आज हम केवल नियम नहीं पढ़ेंगे, बल्कि उन नियमों को शब्दों में ढालना सीखेंगे। Matras Practice Guide (मात्राओं के अभ्यास), बिना मात्राओं के सटीक ज्ञान और अभ्यास के, आप एक कुशल स्टेनोग्राफर नहीं बन सकते। यदि मात्रा गलत स्थान पर लग गई, तो ‘काम’ का ‘कम’ और ‘नील’ का ‘नल’ हो सकता है। इसलिए, आज हम मात्राओं के स्थानांतरण (Transfer of Vowels) और स्ट्रोक के प्रवाह (Hand Flow) पर विशेष ध्यान देंगे।
आप सभी का हमारे 85 दिनों के फ्री हिंदी स्टेनोग्राफी कोर्स के छठे दिन (Day 6, LEC 6) में स्वागत है। मैं आपका इंस्ट्रक्टर, 20 वर्षों के अनुभव के साथ आपको शॉर्टहैंड की इस अद्भुत दुनिया में ले जाने के लिए तैयार हूँ। पिछले पांच दिनों में हमने व्यंजनों की बनावट और मात्राओं के स्थान (First, Second, and Third place) को सैद्धांतिक रूप से समझा। लेकिन याद रखिये, शॉर्टहैंड ज्ञान से नहीं, अभ्यास से आती है।
शॉर्टहैंड मात्रा अभ्यास पद्धति (Methodology of Practice)
एक सीनियर इंस्ट्रक्टर के तौर पर मेरी सलाह है कि आप इस पाठ को केवल पढ़कर न छोड़ें। अभ्यास करने का सही तरीका यह है:
- स्व-परीक्षण (Self-Test): इस लेख में दिए गए शब्दों की सूची देखें। अपनी नोटबुक निकालें और वीडियो या इस गाइड के समाधान को देखे बिना स्वयं आउटलाइन बनाने का प्रयास करें।
- विश्लेषण (Analysis): अब मेरे द्वारा समझाए गए ‘स्ट्रोक कंस्ट्रक्शन’ से अपनी आउटलाइन का मिलान करें। देखें कि क्या आपने पेंसिल का दबाव (Light/Heavy stroke) सही रखा है।
- मेहमान नियम का पालन (The Guest Rule): हमेशा याद रखें—“तीसरा स्थान हमेशा अगले का मेहमान होता है।” यानी पहले व्यंजन की तीसरी मात्रा अगले व्यंजन के ‘पहले’ (Before) वाले भाग में तीसरे स्थान पर स्थानांतरित हो जाती है।
- पुनरावृत्ति (Repetition): प्रत्येक शब्द को कम से कम 10-15 बार लिखें जब तक कि वह आपकी उंगलियों की मांसपेशियों की स्मृति (Muscle Memory) में न बस जाए।
विस्तृत शब्द अभ्यास सूची (Detailed Word Practice – Part 1)
नीचे दी गई तालिका में प्रारंभिक शब्दों को उनके निर्माण की बारीकियों के साथ समझाया गया है। शॉर्टहैंड में ‘हल्की’ और ‘गहरी’ रेखा का बहुत महत्व है।
| हिंदी शब्द | स्टेनो संकेत निर्माण (Step-by-Step Construction) | पेंसिल की दिशा और प्रवाह | नियम/मात्रा का प्रकार |
