियम: यहाँ ‘प’ के बाद प्रथम स्थान (आ) है, अतः स्थानांतरण नहीं होगा। ‘नी’ शब्द के अंत में है, इसलिए यह ‘न’ के दक्षिण पक्ष में ही रहेगा। |
| गीता | ग + ईत + आ | स्ट्रोक: ‘ग’ और ‘त’ (बायाँ वक्र)। <br>नियम: ‘ग’ की ‘ई’ मात्रा ‘त’ के वाम पक्ष में तीसरे स्थान पर स्थानांतरित हो जाएगी। |
| नीति | न + ईत + इ | स्ट्रोक: ‘न’ और ‘त’। <br>नियम: ‘न’ की ‘ई’ मात्रा ‘त’ के वाम पक्ष में जाएगी, जबकि ‘त’ की ‘इ’ मात्रा (हल्का बिंदु) उसके अपने दक्षिण पक्ष में रहेगी। |
| रूम | र + ऊम | स्ट्रोक: ‘र’ (ऊर्ध्वमुखी) और ‘म’ (आड़ा)। <br>नियम: ‘ऊ’ का गहरा डैश ‘म’ के ऊपर वाले हिस्से (वाम पक्ष) में तीसरे स्थान पर लगेगा। |
| खुला | ख + उल + आ | स्ट्रोक: ‘ख’ (हल्का कटा हुआ) और ‘ल’। <br>नियम: ‘उ’ की मात्रा (हल्का डैश) ‘ल’ के वाम पक्ष में तीसरे स्थान पर स्थानांतरित होगी। |
| टील | ट + इल | स्ट्रोक: ‘ट’ (90°) और ‘ल’। <br>नियम: ‘ट’ की ‘ई’ मात्रा ‘ल’ के बाईं ओर सबसे नीचे तीसरे स्थान पर गहरा बिंदु बनकर लगेगी। |
| जील | ज + इल | स्ट्रोक: ‘ज’ (गहरा 60°) और ‘ल’। <br>नियम: ‘ज’ की ई मात्रा ‘ल’ के वाम पक्ष में स्थानांतरित होगी। |
| सील | स + इल | स्ट्रोक: ‘स’ और ‘ल’। <br>नियम: ‘स’ की ई मात्रा ‘ल’ के वाम पक्ष के तीसरे स्थान पर गहरा बिंदु होगी। |
| टूल | ट + ऊल | स्ट्रोक: ‘ट’ और ‘ल’। <br>नियम: ‘ऊ’ का गहरा डैश ‘ल’ के वाम पक्ष में तीसरे स्थान पर स्थानांतरित होगा। |
| सूल | स + ऊल | स्ट्रोक: ‘स’ और ‘ल’। <br>नियम: ‘स’ की ‘ऊ’ मात्रा ‘ल’ के वाम पक्ष में स्थानांतरित होगी। |
| रूल | र + ऊल | स्ट्रोक: ‘र’ (ऊर्ध्वमुखी) और ‘ल’ (ऊर्ध्वमुखी)। <br>नियम: ‘र’ की मात्रा ‘ल’ के वाम पक्ष के तीसरे स्थान पर गहरा डैश बनकर लगेगी। |

4. अभ्यास के लिए वाक्य (Practice Sentences – Step by Step)
नीचे दिए गए वाक्यों का अभ्यास करते समय अपनी पेंसिल की नोक और स्ट्रोक की दिशा पर विशेष ध्यान दें।
- चील उड़ गई।
- चील: ‘च’ (ऊपर से नीचे) बनाएँ, फिर बिना पेंसिल उठाए ‘ल’ (नीचे से ऊपर) बनाएँ। ‘ल’ के वाम पक्ष में तीसरे स्थान पर एक गहरा बिंदु रखें।
- उड़: ‘ड़’ बनाएँ और इसके वाम पक्ष में तीसरे स्थान पर ‘उ’ का हल्का डैश लगाएँ।
- गई: ‘ग’ (आड़ी गहरी रेखा) और ‘य’ (हुक के साथ ऊपर)। ‘य’ के अंत में (दक्षिण पक्ष) गहरा बिंदु लगाएँ।
- पुल टूट गया।
- पुल: ‘प’ और ‘ल’ जोड़ें। ‘ल’ के वाम पक्ष में तीसरे स्थान पर हल्का डैश लगाएँ।
- टूट: दो ‘ट’ नीचे की ओर बनाएँ। दूसरे ‘ट’ के वाम पक्ष में नीचे गहरा डैश लगाएँ।
- गया: ‘ग’ और ‘य’ बनाएँ। ‘य’ के प्रथम स्थान पर (दाहिनी ओर) ‘आ’ का डैश लगाएँ।