| नीलम | सबसे पहले एक हल्की क्षैतिज (Horizontal) ‘न’ रेखा बनाएँ, फिर बिना पेंसिल उठाए नीचे की ओर झुकती हुई ‘ल’ रेखा और अंत में ‘म’ जोड़ें। | न (बाएं से दाएं) -> ल (नीचे की ओर) -> म (बाएं से दाएं) | तीसरे स्थान का स्थानांतरण: ‘न’ की ‘ई’ मात्रा ‘ल’ के ‘Before’ भाग में तीसरे स्थान पर मेहमान बनकर जाएगी। |
| रीना | नीचे से ऊपर की ओर जाने वाली 30 डिग्री पर ‘र’ रेखा बनाएँ, फिर उसके साथ ‘न’ जोड़ें। | र (ऊपर की ओर) -> न (क्षैतिज) | ‘र’ की ‘ई’ मात्रा ‘न’ के पहले तीसरे स्थान पर ट्रांसफर होगी। ‘न’ के पहले स्थान पर ‘आ’ का डैश लगेगा। |
| आम | एक हल्की क्षैतिज ‘म’ रेखा बनाएँ। | म (बाएं से दाएं) | ‘म’ से पहले (ऊपर की ओर) प्रथम स्थान पर एक गहरा डैश लगाएँ। |
| झील | एक गहरी और कटी हुई ‘झ’ रेखा बनाएँ, फिर नीचे की ओर ‘ल’ जोड़ें। | झ (नीचे की ओर) -> ल (नीचे की ओर) | ‘झ’ की ‘ई’ मात्रा ‘ल’ के ‘Before’ भाग में तीसरे स्थान पर स्थानांतरित होगी। |
| रील | ऊपर की ओर जाने वाला ‘र’ और फिर नीचे आने वाला ‘ल’ बनाएँ। | र (ऊपर) -> ल (नीचे) | तीसरे स्थान की मात्रा का प्रयोग। र की ‘ई’ मात्रा ल के पहले लगेगी। |
| गीता | एक गहरी ‘ग’ रेखा और उसके साथ ‘त’ का मेल करें। | ग (क्षैतिज) -> त (नीचे की ओर) | ‘ग’ की ‘ई’ मात्रा ‘त’ के पहले तीसरे स्थान पर और ‘त’ के प्रथम स्थान पर ‘आ’ का डैश। |
| गाना | ‘ग’ (गहरी) और ‘न’ (हल्की) रेखाएं निरंतरता में खींचें। | ग (क्षैतिज) -> न (क्षैतिज) | दोनों के प्रथम स्थान पर ‘आ’ की मात्रा (गहरा डैश) लगेगी। |
| बाग | एक गहरी ‘ब’ रेखा और उसके साथ ‘ग’ (गहरी) रेखा जोड़ें। | ब (तिरछा नीचे) -> ग (क्षैतिज) | ‘ब’ के प्रथम स्थान पर ‘आ’ का गहरा डैश। |
| घोड़ा | ‘घ’ (गहरी कटी हुई) और ‘ड़’ (नीचे से ऊपर कटी हुई) का प्रयोग करें। | घ (क्षैतिज) -> ड़ (ऊपर की ओर) | ‘घ’ के दूसरे स्थान पर ‘ओ’ (डैश) और ‘ड़’ के प्रथम स्थान पर ‘आ’ (डैश)। |
| रेशम | ‘र’ (ऊपर), ‘श’ (नीचे) और ‘म’ (क्षैतिज) का एक सुचारु प्रवाह बनाएँ। | र -> श -> म | ‘र’ के दूसरे स्थान पर ‘ए’ के लिए एक गहरा बिंदु लगाएँ। |

शब्द अभ्यास – भाग 2: दिशा और प्रवाह (Direction and Flow)
शॉर्टहैंड की गति इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस स्ट्रोक के बाद कौन सा स्ट्रोक जोड़ रहे हैं। ‘ह’ और ‘र’ जैसे अक्षरों के लिए हमारे पास दो विकल्प होते हैं—ऊपर की ओर या नीचे की ओर।
- हाल (दो तरीके):
- Downward H: यदि आप ‘ह’ को ऊपर से नीचे लाते हैं, तो ‘ल’ को वहीं से जोड़ना आसान होता है।