- रीना गिर गई है।
- रीना: ‘र’ ऊपर ले जाएँ, ‘न’ जोड़ें। ‘न’ के ऊपर (वाम पक्ष) गहरा बिंदु और ‘न’ के नीचे (दक्षिण पक्ष) प्रथम स्थान पर ‘आ’ का डैश लगाएँ।
- गिर: ‘ग’ और ‘र’ जोड़ें। ‘र’ के वाम पक्ष में हल्का बिंदु लगाएँ।
- सीमा पानी पीती है।
- सीमा: ‘स’ का वक्र बनाएँ, ‘म’ जोड़ें। ‘म’ के ऊपर तीसरा स्थान गहरा बिंदु (‘स’ की मात्रा) और ‘म’ के नीचे प्रथम स्थान (‘म’ की अपनी ‘आ’ मात्रा)।
- पानी: ‘प’ के बाद ‘आ’ और ‘न’ के बाद ‘ई’। यहाँ कोई स्थानांतरण नहीं होगा।
- पीती: ‘प’ और ‘त’ जोड़ें। ‘प’ की ‘ई’ मात्रा ‘त’ के वाम पक्ष में जाएगी। ‘त’ की अपनी ‘ई’ मात्रा उसके दक्षिण पक्ष में रहेगी।
- गीता नीति से बात करती है।
- गीता: ‘ग’ और ‘त’ जोड़ें। ‘त’ के वाम पक्ष में गहरा बिंदु (‘ग’ की मात्रा) और ‘त’ के दक्षिण पक्ष में प्रथम स्थान पर डैश (‘त’ की मात्रा)।
- नीति: ‘न’ और ‘त’ जोड़ें। ‘त’ के वाम पक्ष में गहरा बिंदु (‘न’ की मात्रा) और ‘त’ के दक्षिण पक्ष में हल्का बिंदु (‘त’ की ‘इ’ मात्रा)।
- रूम खुला।
- रूम: ‘र’ (ऊपर की ओर) और ‘म’ (आड़ा)। ‘म’ के ऊपर गहरा डैश लगाएँ।
- खुला: ‘ख’ (काटकर) और ‘ल’ (ऊपर की ओर)। ‘ल’ के वाम पक्ष में हल्का डैश लगाएँ।
also read: Rules for applying vowel marks to consonants in Hindi Lec 4
5. विशेष निर्देश और प्रो-टिप्स (Pro-Tips for Mastery)
एक वरिष्ठ तकनीकी रणनीतिकार के रूप में, मैं आपको वे सूक्ष्म बातें बताना चाहता हूँ जो आपकी गति को 80 wpm से 120 wpm तक ले जाएँगी:
- स्पष्टता का महत्व (Strokes and Pressure): स्टेनोग्राफी में ‘हल्का’ और ‘गहरा’ होना ही अर्थ बदल देता है। ‘पुल’ (हल्का) और ‘भूल’ (गहरा) के बीच का अंतर केवल आपकी पेंसिल के दबाव पर निर्भर करता है। हमेशा एक अच्छी गुणवत्ता वाली स्टेनोग्राफी पेंसिल (जैसे Apsara Steno) का उपयोग करें।
- अभ्यास की तकनीक (The 20x Rule): प्रत्येक उदाहरण शब्द को कम से कम 20 बार अपनी अभ्यास पुस्तिका में लिखें। लिखते समय शब्द का उच्चारण जोर से करें। इससे आपके कान, मस्तिष्क और हाथ के बीच एक समन्वय (Coordination) स्थापित होगा।
- स्थान का चुनाव (The 3rd Position Exclusivity): यह याद रखना अनिवार्य है कि स्थानांतरण का नियम केवल तीसरे स्थान के लिए है। यदि आप ‘पेला’ लिख रहे हैं, तो ‘ए’ की मात्रा ‘प’ के दूसरे स्थान पर ही रहेगी। इसे ‘ल’ पर न ले जाएँ।
- सतत सुधार: हमारे Steno Tips पोर्टल पर उपलब्ध अभ्यास चार्ट्स का उपयोग करें ताकि आपकी सटीकता बनी रहे और आप वास्तविक समय में होने वाली त्रुटियों को पहचान सकें।