- Upward H: यदि आप नीचे से गोल घुमाकर ऊपर जाने वाला ‘ह’ बनाते हैं, तो ‘ल’ को भी ऊपर ले जाना होगा। विशेष निर्देश: ‘ह’ के प्रथम स्थान (Stroke के शुरू में) पर ‘आ’ का डैश लगाएं।
- रेली: यहाँ ‘र’ (ऊपर जाने वाला) और ‘ल’ (ऊपर जाने वाला) का प्रयोग सबसे तेज गति देता है। ‘र’ के दूसरे स्थान पर ‘ए’ (बिंदु) और ‘ल’ के तीसरे स्थान पर ‘ई’ (बिंदु) लगाएं।
प्रवाह वाले अन्य शब्द:
- चाल: हल्की ‘च’ (नीचे की ओर) और ‘ल’ (ऊपर की ओर)। ‘च’ के प्रथम स्थान पर ‘आ’ की मात्रा।
- दाल: गहरी ‘द’ और ‘ल’ का मेल। ‘द’ के शुरू में ‘आ’ का गहरा डैश।
- माल: ‘म’ और ‘ल’ का जोड़। ‘म’ के ऊपर (Before side) प्रथम स्थान पर ‘आ’ की मात्रा।
- साल: ‘स’ और ‘ल’ का प्रयोग। ‘स’ के बाईं ओर प्रथम स्थान पर ‘आ’ का प्रयोग करें।
‘ल’ के साथ संयोजन (The Upward Advantage):
जब ‘च’, ‘म’, ‘र’, या ‘ग’ के बाद ‘ल’ आता है, तो अक्सर ‘ल’ को ऊपर की ओर ले जाना पेंसिल के प्रवाह को बनाए रखता है।
- गीला: गहरी ‘ग’ और ऊपर जाने वाला ‘ल’। ‘ग’ की ‘ई’ मात्रा ‘ल’ के पहले वाले हिस्से में तीसरे स्थान पर ट्रांसफर होगी। ‘ल’ के बाद प्रथम स्थान पर ‘आ’ का डैश लगेगा।
जटिल और संयुक्त शब्द अभ्यास (Advanced Word Drills)
जैसे-जैसे शब्दों की लंबाई बढ़ती है, मात्राओं का सही “Before/After” समझना अनिवार्य हो जाता है। याद रखें:
- Horizontal Strokes (K, G, M, N): रेखा के ऊपर का भाग ‘Before’ (पहले) है, नीचे का भाग ‘After’ (बाद में) है।
- Vertical/Slanting Strokes: रेखा के बाईं (Left) ओर का भाग ‘Before’ है, दाईं (Right) ओर का भाग ‘After’ है।
| शब्द | निर्माण प्रक्रिया (Detailed Construction) | विशेष निर्देश (Vowel Positioning) |
| सिमरन | हल्की ‘स’, ‘म’, ‘र’ और ‘न’ को एक ही गति में लिखें। पेंसिल न उठाएं। | ‘स’ की ‘इ’ (हल्का बिंदु) ‘म’ के ऊपर (Before side) तीसरे स्थान पर मेहमान बनकर आएगी। |
| सारख | ‘स’, ऊपर जाने वाला ‘र’ और कटी हुई ‘ख’ रेखा। | ‘स’ पर ‘आ’ (1st place)। ‘र’ पर ‘उ’ की मात्रा ‘ख’ के पहले तीसरे स्थान पर लगेगी। |
| हकीम | ऊपर जाने वाला ‘ह’, हल्की ‘क’ और ‘म’ रेखा। | ‘क’ की ‘ई’ मात्रा ‘म’ के ऊपर (Before side) तीसरे स्थान पर स्थानांतरित होगी। |
| नदीम | हल्की ‘न’, गहरी ‘द’ और ‘म’ का संयोजन। | ‘द’ की ‘ई’ मात्रा ‘म’ के पहले (Before) तीसरे स्थान पर जाएगी। |
| महेश | ‘म’, ऊपर जाने वाला ‘ह’ और ‘श’ का वक्र (Curve)। | ‘ह’ के बाद दूसरे स्थान पर ‘ए’ का गहरा बिंदु लगाएँ। |