6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: क्या यह नियम प्रथम और द्वितीय स्थान की मात्राओं पर भी लागू होता है? उत्तर: बिल्कुल नहीं। प्रथम (जैसे ‘आ’) और द्वितीय (जैसे ‘ओ’) स्थान की मात्राओं के लिए दो व्यंजनों के मिलन बिंदु पर पर्याप्त खाली जगह होती है। इसलिए, वे अपने मूल व्यंजन के साथ ही रहती हैं। स्थानांतरण केवल तीसरे स्थान की भीड़भाड़ को कम करने के लिए है।
प्रश्न 2: यदि शब्द के अंत में तीसरे स्थान की मात्रा हो, तो क्या वह भी स्थानांतरित होगी? उत्तर: नहीं। स्थानांतरण तभी संभव है जब मात्रा के बाद कोई दूसरा व्यंजन आए। यदि मात्रा शब्द के अंत में है (जैसे ‘पक्षी’ में ‘ई’), तो वह अपने नियत स्थान पर ही रहेगी क्योंकि उसके आगे कोई जंक्शन नहीं है।
प्रश्न 3: ‘वाम पक्ष’ (Preceding) और ‘दक्षिण पक्ष’ (Following) क्या हैं? उत्तर: किसी भी स्ट्रोक के बाईं ओर या ऊपर वाला हिस्सा ‘वाम पक्ष’ कहलाता है, जहाँ व्यंजन से पहले आने वाले स्वर लगते हैं। दाहिनी ओर या नीचे वाला हिस्सा ‘दक्षिण पक्ष’ है, जहाँ व्यंजन के बाद आने वाले स्वर लगते हैं।
प्रश्न 4: क्या हम अपनी सुविधानुसार मात्रा का स्थान बदल सकते हैं? उत्तर: नहीं। स्टेनोग्राफी एक मानक प्रणाली है। यदि आप नियम बदलते हैं, तो आप अपनी ही लिखी हुई डिक्टेशन को बाद में पढ़ नहीं पाएंगे। नियमों की कठोरता ही इसकी पठनीयता की शक्ति है।
प्रश्न 5: गति बढ़ाते समय क्या ये मात्राएँ लगाना आवश्यक है? उत्तर: शुरुआत में हाँ। लेकिन जैसे-जैसे आपकी गति बढ़ेगी, आप ‘स्वर लोप’ (Vowel Omission) की तकनीक सीखेंगे। परंतु, उस स्तर तक पहुँचने के लिए इन बुनियादी नियमों का कंठस्थ होना अनिवार्य है।
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7. निष्कर्ष और अगले कदम (Conclusion & Next Steps)
आज आपने हिंदी स्टेनोग्राफी के सबसे चुनौतीपूर्ण तकनीकी नियमों में से एक को सफलतापूर्वक समझ लिया है। “तीसरे स्थान की मात्रा का स्थानांतरण” नियम पर पकड़ बनाना एक छात्र को विशेषज्ञ की श्रेणी में खड़ा कर देता है। अब आप जटिल शब्दों की आउटलाइन बनाने में सक्षम हैं।
Day 5 का यह प्रशिक्षण आपके पूरे करियर में काम आएगा। याद रखें, स्टेनोग्राफी कोई रटने वाला विषय नहीं है, यह एक ‘मसल मेमोरी’ (Muscle Memory) का खेल है। जितनी अधिक बार आपकी पेंसिल कागज़ पर घूमेगी, आपकी गति उतनी ही स्वतः बढ़ती जाएगी।
कल यानी Day 6 में हम ‘व्यंजनों को जोड़ने के उन्नत तरीके’ और कुछ विशेष ‘शब्द-चिन्हों’ की शुरुआत करेंगे। तब तक के लिए, आज के उदाहरणों और वाक्यों का गहन अभ्यास करें। आपका धैर्य और निरंतरता ही आपकी सफलता की कुंजी है।