| सुरेश | ‘स’, ‘र’ (ऊपर) और ‘श’ का मेल। | ‘स’ की ‘उ’ मात्रा ‘र’ के पहले तीसरे स्थान पर और ‘र’ की ‘ए’ मात्रा ‘श’ के पहले दूसरे स्थान पर जाएगी। |
| दिनेश | गहरी ‘द’, ‘न’ और ‘श’ का प्रयोग। | ‘द’ की ‘इ’ मात्रा ‘न’ के ऊपर तीसरे स्थान पर और ‘न’ की ‘ए’ मात्रा ‘श’ के पहले दूसरे स्थान पर। |
| जामुन | गहरी ‘ज’, ‘म’ और ‘न’ की आउटलाइन। | ‘ज’ के बाद 1st place पर ‘आ’ का डैश। ‘म’ की ‘उ’ मात्रा ‘न’ के पहले 3rd place पर। |
| बरफी | ‘ब’ (गहरी), ‘र’ (ऊपर), ‘फ’ (कटी हुई) और ‘ई’ की मात्रा। | ‘फ’ के बाद अंत में तीसरे स्थान पर गहरा बिंदु लगाएं। |
| दिवाकर | ‘द’ (गहरी), ‘व’, ‘क’, ‘र’ (ऊपर)। | ‘द’ की ‘ई’ मात्रा ‘व’ के पहले तीसरे स्थान पर और ‘व’ के प्रथम स्थान पर ‘आ’ का डैश। |
व्यावसायिक शब्दावली और क्रियाएं (Action Verbs and Daily Words)
इन शब्दों का प्रयोग डिक्टेशन में बार-बार होता है, इसलिए इनकी बनावट को ध्यान से समझें:
- जाना / जानी / पानी: ‘ज’ या ‘प’ के बाद ‘न’ का स्ट्रोक। ‘जाना’ में दोनों पर प्रथम स्थान का डैश है। ‘जानी’ में ‘न’ के बाद तीसरे स्थान पर गहरा बिंदु लगाएँ।
- देखना / रोकना / रोना: ‘देखना’ में ‘द’ के दूसरे स्थान पर ‘ए’ का बिंदु। ‘रोकना’ में ‘र’ को ऊपर से नीचे लाना (Downward R) ज्यादा सुविधाजनक है ताकि ‘क’ और ‘न’ का कोण सही बने।
- दीवाना / जमाना / रवाना / दिखाना: ‘दीवाना’ एक चुनौतीपूर्ण शब्द है। ‘द’ की ‘ई’ मात्रा ‘व’ के पहले जाएगी, ‘व’ के बाद ‘आ’ का डैश और ‘न’ के बाद ‘आ’ का डैश। यहाँ पेंसिल का दबाव एकसमान रखें।
- हमेशा: ‘ह’ (ऊपर), ‘म’ और ‘स’ का प्रयोग। ‘म’ पर ‘ए’ की मात्रा और ‘स’ पर ‘आ’ की मात्रा। यह एक ‘Speed Word’ है, इसका अभ्यास अधिक करें।
- कील / सील / मील: इन सभी में तीसरे स्थान की मात्रा (ई) अगले अक्षर (ल) के ‘Before’ साइड में तीसरे स्थान पर शिफ्ट हो जाएगी।
- हुकम / कलेश / निलेश / देवेश:
- हुकम: ‘ह’ और ‘क’ के बीच ‘उ’ की मात्रा ‘क’ के ऊपर तीसरे स्थान पर जाएगी।
- कलेश: ‘क’, ‘ल’, ‘श’ में ‘ल’ के दूसरे स्थान पर ‘ए’ की मात्रा।
- निलेश: ‘न’ की ‘इ’ मात्रा ‘ल’ के पहले स्थानांतरित होगी।
- दिया / दुगुना / भागना: ‘दुगुना’ में ‘द’ की ‘उ’ मात्रा ‘ग’ के ऊपर स्थानांतरित होगी और ‘न’ पर ‘आ’ का डैश लगेगा।
वाक्य अभ्यास: स्टेनो से हिंदी अनुवाद (Sentence Practice: Mastering Context)
वाक्यों को लिखते समय शब्दों के बीच की दूरी (Spacing) और लाइन की स्थिति का ध्यान रखना अनिवार्य है। नीचे 12 वाक्य दिए गए हैं, जो आपके हाथ की गति और अनुवाद क्षमता को परखेंगे:
- आम का पेड़: ‘आम’ (लाइन से ऊपर), ‘का’ (लाइन पर क + आ), ‘पेड़’ (प + ए की मात्रा + ड़)।
- प्रो-टिप: ‘पेड़’ में ‘ड़’ को काटकर लिखें ताकि वह ‘र’ न लगे।
- रेशम का कीड़ा: ‘रेशम’ में ‘र’ ऊपर की ओर, ‘कीड़ा’ में ‘क’ की ‘ई’ मात्रा ‘ड़’ पर मेहमान बनकर आएगी।
- जामुन का फल: ‘जामुन’ में ‘ज’ गहरी रेखा है, ‘फल’ में ‘फ’ को काटकर ‘ल’ ऊपर ले जाएँ।
- खजूर का नीरा: ‘खजूर’ में ‘ज’ की ‘ऊ’ मात्रा ‘र’ के पहले तीसरे स्थान पर जाएगी। ‘नीरा’ में ‘न’ की ‘ई’ मात्रा ‘र’ पर ट्रांसफर होगी।
- सूरज की रोशनी: ‘सूरज’ लिखते समय ‘स’ के बाद ‘ऊ’ का स्थानांतरण ‘र’ पर करें। ‘रोशनी’ में ‘न’ की ‘ई’ मात्रा अंत में स्पष्ट लगाएं।
- माता की रोटी: ‘माता’ में दोनों डैश प्रथम स्थान पर। ‘रोटी’ में ‘र’ पर ‘ओ’ (2nd place) और ‘ट’ पर ‘ई’ (3rd place)।
- पिता की मेहनत: ‘पिता’ में ‘प’ की ‘इ’ मात्रा ‘त’ के पहले स्थानांतरित होगी। ‘मेहनत’ में ‘ह’ को छोटा और स्पष्ट रखें।
- सीता गाना गाती है: ‘सीता’ में स्थानांतरण नियम लागू होगा। ‘है’ के लिए एक छोटा तिरछा टिक लाइन के ऊपर लगाएं।
- राम बाजार जाता है: ‘बाजार’ में ‘ब’ और ‘ज’ दोनों गहरी रेखाएं हैं। दोनों पर ‘आ’ के डैश लगाएं।
- रमेश खाना खाता है: ‘रमेश’ में ‘म’ के दूसरे स्थान पर बिंदु। ‘खाता’ में ‘ख’ को बीच से काटें।
- पकोड़ी की दुकान: ‘पकोड़ी’ में ‘क’ पर ‘ओ’ का डैश और ‘ड़’ पर ‘ई’ का बिंदु। ‘दुकान’ में ‘द’ की ‘उ’ मात्रा ‘क’ के ऊपर (Before) स्थानांतरित होगी।
- मीठा खाना नुकसान देता है: ‘मीठा’ में ‘म’ की ‘ई’ मात्रा ‘ठ’ के पहले आएगी। ‘नुकसान’ में ‘न’ की ‘उ’ मात्रा ‘क’ के ऊपर और ‘स’ के बाद ‘आ’ का डैश लगेगा।
स्टेनो एक्सपर्ट टिप्स (Expert Tips for Mastery)
- Pencil Choice: हमेशा स्टेनो पेंसिल का ही उपयोग करें। साधारण पेंसिल से हल्की और गहरी रेखाओं का अंतर स्पष्ट नहीं होता।
- The Angle Rule: जब आप दो व्यंजनों को जोड़ते हैं, तो उनके बीच का कोण (Angle) बहुत स्पष्ट होना चाहिए। यदि कोण नहीं बन रहा है, तो ‘र’ या ‘ह’ की दिशा बदल कर देखें (जैसे ‘रोकना’ में Downward R)।
- Vowel Shifting Mastery: तीसरे स्थान की मात्रा को अगले व्यंजन के ‘Before’ भाग में लगाने का अभ्यास इतना करें कि आपको सोचना न पड़े। इसे “मेहमान नियम” के रूप में याद रखें।
- Stroke Stability: जब आप ‘ग’ या ‘ब’ जैसे गहरे अक्षर बनाते हैं, तो पेंसिल पर दबाव बढ़ाएं, लेकिन इतना नहीं कि कागज फट जाए या गति धीमी हो जाए।
संसाधन और संदर्भ (Resources and Linking)
शॉर्टहैंड का इतिहास और इसकी विभिन्न प्रणालियों के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप Shorthand विकिपीडिया पेज देख सकते हैं।
यदि आपने हमारे पिछले महत्वपूर्ण पाठ Day 5 LEC (मात्राओं के स्थान और प्रकार) को मिस कर दिया है, तो आज का अभ्यास आपको कठिन लग सकता है। मैं आपको दृढ़ता से सलाह देता हूँ कि आगे बढ़ने से पहले उस पाठ को पुनः दोहराएँ। साथ ही, अपनी टाइपिंग स्पीड के लिए “Typing Master Pro” का नियमित अभ्यास जारी रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ Section)
Q1: मुझे तीसरे स्थान की मात्रा और स्थानांतरण नियम में बहुत भ्रम होता है, क्या करूँ? उत्तर: यह हर छात्र की शुरुआती समस्या है। इसका समाधान केवल ‘Placement’ को बार-बार देखना है। याद रखें कि स्थानांतरण केवल तब होता है जब मात्रा के बाद कोई दूसरा व्यंजन जुड़ा हो। यदि शब्द केवल एक व्यंजन का है (जैसे ‘पी’, ‘दी’), तो मात्रा उसी के तीसरे स्थान पर लगेगी। अभ्यास ही इसे सरल बनाएगा।
Q2: क्या हम एक शब्द को अपनी मर्जी से किसी भी दिशा में लिख सकते हैं? उत्तर: नहीं, स्टेनोग्राफी के कुछ मानक नियम हैं। हालाँकि ‘हाल’, ‘रेली’ या ‘रोकना’ जैसे शब्दों में विकल्प होते हैं, लेकिन आपको वह विकल्प चुनना चाहिए जो आपके हाथ की गति (Speed) को कम न करे और आउटलाइन को साफ रखे।
Q3: पेंसिल या पेन, अभ्यास के लिए क्या बेहतर है? उत्तर: सीखने के शुरुआती चरणों में हमेशा स्टेनो पेंसिल का उपयोग करें। यह आपको स्ट्रोक के हल्के और गहरेपन को नियंत्रित करने में मदद करती है, जो पेन से संभव नहीं है।
also read: Transfer of 3rd Position Vowels (मात्रा का स्थानांतरण) Lec 5
निष्कर्ष (Conclusion)
आज के Day 6 के सघन अभ्यास सत्र में आपने शब्दों के निर्माण और मात्राओं के सूक्ष्म प्रबंधन को सीखा है। शॉर्टहैंड कोई जादू नहीं है, बल्कि यह आपकी उंगलियों और दिमाग के बीच का एक विशेष अनुशासन है। आज बताए गए सभी शब्दों और 12 वाक्यों का कम से कम 2-3 घंटे अभ्यास करें।
अगले पाठ (Day 7) में हम कुछ नए शब्द-चिह्नों (Logograms) और एडवांस जॉइनिंग तकनीकों के बारे में सीखेंगे, जो आपकी गति को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होंगे। तब तक अभ्यास करते रहें, क्योंकि आपकी आज की मेहनत ही कल की सफलता का आधार है।


